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किसानों के लिए बना खास ‘स्मार्ट बूट’, सांपों से बचाएगा पैर और खतरा मिलते ही करेगा अलर्ट

चंडीगढ़. खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों, बागान कर्मियों और वन कर्मचारियों को सांप के काटने से बचाने के लिए लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय (एलपीयू) के शोधकर्ताओं ने एक विशेष बूट तैयार किया है। इस बूट को इस तरह बनाया गया है कि यह पैर को सांप के काटने से बचाने के साथ ही चलते…

किसानों के लिए बना खास ‘स्मार्ट बूट’, सांपों से बचाएगा पैर और खतरा मिलते ही करेगा अलर्ट

चंडीगढ़.

खेतों में काम करने वाले किसानों, मजदूरों, बागान कर्मियों और वन कर्मचारियों को सांप के काटने से बचाने के लिए लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय (एलपीयू) के शोधकर्ताओं ने एक विशेष बूट तैयार किया है। इस बूट को इस तरह बनाया गया है कि यह पैर को सांप के काटने से बचाने के साथ ही चलते समय सांप को मानव की मौजूदगी का संकेत भी दे सके।

शोधकर्ताओं ने इसका कार्यशील नमूना तैयार किया है और अब इसके व्यवहारिक परीक्षण की तैयारी की जा रही है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शोध एवं परियोजना विभाग के अंतर्गत तैयार किए गए इस बूट में दो प्रमुख परतें हैं। पहली परत सांप के दांतों को त्वचा तक पहुंचने से रोकने के लिए काटने से बचाने वाले विशेष कपड़े से बनाई गई है। यही परत बूट को वास्तविक सुरक्षा प्रदान करती है। शोधकर्ताओं के अनुसार खेतों में काम करने वाले लोगों के पैरों और निचले हिस्से में सांप के काटने की घटनाएं अधिक होती हैं। हालांकि सुरक्षा वाले जूते उपलब्ध हैं, लेकिन भारी, गर्म और लंबे समय तक पहनने में असुविधाजनक होने के कारण खेतों में उनका इस्तेमाल सीमित रहता है।

बूट की दूसरी परत प्रयोग के स्तर पर है। इसमें लगा छोटा गति संवेदक व्यक्ति के प्रत्येक कदम को पहचानता है। इसके साथ जुड़ा ध्वनि उपकरण हर कदम पर बहुत कम आवृत्ति वाली ध्वनि की छोटी तरंग छोड़ता है। इसका उद्देश्य सांप को कुछ क्षण पहले ही इंसान की मौजूदगी का एहसास कराना है, ताकि वह वहां रुकने के बजाय सुरक्षित दूरी पर चला जाए। इस अवधारणा के पीछे वर्ष 2023 में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन भी आधार है। क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने स्वतंत्र रूप से घूम रहे सांपों पर कम आवृत्ति वाली ध्वनियों का अध्ययन किया था। इसमें पाया गया कि सांप पूरी तरह बहरे नहीं होते और कई प्रजातियां ऐसी ध्वनियों से दूर हटने की प्रवृत्ति दिखाती हैं।

यह शोध ऋषव राज और आकांक्षा राठौर द्वारा मंदीप सिंह और रुहुल चौधरी के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है। शोध दल अब सर्प विशेषज्ञों तथा सांप के काटने की घटनाओं को कम करने के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के सहयोग से इसके व्यवहारिक परीक्षण की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

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