पुरानी गाड़ियों को मिले E10 का विकल्प! मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने बताया क्यों जरूरी है लो-एथेनॉल पेट्रोल

   नई दिल्ली    E20 पेट्रोल को लेकर देश भर में घमासान मचा हुआ है. सड़क से लेकर संसद और सोशल मीडिया तक इस बात की चर्चा हो रही है कि, इस फ्यूल के चलते वाहनों का माइलेज कम हो रहा है, गाड़ियों के कंपोनेंट खराब हो रहे हैं. तमाम लोग लो इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल…

पुरानी गाड़ियों को मिले E10 का विकल्प! मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने बताया क्यों जरूरी है लो-एथेनॉल पेट्रोल

   नई दिल्ली
   
E20 पेट्रोल को लेकर देश भर में घमासान मचा हुआ है. सड़क से लेकर संसद और सोशल मीडिया तक इस बात की चर्चा हो रही है कि, इस फ्यूल के चलते वाहनों का माइलेज कम हो रहा है, गाड़ियों के कंपोनेंट खराब हो रहे हैं. तमाम लोग लो इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल जैसे E5 और E10 पेट्रोल के ऑप्शन की मांग कर रहे हैं. इस बीच पहली बार सरकार में बैठे किसी व्यक्ति ने E10 फ्यूल की वापसी की बात की है। 

E20 को लेकर अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आपकी गाड़ी का इंजन चलेगा या नहीं, सवाल यह है कि पेट्रोल बचाने की इस मुहिम में कहीं देश की खेती, पानी और खाने का हिसाब तो नहीं बिगड़ रहा. और इस सवाल को हल्के में इसलिए नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इसे उठाने वाले कोई सोशल मीडिया का आलोचक नहीं, बल्कि भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) हैं। 

नागेश्वरन ने छपे अपने लेख में E20 से आगे E27 या E30 की तरफ बढ़ने से पहले साफ तौर पर 'फूड-वर्सेस-फ्यूल ट्रेड ऑफ', यानी खाने और फ्यूल के बीच होने जंग का पूरा हिसाब लगाने की जरूरत बताई है. यानी जिस E20 को अब तक पेट्रोल का विकल्प, तेल आयात घटाने का हथियार और पर्यावरण के फायदे की कहानी के तौर पर देखा जा रहा था, उससे आगे बढ़ाने से पहले विचार करना जरूरी है. असल सवाल यह है कि मक्का पेट्रोल की टंकी भरेगा या फिर लोगों का पेट. क्योंकि इंजन की बहस के बीच असली लड़ाई उस जमीन और पानी की है, जिसे एक बार फ्यूल की तरफ मोड़ दिया तो वापस खाने की तरफ लाना इतना आसान नहीं होगा। 

अनंत नागेश्वरन की सलाह है कि, सरकार को पुराने वाहनों के लिए E10 फ्यूल को वापस लाना चाहिए. जिसमें 90 प्रतिशत शुद्ध पेट्रोल और 10 प्रतिशत इथेनॉल की ब्लेंडिंग हो. लेकिन इससे पहले वो E20 फ्यूल को लेकर फैले डर की भी बात करते हैं. उनका कहना है कि, इन दिनों E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है एक डर तेजी से फैल रहा है. दावा किया जा रहा है कि इससे माइलेज कम हो रहा है और गाड़ियों के कंपोनेंट खराब हो रहे हैं. हालांकि, ये सभी दावे पूरी तरह सही नहीं हैं. इसके पीछे वो कुछ टेस्ट का हवाला देते हैं। 

क्या E20 से इंजन खराब हो रहा है?
नागेश्वरन के अनुसार, इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले एनर्जी कम होती है. एक लीटर इथेनॉल से मिलने वाली ऊर्जा पेट्रोल की करीब दो-तिहाई होती है. इसलिए E20 से गाड़ी एक लीटर फ्यूल में थोड़ी कम दूरी तय कर सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंजन में खराबी आ गई है. चूंकि E20 में इथेनॉल की मात्रा 20 फीसदी होती है, इसलिए कुल एनर्जी में कमी करीब 6 से 7 फीसदी के आसपास रहती है. सोशल मीडिया पर बताए जा रहे 30 फीसदी तक के आंकड़े सही नहीं हैं। 

दिलचस्प बात यह है कि E20 के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड और बिना जला हाइड्रोकार्बन जैसे पॉल्यूटेड पाटिकल्स कम हो सकते हैं. इंजन की लाइफ और सस्टेनेबिलिटी को लेकर भी अब तक टेस्ट में कुछ भी डराने वाली बात सामने नहीं है. अमेरिका में ओक रिज़ नेशनल लेबोरेटरी ने उन 86 वाहनों को E20 ब्लेंडेड फ्यूल के साथ तकरीबन 1 करोड़ किलोमीटर तक चलाकर टेस्ट किया जो E20 फ्यूल के कम्प्लायंट नहीं थें. हैरानी की बात है कि, इस टेस्ट में किसी भी वाहनों के कंपोनेंट में कोई एक्स्ट्रा वियर एंड टियर यानी घिसावट देखने को नहीं मिली. भारत में भी ARAI, पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट और Indian Oil के टेस्ट से मोटे तौर पर यही नतीजा सामने आए हैं. इसलिए हर E20 वाहन में इंजन खराब होने का दावा आंकड़ों से साबित नहीं होता। 

पुराने दोपहिया वाहनों की चिंता असल वजह
यहां एक बड़ा अपवाद जरूर है. भारत में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन ऐसे हैं, जो BS4  स्टैंडर्ड से पहले के हैं और इनमें कार्ब्युरेटर का इस्तेमाल होता है. पुराने कार्ब्युरेटर इथेनॉल ब्लेंड में मौजूद एक्स्ट्रा ऑक्सीजन के हिसाब से फ्यूल की मात्रा को अपने आप एडजस्ट नहीं कर सकते. ऐसे में इंजन को जरूरत के मुकाबले कम फ्यूल मिल सकता है जिससे इंजन गर्म हो सकता है। 

पुराने वाहनों में लगे रबर सील भी एक अलग समस्या हैं. अगर ये सील इथेनॉल के लिए तैयार नहीं हैं, तो लंबे समय तक इथेनॉल के संपर्क में आने पर खराब हो सकते हैं. हालांकि इन्हें इथेनॉल-फ्रेंडली सील से बदलना बहुत महंगा काम नहीं है. समस्या यह है कि भारत में 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहनों को एक-एक करके अपग्रेड करना आसान नहीं होगा. अगर आज से काम शुरू भी हो जाए, तो पूरे बेड़े को बदलने में कई साल लग सकते हैं। 

पुराने वाहनों के लिए E10 क्यों जरूरी है
नागेश्वरन के अनुसार, मूल नीति में इस समस्या का रास्ता भी रखा गया था और पुराने वाहनों के लिए कम इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध रखने की बात कही गई थी. लेकिन धीरे-धीरे लो इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल पेट्रोल पंपों से गायब हो गया. ऐसे में E20 के साथ E10 जैसे कम ब्लेंड वाला पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए. इससे पुराने वाहन मालिकों को राहत मिलेगी और लोगों के बीच E20 को लेकर बना डर भी कम होगा. खास बात यह है कि इससे कुल इथेनॉल की खपत बढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. पुराने वाहनों के लिए कम ब्लेंडेड फ्यूल वाला विकल्प रखा जा सकता है और दूसरी तरफ नए वाहनों में E20 का इस्तेमाल भी जारी रखा जा सकता है। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed