लुधियाना
ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (ग्लाडा) अनसोल्ड सरकारी प्रॉपर्टी के रिजर्व प्राइस कम करने की तैयारी में है। बार-बार ई-नीलामी के बावजूद खरीदार नहीं मिलने के बाद अथॉरिटी पांच साइट्स की कीमतों की समीक्षा कर रही है।
ग्लाडा का मानना है कि पिछले कई वर्षों में तय की गई रिजर्व कीमतें बाजार की मौजूदा स्थिति के मुकाबले अधिक थीं। इसी वजह से इन साइट्स को नीलामी में खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। अब स्वतंत्र रिपोर्ट्स में सामने आने वाली 'रियलाइजेबल वैल्यू' को ही आगामी नीलामियों के लिए नया आधार माना जाएगा। इस प्रक्रिया के दायरे में लुधियाना शहर के पॉश इलाकों में स्थित प्राइम रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंस्टीट्यूशनल और इंडस्ट्रियल प्लॉट को शामिल किए गए हैं।
अथॉरिटी ने इसके लिए बिड्स प्रक्रिया पूरी कर ली है। वैल्यूअर्स को रिपोर्ट सौंपने के लिए 21 दिनों का सख्त समय दिया है। उम्मीद है कि कीमतें व्यावहारिक होने के बाद इन बहुमूल्य जमीनों की नीलामी आसान होगी और ग्लैडा के खजाने में राजस्व आएगा।
ग्लाडा किन प्रॉपर्टीज के रेट रिवाइज्ड कर रहा है, जानिए…
मिनी सचिवालय के सामने 8.18 एकड़ जमीन: डीसी दफ्तर के सामने इरिगेशन/कैनाल डिपार्टमेंट की 8.18 एकड़ जमीन है। इसे ओयूवीजीएल (OUVGL) मिक्स लैंड यूज चंक के तौर पर बेचा जाना है। वर्ष 2014 में इसका रिजर्व प्राइस ₹415.71 करोड़ तय किया गया था। खरीदार न मिलने पर इसे 20% घटाकर ₹333.79 करोड़ किया गया, फिर भी यह अनसोल्ड रही। हालांकि 2022 में फिर इसकी कीमत 414 करोड़ कर दी गई थी।
वेव्स मॉल के नजदीक 1 एकड़ कमर्शियल साइट: फिरोजपुर रोड पर वेबमॉल के पास एक एकड़ सरकारी जमीन है। 2012 में इसका रिजर्व प्राइस लगभग ₹75 करोड़ था। 2017 में ₹1.78 लाख प्रति वर्ग मीटर और 2018 में ₹58.89 करोड़ रिजर्व प्राइस रखा गया, लेकिन बिक्री नहीं हुई।
दुगरी फेज-2 में 0.93 एकड़ इंस्टीट्यूशनल साइट: दुगरी में ग्रीन लैंड स्कूल के नजदीक ग्लाडा की 0.93 एकड़ इंस्टीट्यूशनल साइट है। ग्लाडा ने इसकी कीमत 2019 में ₹8.40 करोड़ रखी गई थी, लेकिन इसका कोई खरीददार नहीं मिला।
पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के दो बड़े भूखंड: पुलिस कमिश्नर रेजिडेंस के पीछे 1.702 एकड़ कमर्शियल प्लॉट और पुलिस कमिश्नर रेजिडेंस के सामने 2.845 एकड़ कमर्शियल प्लॉट हैं। इनकी भी कई बार बोलियां करवाई गई लेकिन कोई खरीददार नहीं मिला है।
13 से अधिक कमर्शियल साइट्स: शहर के अलग-अलग कमर्शियल एरिया में स्थित 13 से ज्यादा दुकानें, बूथ और एससीओ भी नए रिजर्व प्राइस का इंतजार कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से चौड़ा बाजार पुलिस कोतवाली, पखोवाल रोड कैनाल कॉलोनी, कोहाड़ा व मोगा स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, ओल्ड डिस्ट्रिक्ट कोर्ट पॉकेट, दुगरी फेज-2, ढंडारी कलां और सेक्टर-38 मेन चंडीगढ़ रोड की साइट्स शामिल हैं।
रेट तय करने के लिए तीन तरीके अपनाएगा ग्लाडा
ग्लाडा ने वैल्यूअर्स को बाजार की मौजूदा स्थिति के आधार पर जमीन की वास्तविक कीमत तय करने की छूट दी है। नई दरें निर्धारित करने के लिए तीन प्रमुख तरीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। पहला मार्केट एप्रोच है। इसमें आसपास की जमीनों की हालिया रजिस्ट्री और खरीद-फरोख्त की कीमतों का आकलन किया जाएगा।
विकास कार्यों की लागत को ध्यान में रखकर कीमत
दूसरा इनकम एप्रोच है, जिसके तहत प्रॉपर्टी से भविष्य में होने वाली संभावित आय या किराए का अनुमान लगाया जाएगा। तीसरे कॉस्ट एप्रोच में जमीन की लोकेशन, उपयोगिता और आसपास हुए विकास कार्यों की लागत को ध्यान में रखकर कीमत तय की जाएगी।
वैल्यूअर्स को यह भी निर्देश दिया गया है कि जमीन पर किसी तरह का कब्जा, कानूनी विवाद, किरायेदारी या रास्ते से जुड़ी समस्या होने पर उसे मूल्यांकन में शामिल किया जाए। इन सभी पहलुओं के आधार पर जमीन की अंतिम रियलाइजेबल वैल्यू तय की जाएगी।
21 दिन की समयसीमा और देरी पर पेनल्टी
अथॉरिटी ने बिड डॉक्यूमेंट के तहत सख्त नियम लागू किए हैं। चयनित वैल्यूएशन एजेंसियों को अलॉटमेंट के 21 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। निर्धारित समय में काम पूरा न करने पर फीस का 5 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा।
ग्लाडा की इस कवायद का मुख्य उद्देश्य सालों से अटके हुए कैपिटल असेट्स को लिक्विडेट करना और रियलिस्टिक रिजर्व प्राइस के साथ नए सिरे से ई-ऑक्शन आयोजित करना है। रिपोर्ट आने के बाद अगले चरण में नई दरों पर मोहर लगाई जाएगी।
















