,

हरियाणा में नशे की खेपों पर सख्ती, रेल-सड़क मार्ग से आने वाले सामान की होगी कड़ी निगरानी

अंबाला. पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव के बाद अब हरियाणा भी नशा तस्करों के निशाने पर है। प्रदेश में नशे की आपूर्ति का नेटवर्क कई दिशाओं से फैल रहा है। मध्य प्रदेश से अफीम की आपूर्ति, रेलवे के जरिये होने वाली तस्करी और दिल्ली से सक्रिय विदेशी नेटवर्क ने हरियाणा के लिए चुनौती बढ़ा…

हरियाणा में नशे की खेपों पर सख्ती, रेल-सड़क मार्ग से आने वाले सामान की होगी कड़ी निगरानी

अंबाला.

पंजाब में नशे के बढ़ते प्रभाव के बाद अब हरियाणा भी नशा तस्करों के निशाने पर है। प्रदेश में नशे की आपूर्ति का नेटवर्क कई दिशाओं से फैल रहा है। मध्य प्रदेश से अफीम की आपूर्ति, रेलवे के जरिये होने वाली तस्करी और दिल्ली से सक्रिय विदेशी नेटवर्क ने हरियाणा के लिए चुनौती बढ़ा दी है।

हालांकि, समय रहते इस पूरे गठजोड़ को तोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य कार्ययोजना तैयार कर काम आरंभ कर दिया है। लक्ष्य सिर्फ तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि नशे की आपूर्ति से लेकर उसके वितरण और अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति तक पूरे तंत्र को ध्वस्त करना है। पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी को बढ़ावा दिए जाने के बीच सीमा से सटे इलाकों में नशे की खेप पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहले से चुनौती है। यही नेटवर्क पंजाब से हरियाणा की ओर भी अपना रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में अफीम की खेती और वहां से होने वाली आपूर्ति भी हरियाणा में नशे के कारोबार की एक कड़ी बन रही है।

रेलवे बना तस्करों के लिए आसान रास्ता
नशे की तस्करी में सड़क के साथ रेलवे का इस्तेमाल भी लगातार चुनौती बना हुआ है। दूसरे राज्यों से आने वाली ट्रेनों के माध्यम से नशीले पदार्थ हरियाणा तक पहुंचाए जाने की कोशिश होती है। अंबाला जैसे बड़े रेलवे जंक्शन की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, चंडीगढ़ और दिल्ली समेत कई दिशाओं से ट्रेनों का आवागमन होता है। तस्कर यात्रियों, सामान या कैरियर के माध्यम से नशे की खेप पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में रेलवे सुरक्षा बल, राजकीय रेलवे पुलिस और जिला पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाकर संदिग्ध यात्रियों और सामान पर नजर रखने की रणनीति अपनाई जा रही है।

दिल्ली से नाइजीरियन नेटवर्क की चुनौती
नशे की तस्करी का एक और रास्ता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ रहा है। दिल्ली में सक्रिय नाइजीरियाई नागरिकों से जुड़े तस्करी नेटवर्क के तार हरियाणा तक पहुंचने की जानकारी ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशी नेटवर्क किस तरह स्थानीय तस्करों और कैरियर से संपर्क बनाकर नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहे हैं। इसलिए कार्रवाई अब केवल छोटे तस्करों या कैरियर तक सीमित रखने के बजाय आपूर्तिकर्ता, वितरक, वित्तीय मददगार और पूरे नेटवर्क तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

तस्कर पकड़े ही नहीं जा रहे, उनकी कमाई भी छीनी जा रही
हरियाणा सरकार ने नशे के खिलाफ कार्रवाई को आर्थिक मोर्चे तक पहुंचा दिया है। नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे कानून के तहत फ्रीज और कुर्क करने की कार्रवाई की जा रही है। जमीन, मकान, दुकान, वाहन और बैंक खातों की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि संपत्ति खरीदने के लिए धन का स्रोत क्या था। जहां नशे की कमाई से संपत्ति बनाने या सरकारी जमीन पर कब्जा करने के मामले सामने आ रहे हैं, वहां संबंधित विभागों के साथ मिलकर बुलडोजर कार्रवाई भी की जा रही है। इससे तस्करों को यह संदेश देने की कोशिश है कि नशे के कारोबार से बनाई गई संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी।

