इमरान खान की ‘कंट्री फर्स्ट’ रणनीति! आसिम मुनीर से सीधी भिड़ंत नहीं, सुलह के संकेत

लाहौर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के एक करीबी सलाहकार ने संकेत दिया है कि यदि जेल में बंद नेता को रिहा किया जाता है, तो वे पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान और उसके प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ किसी भी प्रकार के सीधे टकराव से बचेंगे. पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ…

इमरान खान की ‘कंट्री फर्स्ट’ रणनीति! आसिम मुनीर से सीधी भिड़ंत नहीं, सुलह के संकेत

लाहौर
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के एक करीबी सलाहकार ने संकेत दिया है कि यदि जेल में बंद नेता को रिहा किया जाता है, तो वे पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान और उसके प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ किसी भी प्रकार के सीधे टकराव से बचेंगे.

पत्रकारों से बात करते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने कहा कि इमरान खान व्यक्तिगत या राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर हमेशा राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हैं.

बुखारी ने कहा, "यदि कल इमरान खान को रिहा कर दिया जाता है, तो वे ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे देश को नुकसान पहुंचे." उन्होंने सैन्य नेतृत्व के साथ किसी भी प्रकार की सीधी भिड़ंत की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया. बुखारी के अनुसार, टकराव से बचने के लिए आत्म-संयम आवश्यक है. उन्होंने कहा, "आपको अपनी नाराजगी पर काबू पाना होता है, अपने दर्द को दबाना होता है और देश की बेहतरी के लिए इसे सहना पड़ता है." उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वर्तमान सैन्य नेतृत्व के पास राजनीतिक तनाव कम करने और कैदियों को रिहा करने का पूरा अधिकार है.

यह बयान पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें अधिकारियों को 73 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री को बेहतर इलाज के लिए जेल से निजी अस्पताल स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था. राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को महीनों से चले आ रहे गंभीर तनाव को शांत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ मान रहे हैं.

वर्ष 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने और 2023 में गिरफ्तारी के बाद से इमरान खान और उनके समर्थकों ने सैन्य प्रतिष्ठान के खिलाफ बेहद हमलावर रुख अपनाया था. हालांकि विश्लेषक इस बात पर संशय जताते हैं कि क्या इमरान खान स्वयं बुखारी के इस सुलहकारी दृष्टिकोण से पूरी तरह सहमत हैं या नहीं, लेकिन प्रवक्ता की यह टिप्पणी स्पष्ट संकेत देती है कि PTI सरकार और सेना के साथ जारी लंबे गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक व्यावहारिक रास्ता तलाश रही है.
इमरान खान ने जनरल आसिम मुनीर के प्रति अपना रुख क्यों नरम किया?

कानूनी और संस्थागत दबाव में अस्तित्व बचाने की रणनीति
9 मई 2023 की हिंसा के बाद दर्जनों कानूनी मामलों, लगातार हिरासत और कार्यकर्ताओं पर व्यापक कार्रवाई के बीच इमरान खान की बातचीत की इच्छा एक सोची-समझी रणनीति है. इसका उद्देश्य आत्मसमर्पण करना नहीं, बल्कि पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व बचाना और गतिरोध कम करना है.

पाकिस्तान की राजनीतिक संरचना की वास्तविकता
ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान में नागरिक नेताओं को यह स्वीकार करना पड़ा है कि दीर्घकालिक राजनीतिक स्थिरता और सरकार चलाने के लिए सेना के साथ कामकाजी संबंध आवश्यक हैं. बातचीत के रास्ते खोलना इसी व्यावहारिक राजनीतिक वास्तविकता को अपनाने का संकेत है.

राष्ट्र प्रथम' (Country First) की नीति
PTI के अनुसार, इमरान खान अब देश के व्यापक हित को प्राथमिकता दे रहे हैं. गंभीर आर्थिक संकट के दौर में सेना से सीधा टकराव देश की आंतरिक स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए वे इस विवाद को शांत करना चाहते हैं.

पार्टी कैडर और नेताओं को राहत प्रदान करना
लगातार गिरफ्तारियों और मुकदमों के कारण PTI का संगठनात्मक ढांचा भारी दबाव में है. सेना प्रमुख के प्रति नरम रुख अपनाकर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं, समर्थक नेताओं और स्वयं इमरान खान पर जारी प्रशासनिक दबाव को कम करना चाहती है.

बैकचैनल बातचीत (Backchannel Talks) का मार्ग प्रशस्त करना
सार्वजनिक बयानों में नरमी लाने का मुख्य उद्देश्य सैन्य नेतृत्व के साथ पर्दे के पीछे (बैकचैनल) बातचीत की संभावनाओं को जीवित रखना है, ताकि भविष्य में उनकी रिहाई और निष्पक्ष राजनीतिक भागीदारी का रास्ता साफ हो सके.

आर्थिक शासन का संस्थागतकरण (SIFC)
विशेष निवेश सुविधा परिषद (Special Investment Facilitation Council – SIFC) के गठन के साथ जनरल आसिम मुनीर की भूमिका केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित न रहकर आर्थिक नीतियों और विदेशी निवेश के फैसलों तक बढ़ गई, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री के समकक्ष कार्य करने की औपचारिक शक्ति मिली.

तस्करी और अवैध व्यापार पर सीधी कार्रवाई
सेना ने मुद्रा की सट्टेबाजी, अवैध सीमा पार व्यापार और तस्करी के खिलाफ देशव्यापी अभियानों का सीधा नेतृत्व किया. इन कदमों का सीधा असर मैक्रो-इकोनॉमिक (समग्र आर्थिक) स्थिरता पर पड़ा, जिससे सैन्य प्रमुख को घरेलू शासन में अभूतपूर्व प्रभाव प्राप्त हुआ.

चुनावी चक्रों से परे संस्थागत निरंतरता:
नागरिक सरकारों और प्रधानमंत्रियों को चुनावी चक्रों, राजनीतिक गठबंधनों और लगातार बदलने वाले समीकरणों का सामना करना पड़ता है, जबकि सैन्य ढांचा स्थिर रहता है. यह संस्थागत निरंतरता सेना प्रमुख को दीर्घावधि की नीतियां तय करने और राष्ट्रीय निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभाने की ताकत देती है.

विदेश नीति और रणनीतिक कूटनीति में मुख्य भूमिका:
पाकिस्तान के रणनीतिक मामलों, जैसे कि चीन (CPEC), अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ संबंधों को संचालित करने में सेना प्रमुख की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. वित्तीय सहायता और रणनीतिक समझौतों के लिए विदेशी दौरों या वार्ता में शीर्ष सैन्य नेतृत्व की मौजूदगी ने उनके पद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रभावशाली बनाया है.

आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र पर मजबूत नियंत्रण
देश की आंतरिक सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद विरोधी अभियानों और राज्य के खुफिया तंत्र (ISI) पर थल सेनाध्यक्ष का सीधा नियंत्रण होता है.

 

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