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मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग और सतत प्रयासों से मोबाइल रिकवरी में बड़ी उपलब्धि

भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की पहचान, निगरानी तथा उनके वास्तविक धारकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में Central Equipment Identity Register (CEIR) पोर्टल के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश में वर्ष 2019 से अब तक 70,107…

मध्यप्रदेश पुलिस की तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग और सतत प्रयासों से मोबाइल रिकवरी में बड़ी उपलब्धि

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन की पहचान, निगरानी तथा उनके वास्तविक धारकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में Central Equipment Identity Register (CEIR) पोर्टल के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश में वर्ष 2019 से अब तक 70,107 गुम एवं चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक धारकों को वापस लौटाने में सफलता प्राप्त की है।

यह उपलब्धि केवल तकनीकी प्रणाली के उपयोग का परिणाम नहीं, बल्कि प्रदेशभर की पुलिस इकाइयों द्वारा मोबाइल फोन की पहचान, तकनीकी विश्लेषण, संदिग्ध उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने, संबंधित व्यक्तियों से संपर्क करने तथा मोबाइल की बरामदगी के लिए किए जा रहे निरंतर पुलिस प्रयासों का परिणाम है। मोबाइल फोन की रिकवरी के लिए पुलिस द्वारा प्राप्त तकनीकी जानकारी का सत्यापन कर आवश्यकतानुसार मैदानी स्तर पर कार्रवाई की जाती है।

CEIR क्या है और कैसे करता है मदद?

CEIR (Central Equipment Identity Register) भारत सरकार के दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित एक केंद्रीय प्रणाली है, जिसका उपयोग मोबाइल उपकरणों के IMEI (International Mobile Equipment Identity) नंबर के आधार पर गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन की पहचान और निगरानी में किया जाता है। मोबाइल फोन गुम या चोरी होने पर संबंधित व्यक्ति द्वारा आवश्यक विवरण एवं IMEI नंबर के आधार पर CEIR प्रणाली में रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है। इसके बाद संबंधित मोबाइल उपकरण के नेटवर्क पर दोबारा सक्रिय होने की स्थिति में उसकी तकनीकी जानकारी के आधार पर उसका पता लगाने में पुलिस को सहायता मिलती है।

पुलिस द्वारा CEIR से प्राप्त जानकारी का विश्लेषण कर मोबाइल के उपयोग, संबंधित नेटवर्क एवं उपलब्ध तकनीकी विवरणों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। मोबाइल की लोकेशन अथवा उपयोग से संबंधित जानकारी मिलने के बाद संबंधित पुलिस इकाई द्वारा आवश्यक सत्यापन एवं कार्रवाई करते हुए मोबाइल बरामद किया जाता है तथा पहचान एवं आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उसे उसके वास्तविक स्वामी को वापस सौंपा जाता है।मोबाइल फोन बरामद होने अथवा वास्तविक धारक को वापस मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत Unblock Request की जाती है, जिससे मोबाइल का पुनः वैध उपयोग किया जा सके।

जिलों का उल्लेखनीय प्रदर्शन

मोबाइल रिकवरी के मामले में प्रदेश की विभिन्न पुलिस इकाइयों द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया गया है। उपलब्ध CEIR आंकड़ों के अनुसार शीर्ष 10 जिले/यूनिट इस प्रकार हैं—

        भोपाल नगरीय — 4,684 मोबाइल

        ग्वालियर — 4,293 मोबाइल

        मंडला — 3,667 मोबाइल

        जबलपुर — 3,539 मोबाइल

        रीवा — 2,784 मोबाइल

        विदिशा — 2,672 मोबाइल

        इंदौर नगरीय — 2,613 मोबाइल

        छतरपुर — 2,584 मोबाइल

        सिंगरौली — 2,466 मोबाइल

        भिंड — 2,375 मोबाइल

तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ तकनीकी एवं डिजिटल पुलिसिंग को लगातार मजबूत किया जा रहा है। CEIR पोर्टल के माध्यम से मोबाइल के IMEI नंबर को आधार बनाकर संदिग्ध मोबाइल की पहचान, नेटवर्क पर उसकी गतिविधि तथा उसके संबंध में उपलब्ध तकनीकी जानकारी का उपयोग पुलिस कार्रवाई में किया जाता है।इस व्यवस्था से मोबाइल फोन से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई अधिक सटीक, त्वरित और तकनीक आधारित हुई है। साथ ही मोबाइल फोन के अवैध उपयोग एवं चोरी के बाद उसके पुनः नेटवर्क पर इस्तेमाल की संभावनाओं को रोकने में भी सहायता मिलती है।

नागरिकों के लिए भी उपयोगी डिजिटल व्यवस्था

मध्यप्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि मोबाइल फोन गुम अथवा चोरी होने की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना दें तथा मोबाइल का IMEI नंबर सुरक्षित रखें। मोबाइल फोन बरामद होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उसे अनब्लॉक कराया जा सकता है।

CEIR जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का अधिक से अधिक उपयोग करने से न केवल नागरिक अपने गुम अथवा चोरी हुए मोबाइल की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि पुलिस को भी उसकी तलाश एवं बरामदगी में महत्वपूर्ण तकनीकी आधार उपलब्ध होता है।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा तकनीक का उपयोग केवल अपराध की जांच तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि आम नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा और उन्हें बेहतर पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी किया जा रहा है।

 

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