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किरायेदार साबित न हुआ तो भी कब्जा अवैध, हाई कोर्ट ने मालिक के हक में दिया फैसला

चंडीगढ़  पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति संपत्ति का किरायेदार साबित नहीं होता, लेकिन वह मालिक की संपत्ति पर बिना किसी वैध अधिकार के कब्जा किए हुए है, तो मालिक को केवल इस आधार पर कब्जा लेने से वंचित नहीं किया जा सकता कि…

किरायेदार साबित न हुआ तो भी कब्जा अवैध, हाई कोर्ट ने मालिक के हक में दिया फैसला

चंडीगढ़
 पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति संपत्ति का किरायेदार साबित नहीं होता, लेकिन वह मालिक की संपत्ति पर बिना किसी वैध अधिकार के कब्जा किए हुए है, तो मालिक को केवल इस आधार पर कब्जा लेने से वंचित नहीं किया जा सकता कि मालिक-किरायेदार का संबंध साबित नहीं हुआ।

कोर्ट ने ऐसे व्यक्ति के कब्जे को अनधिकृत कब्जा या अतिक्रमण के समान माना है। जस्टिस परमोध गोयल ने फरीदाबाद के उदय पाल की 27 साल पुरानी नियमित दूसरी अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। मामला फरीदाबाद के गांव ऊंचागांव की एक आवासीय संपत्ति से संबंधित है।

रघुबीर सिंह ने दावा किया कि वह संपत्ति के मालिक हैं और उन्होंने 1986 में मकान का निर्माण कराने के बाद उदय पाल को 250 रुपये मासिक किराये पर दिया था। आरोप है कि उदय पाल ने अप्रैल 1990 से किराया देना बंद कर दिया, जिससे 8,200 रुपये का बकाया हो गया।

किरायेदारी समाप्त करने के लिए 10 सितंबर 1993 को कानूनी नोटिस भेजा गया था। इसके बाद रघुबीर सिंह ने मकान का कब्जा, बकाया किराया और उपयोग एवं कब्जे के हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया।

उदय पाल ने किरायेदारी से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने लगभग नौ वर्ष पहले 150 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से संपत्ति रघुबीर सिंह से खरीद ली थी। उसका कहना था कि बिक्री की 50 प्रतिशत राशि देकर कब्जा ले लिया गया था और शेष राशि भी बाद में अदा कर दी गई।

ट्रायल कोर्ट ने रघुबीर सिंह के स्वामित्व को स्वीकार किया, लेकिन किरायेदारी साबित न होने के कारण कब्जे का मुकदमा खारिज कर दिया। हाई कोर्ट में उदय पाल ने दलील दी कि जब ट्रायल कोर्ट ने माना कि किरायेदारी का संबंध नहीं था, तो उसे बेदखल करने के लिए दायर मुकदमा खारिज किया जाना चाहिए था।

हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों निचली अदालतों ने पाया है कि संपत्ति रघुबीर सिंह की है और उदय पाल यह साबित करने में विफल रहा कि उसने संपत्ति खरीदी थी।

जस्टिस गोयल ने स्पष्ट किया कि यदि उदय पाल को किरायेदार नहीं माना जाता, तब भी उसका कब्जा अनधिकृत है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह स्थापित हो जाता है कि प्रतिवादी बिना किसी अधिकार के संपत्ति पर कब्जा किए हुए है, तो मालिक कब्जा वापस प्राप्त कर सकता है।

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