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मानसा जेल में 69 कैदी नशे के आदी, हाईकोर्ट सख्त; सभी जेलों की डिटेल तलब

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जेलों में बंद नशे के आदी कैदियों के उपचार और पुनर्वास के संबंध में पंजाब सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जेल) को निर्देश दिया है कि वे प्रदेश की सभी जेलों में आउट-पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) ले रहे कैदियों का जेलवार…

मानसा जेल में 69 कैदी नशे के आदी, हाईकोर्ट सख्त; सभी जेलों की डिटेल तलब

चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जेलों में बंद नशे के आदी कैदियों के उपचार और पुनर्वास के संबंध में पंजाब सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (जेल) को निर्देश दिया है कि वे प्रदेश की सभी जेलों में आउट-पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) ले रहे कैदियों का जेलवार ब्यौरा हलफनामा के माध्यम से प्रस्तुत करें।

इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी पूछा है कि नशे पर निर्भर कैदियों को दवाओं से धीरे-धीरे बाहर निकालने की प्रक्रिया क्या है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने मानसा सेशन डिवीजन के प्रशासनिक न्यायाधीश की रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, मानसा जेल में कुल 767 कैदी बंद थे, जिनमें से 530 ओओएटी क्लीनिक में पंजीकृत थे, जोकि लगभग 69 प्रतिशत है। इसे कैदियों में नशे की लत की गंभीरता का संकेत माना गया है।

कैदियों को दी जा रही ये दवाई
खंडपीठ ने राज्य सरकार से ओओएटी क्लीनिक में कैदियों के पंजीकरण से संबंधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) स्पष्ट करने को कहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बड़ी संख्या में नशे के आदी कैदियों को चिकित्सा स्थिति के अनुसार ब्यूप्रेनोर्फिन और नालोक्सोन का संयोजन दिया जा रहा है। प्रशासनिक न्यायाधीश ने कैदियों के जेल से बाहर आने के बाद नशामुक्ति और फॉलोअप के संबंध में चिंता व्यक्त की थी। रिपोर्ट में ब्यूप्रेनोर्फिन-नालोक्सोन उपचार पूरा कर दवा बंद करने के चरण तक पहुंचने वाले लोगों का आंकड़ा मांगा गया था।

नशे के चक्र में न फंसें
हाई कोर्ट ने जेलों और निजी ओपिओइड उपचार केंद्रों में योग्य मनोचिकित्सकों, नर्सों और मनोसामाजिक सहायता की उपलब्धता का ब्योरा भी मांगा है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि जेल से रिहा होने के बाद कैदियों को किस प्रकार सहायता दी जाएगी, ताकि वे पुनः नशे के चक्र में न फंसें। खंडपीठ ने अधिवक्ता तनु बेदी को एमिकस क्यूरी नियुक्त करते हुए कहा कि वे पंजाब की जेलों में बंद कैदियों की बेहतरी के लिए सुधारात्मक कदम सुझाने में कोर्ट की सहायता करेंगी। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।

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