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राखी से पहले महंगी हुई शक्कर, मिठाई और पकवानों का बजट बढ़ाएगी कीमतों में तेजी

भोपाल  बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की थाली और खासकर त्योहारी व रोजमर्रा के मिष्टान्न पर दिखने लगा है। चीनी के दाम बढ़ने से मिठाई और उससे संबंधित खाद्य सामग्रियों के भाव में भी भारी उछाल आने के पूरे आसार बन गए हैं। कई…

राखी से पहले महंगी हुई शक्कर, मिठाई और पकवानों का बजट बढ़ाएगी कीमतों में तेजी

भोपाल 

बाजार में चीनी की कीमतों में लगातार हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों की थाली और खासकर त्योहारी व रोजमर्रा के मिष्टान्न पर दिखने लगा है। चीनी के दाम बढ़ने से मिठाई और उससे संबंधित खाद्य सामग्रियों के भाव में भी भारी उछाल आने के पूरे आसार बन गए हैं। कई दुकानदारों ने तो पहले ही मिठाइयों के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कई अन्य दुकानदार भी जल्द कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। थोक बाजार में कुछ समय पहले जो चीनी ₹4,900 प्रति क्विंटल मिलती थी, वह अब बढ़कर सीधे ₹6,600 प्रति क्विंटल है। वहीं रविवार को चीनी की कीमत 6800 प्रति क्विंटल रही। अचानक आए इस उछाल से कारोबारियों और आम ग्राहकों दोनों की मुश्किलें बढ़ गई है। 

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी
अंबा स्वीट के संचालक ने बताया कि चीनी के दाम में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद समझ नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। लागत बढ़ने के कारण अगले एक-दो दिनों में मिठाइयों के दाम और बढ़ाने पड़ सकते हैं। दुकान संचालक का कहना है कि सिर्फ दाम बढ़ा देने से काम नहीं चलेगा, ग्राहकों की जेब का भी ख्याल रखना जरूरी है। हालांकि, अगर मिठाइयों की बेहतरीन क्वालिटी बरकरार रखनी पड़ी, तो प्रति पीस पर ₹4 से ₹5 तक की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। सामान्य तौर पर प्रति पीस ₹2 से ₹3 की वृद्धि तय मानी जा रही है।

मिठाई दुकानदारों की समस्या
मिठाई दुकानदारों का कहना है कि चीनी का दर बढ़ाने के समय अभी नहीं है। शादी विवाह के सीजन में दर बढ़ता है। आशंका जताई जा रही है कि चीनी के स्टॉकिस्ट जो बड़े पैमाने पर स्टॉक करके माल को बाहर नहीं निकलते हैं और मार्केट में चीनी की कमी होने से दर में बढ़ोतरी हो जाती है जिला प्रशासन को चाहिए कि स्टॉकिस्ट की जांच करें ताकि चीनी की दर में बढ़ोतरी को रोकी जा सके।

मिठाई की कीमतें

पीस से किलो तक बढ़े भाव…
पाकुड़ में चमचम 7 से बढ़कर 8 रुपये प्रति पीस हो गया है, हालांकि अलग-अलग दुकानों में यह 8 से 15 रुपये तक है। रसगुल्ला सामान्य तौर पर 10 रुपये, कुछ दुकानों में 15 रुपये प्रति पीस है। लड्डू 5 से 6 रुपये, दुर्गा भोग 8 से 10 रुपये और रस कदम 10 से 12 रुपये हो गया है; कुछ दुकानों में रस कदम 15 रुपये तक है। रसमलाई 380 से बढ़कर 450 रुपये प्रति किलो हो गई है। पाकुड़ में चीनी 40-45 से बढ़कर 60-65 रुपये प्रति किलो हो गई है। हिरणपुर में 15 दिन पहले 55 रुपये वाली चीनी अब 70 रुपये, जबकि पाकुड़िया में 52-55 से बढ़कर खुदरा 70 और थोक 65-68 रुपये किलो है। खुला दूध 50 से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो और पनीर 300 से बढ़कर 380 रुपये किलो हो गया है। मेवा के दाम भी बढ़े हैं। पैकेट वाले दूध, दही और पनीर के भाव ब्रांड व पैकिंग के अनुसार अलग हैं।

रक्षाबंधन पर खरीदारी का ट्रेंड
दुकानदारों के अनुसार, रक्षाबंधन के प्री-ऑर्डर में करीब 10 प्रतिशत कमी आई है। सामान्य बिक्री स्तर को 100 प्रतिशत मानें तो फिलहाल खरीदारी करीब 80-85 प्रतिशत रहने का अनुमान है। काजू कतली, सूखी मिठाई, बर्फी और सोनपापड़ी की मांग अधिक है। पहले 500 रुपये में जितनी मिठाई मिलती थी, अब उतनी के लिए 650-700 रुपये खर्च हो रहे हैं। कुछ ग्राहक मिठाई के बजाय कैडबरी सेलिब्रेशन्स, डेयरी मिल्क, किटकैट और फेरेरो रोशर जैसे चॉकलेट गिफ्ट पैक चुन रहे हैं।