14 से अधिक जिलों में नशा तस्करी के सभी मामले वर्कआउट
हरियाणा पुलिस ने नशा तस्करी के मामलों में जिला स्तर पर हुई कार्रवाई का विस्तृत रिकार्ड तैयार कर अधिकारियों के साथ साझा किया है। इसके अनुसार प्रदेश के 14 से अधिक जिलों में दर्ज नशा तस्करी के मामलों का शत-प्रतिशत वर्कआउट किया गया है। इनमें मुख्य रूप से अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, हांसी, झज्जर, कैथल, करनाल, महेंद्रगढ़, पंचकूला, पानीपत, रोहतक, रेवाड़ी और यमुनानगर शामिल हैं। यह आंकड़ा पुलिस के लिए उपलब्धि के साथ-साथ उन जिलों के लिए भी चुनौती है जहां नशे के नेटवर्क को तोड़ने के लिए और बेहतर कार्रवाई की जरूरत है।

स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के निशाने पर तस्कर
हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और स्टेट क्राइम ब्रांच के साथ जिला पुलिस को भी इस अभियान में सक्रिय किया गया है। जांच एजेंसियों की नजर उन नेटवर्क पर है, जो दूसरे राज्यों से हरियाणा में नशीले पदार्थ पहुंचा रहे हैं। रेल और सड़क दोनों रास्ते तस्करों के निशाने पर हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, राजमार्गों और अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। नशे की तस्करी से जुड़े कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों की भूमिका सामने आने से जांच एजेंसियों के लिए यह नेटवर्क और गंभीर चुनौती बन गया है।

तस्कर जेल में, पैसा और संपत्ति भी नहीं बचेगी
अब कार्रवाई का सबसे बड़ा हथियार तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ना है। व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में आरोपितों और उनसे जुड़े लोगों की आय तथा संपत्ति का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों की जमीन, मकान, दुकान और वाहन खरीदने के लिए पैसा कहां से आया। यदि संपत्ति के वैध स्रोत का संतोषजनक प्रमाण नहीं मिलता और जांच में उसका संबंध नशे के कारोबार से सामने आता है तो उसे कानून के तहत कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। संपत्ति को फ्रीज और कुर्क करने की प्रक्रिया के जरिए तस्करों की अवैध कमाई को उनके हाथ से निकालने की कोशिश है।

कुरुक्षेत्र में 14 करोड़ से अधिक की संपत्ति पर कार्रवाई
कुरुक्षेत्र में नशा तस्करों की कृषि भूमि, मकान और बैंक खातों समेत 14 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर कार्रवाई की गई है। सिरसा में भी तस्करों की करीब 12 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाई गई है। इसी तरह फतेहाबाद और डबवाली क्षेत्र में तस्करों की दुकान, मकान और महंगी गाड़ियों पर कार्रवाई हुई है। अंबाला और यमुनानगर में जमीन, व्यावसायिक परिसरों और बैंक जमा राशि की जांच करते हुए चार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। कैथल में भी पांच से अधिक सक्रिय तस्करों की 84 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति और बैंक राशि फ्रीज कराई गई है। हिसार और जींद में करीब 3.5 करोड़ की संपत्ति पर कार्रवाई की गई है।

सरकारी जमीन पर कब्जा तो बुलडोजर तैयार
तस्करों की अवैध कमाई से बने मकान और दुकान ही नहीं, सरकारी जमीन पर किए गए कब्जे भी निशाने पर हैं। हिसार में सिविल अस्पताल के पीछे स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर किए गए अवैध निर्माणों को ढहाया गया। रनाल के तरावड़ी में नशा तस्करी के मामलों में आरोपित व्यक्ति से जुड़े अवैध होटल और दुकानों पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। गुरुग्राम और फरीदाबाद में सरकारी जमीन पर बनाए गए अवैध निर्माण और कब्जे हटाकर करोड़ों रुपये की जमीन को मुक्त कराया गया। रोहतक और नूंह में भी सरकारी और पंचायती जमीन पर बने तस्करों के कब्जों की जांच और कार्रवाई जारी है।

विदेशी कड़ियां सामने आने से बढ़ी चुनौती
नशे की तस्करी के कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों की भूमिका सामने आने के बाद जांच एजेंसियां स्थानीय तस्करों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। एजेंसियों का फोकस अब केवल छोटे कैरियर पकड़ने के बजाय आपूर्ति करने वाले, पैसा लगाने वाले और नशे की कमाई को संपत्ति में बदलने वाले पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports