लखनऊ
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 के देश विभाजन को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विभाजन और उसकी विभीषिका के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है। सत्ता की लालसा में कांग्रेस नेताओं ने एक राष्ट्र को विभाजित कर दिया और जनविश्वास के साथ विश्वासघात किया मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में जो लोग मौन थे, उनकी नजर देशहित के बजाय सत्ता पर थी। आज भी उनके कृत्य नहीं बदले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाजन के समय पाकिस्तान को सिंध और पंजाब समेत ऐसे भूभाग भी दे दिए गए, जिन्हें उसने कभी मांगा तक नहीं था। योगी ने कहा कि यह सब सत्ता हासिल करने की लालसा में किया गया।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचार का जिक्र किया
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले क्रांतिकारियों और देशभक्तों को भुला दिया गया, जबकि देश का विभाजन कराने वाले ही सर्वेसर्वा बन गए। देश की अनेक संस्थाओं और योजनाओं के नाम एक ही परिवार के नाम पर रखे गए और समाज लंबे समय तक मौन रहा मुख्यमंत्री ने हाल के बांग्लादेश के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं पर हुए अत्याचार और कथित कत्लेआम पर भी कुछ लोग मौन रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा वोट बैंक छिनने के डर से किया गया। योगी ने कहा कि ऐसे लोग सत्ता को अपने परिवार की जागीर समझते हैं और आज भी उसी सोच के साथ राजनीति कर रहे हैं।
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध क्यों?
योगी आदित्यनाथ ने नागरिकता संशोधन कानून का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब नागरिकता कानून लेकर आए तो उसमें कहीं नहीं लिखा था कि किसी मुस्लिम, कांग्रेस या सपा की जमीन ली जाएगी। इसके बावजूद इसका विरोध किया गया और लखनऊ, मेरठ, कानपुर समेत कई स्थानों पर दंगे फैलाने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार थी, इसलिए दंगाइयों को पता था कि उन्हें इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
इतिहास की गलतियों से सबक लेना होगा- योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास की गलतियों से सबक लेना जरूरी है। नई पीढ़ी को विभाजन की त्रासदी की वास्तविकता बतानी होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को विभाजन के दौरान हुई घटनाओं और उसके दर्द की जानकारी दें, ताकि इतिहास को भुलाया न जा सके। योगी ने कहा कि यदि 1947 में नरेंद्र मोदी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे दृढ़ नेतृत्व वाले प्रधानमंत्री होते तो देश का विभाजन नहीं होने दिया जाता। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी से सीख लेकर देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
















