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FCI के गोदामों पर बड़ा नोटिस! बिना जमीन आवंटन निर्माण का आरोप, 1.21 अरब रुपये की मांग

ग्वालियर  फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) ने बिना जमीन आवंटन के नौ बीघा सरकारी जमीन पर गोदाम बना लिए और जब माफी के मंदिरों को लेकर प्रशासन ने जांच की तो इस जमीन का खुलासा हुआ। राजस्व की ओर से एफसीआई को एक अरब 21 करोड़ से ज्यादा का डिमांड नोटिस दिया गया। इसको लेकर…

FCI के गोदामों पर बड़ा नोटिस! बिना जमीन आवंटन निर्माण का आरोप, 1.21 अरब रुपये की मांग

ग्वालियर
 फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) ने बिना जमीन आवंटन के नौ बीघा सरकारी जमीन पर गोदाम बना लिए और जब माफी के मंदिरों को लेकर प्रशासन ने जांच की तो इस जमीन का खुलासा हुआ। राजस्व की ओर से एफसीआई को एक अरब 21 करोड़ से ज्यादा का डिमांड नोटिस दिया गया। इसको लेकर एफसीआई ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई जिस पर कोर्ट ने निर्धारित समय अवधि में आधी राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं।

आधी राशि जमा करने के बाद ही शेष राशि पर स्थगन माना जाएगा। इस जमीन पर 1976 में एफसीआइ ने निर्माण कर लिया था और ऐसा आवंटन की प्रत्याशा में करना बताया। अब इस मामले में एफसीआई की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

जानकारी के अनुसार, एफसीआई द्वारा एक अरब इक्कीस करोड छप्पन लाख बारह हजार सत्ताइस रुपए का डिमांड नोटिस जारी करने पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई। डिमांड नोटिस के विरुद्ध स्थगन आदेश की मांग की जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा अपने आदेश में एफसीआई को निर्देशित किया कि वह तहसीलदार द्वारा जारी किए गए डिमांड नोटिस की नियत राशि की पचास प्रतिशत राशि साठ करोड़ अठहत्तर लाख छह हजार एक सौ तिरेसठ मात्र आदेश दिनांक से 4 सप्ताह में जमा कराया जाना सुनिश्चित करें तो शेष राशि पर स्थगन आदेश माना जावेगा अन्यथा की दशा में FCI पूरी राशि जमा करे।

यह है पूरा मामला

एफसीआई ने 1976 में मंदिर माफी भूमि सर्वे क्रमांक 945, 951,952,953,954,968,969 कुल 9 बीघा 13 विस्वा स्थित कोटा लश्कर पर आवंटन की प्रत्याशा में केंद्रीय भंडार निगम के गोदामों का निर्माण कर लिया। वर्ष 1988 में राशि 3,19,174 रूपए निश्चित की गई और 7.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देय था जिसमें से कुछ राशि एफसीआई द्वारा जमा कर दी गई लेकिन शेष राशि जमा नहीं की गई।

अतः साल 1999 में शेष राशि और ब्याज राशि सहित कुल राशि 33,16,922 रूपए तय की गई जिसके बाद 2005 में एफसीआई द्वारा पांच लाख 98 हजार राशि जमा की गई और शेष राशि के लिए उच्च न्यायालय में डब्ल्यूपी प्रकरण क्रमांक दायर किया गया जिसमें प्रमुख सचिव धर्मस्व को साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेने हेतु निर्देशित किया गया।

प्रमुख सचिव महोदय द्वारा 1999 में तय की गई राशि और उसके बाद 15 प्रतिशत ब्याज राशि सहित आकलन कर एफसीआई से राशि वसूले जाने और एक माह में राशि जमा न करने पर कब्जा प्राप्त कर माफी विभाग को सौंपने का आदेश पारित किया जिस पर आयुक्त ग्वालियर संभाग द्वारा कुल राशि का आकलन कराते हुए कलेक्टर ग्वालियर द्वारा उक्त आकलित राशि की आरआरसी जारी कराई गई जिसके आधार पर तहसीलदार लश्कर मनीष जैन द्वारा उक्त डिमांड नोटिस जारी किया गया था।

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