मिठाई बनाना भी हुआ महंगा
राखी पर घरों में मिठाई और पकवान बनाने की परंपरा है। ऐसे में शक्कर के दाम बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित होना तय है। वहीं बाजार की मिठाई में सिर्फ शक्कर ही नहीं, बल्कि दूध, मावा, ड्रायफ्रूट, गैस, श्रम और पैकेजिंग जैसी लागत भी शामिल होती है। ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर तैयार मिठाई के दाम पर भी पड़ सकता है।

‘दैनिक भास्कर’ ने शकर व्यापारियों, मिठाई दुकादारों, ग्राहकों, गृहिणियों से बात की तो महंगाई को लेकर उनका दर्द सामने आया।

शरद सोनी ने बताया कि जितना कमा रहा हूं, उससे घर का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा है। महंगाई बढ़ती जा रही है, तो गरीब क्या खाएगा? कम से कम हर व्यक्ति की रोजाना आय 1 हजार रु. होनी चाहिए। शारदा पाटिल ने कहा कि महंगाई की वजह से बाजार की रौनक ही चली गई है। रोजगार छीनकर महंगाई बढ़ा दी गई है।

आम आदमी का सवाल- त्योहार की मिठास कैसे रहे बरकरार
महंगाई के बीच लोगों का कहना है कि त्योहार की खुशियों पर खर्च कम करना आसान नहीं है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के बढ़ते खर्च के कारण बजट संभालना चुनौती बन गया है। लोगों की मांग है कि सरकार जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी रखे।

वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अर्थव्यवस्था में बदलाव के साथ आय और आमदनी भी बढ़ रही है, इसलिए बढ़ती कीमतों के बीच लोगों को अपनी खर्च क्षमता और प्राथमिकताओं के अनुसार आगे बढ़ना होगा। कुल मिलाकर इस बार राखी के बाजार में उत्साह तो पूरा है, लेकिन महंगाई ने खरीदारी का गणित जरूर बदल दिया है। शक्कर के बढ़े दामों का असर मिठाई और घरेलू पकवानों पर कितना पड़ता है, यह त्योहार के अंतिम दिनों में बाजार के भाव से और साफ होगा।

शक्कर कारोबारी भरत वैष्णव शक्कर के भाव में 30-40% तक बढ़ोतरी हो सकती है। किलो के भाव में भी इसका असर देखने को मिलेगा, क्योंकि हमारा पूरा व्यापार शक्कर पर ही निर्भर है।

मिठाई व्यापारी चेतन का कहना है अगर शक्कर के भाव कम नहीं होते हैं तो मिठाई की कीमत में 30-40% तक बढ़ोतरी होगी, क्योंकि हमारा पूरा काम शक्कर से ही चलता है।

मिठाइयों के वर्तमान भाव

चमचम: ₹300 प्रति किलोग्राम (साइज के हिसाब से₹12 से₹15 प्रति पीस)

रस कदम: ₹600 प्रति किलोग्राम (साइज के हिसाब से₹15 से₹17 प्रति पीस)

काजू कतली: ₹1,100 प्रति किलोग्राम (16 से₹17 प्रति पीस)

कलाकंद: ₹600 प्रति किलोग्राम ₹(15 प्रति पीस)

मेवा बर्फी: 600 प्रति किलोग्राम (15 प्रति पीस)

रसमलाई: 500 प्रति किलोग्राम

बड़ा रसगुल्ला: ₹18 प्रति पीस

घी का लड्डू: ₹640 प्रति किलोग्राम (20 प्रति पीस)

काला जामुन: ₹10-12 प्रति पीस

मांग बढ़ना सामान्य, लेकिन इतनी तेजी ने बढ़ाई चिंता
त्योहारी सीजन में शक्कर की मांग बढ़ना सामान्य है। मिठाई की दुकानों के साथ घरों में भी इसकी खपत बढ़ जाती है। ऐसे में कुछ तेजी स्वाभाविक मानी जाती है, लेकिन 45 से 72 रुपए किलो तक पहुंचना बाजार में चर्चा का विषय बना हुआ है।

शक्कर के दाम बढ़ने के पीछे उत्पादन और उपलब्धता, गन्ने की फसल, त्योहारी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं। बाजार में जमाखोरी की आशंका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

एथेनॉल को लेकर भी चर्चा
शक्कर की कीमतों में तेजी के बीच गन्ने के इस्तेमाल और एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी चर्चा है। कुछ लोगों का मानना है कि गन्ने के एक हिस्से का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में होने से शक्कर की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अलग-अलग पक्षों के अलग तर्क हैं। ऐसे में मौजूदा तेजी के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना फिलहाल आसान नहीं है।

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