,

ड्यूटी से गायब रहे तो वेतन पर असर, झारखंड में एसआर की हाजिरी अब दिन में दो बार होगी

रांची  राज्य के रिम्स सहित सभी छह मेडिकल कालेजों में डाक्टरों की समय पर उपस्थिति और मरीजों के इलाज की व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब सख्ती करने की तैयारी में है। खासकर सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के ड्यूटी आवर में अनुपस्थित रहने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने…

ड्यूटी से गायब रहे तो वेतन पर असर, झारखंड में एसआर की हाजिरी अब दिन में दो बार होगी

रांची
 राज्य के रिम्स सहित सभी छह मेडिकल कालेजों में डाक्टरों की समय पर उपस्थिति और मरीजों के इलाज की व्यवस्था को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब सख्ती करने की तैयारी में है। खासकर सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के ड्यूटी आवर में अनुपस्थित रहने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

इसके तहत एसआर की फेस बायोमेट्रिक उपस्थिति दिन में दो बार दर्ज कराने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही उनकी साप्ताहिक उपस्थिति की समीक्षा विभाग स्तर पर होगी और उसी के आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया को जोड़ा जाएगा।

स्वास्थ्य शिक्षा एवं शोध निदेशक डा. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि मेडिकल कालेजों में इस समय सबसे बड़ी समस्या चिकित्सकों के निर्धारित समय पर ड्यूटी पर आने और ड्यूटी अवधि पूरी होने से पहले चले जाने की शिकायत है।

इनमें एसआर को लेकर सबसे अधिक शिकायतें मिल रही हैं। विभाग का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि चिकित्सक अपने निर्धारित समय में अस्पताल में मौजूद रहें और मरीजों को समय पर उपचार मिले।

छह मेडिकल कालेजों में लागू होगी व्यवस्था
नई व्यवस्था राज्य के सरकारी मेडिकल कालेजों में लागू की जाएगी। इनमें राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रांची, शहीद निर्मल महतो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल धनबाद, फूलो झानो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल दुमका, शेख भिखारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल हजारीबाग, एमजीएम जमशेदपुर और मेदिनीराय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल पलामू शामिल हैं।

विभाग के अनुसार, एसआर सहित चिकित्सकों की उपस्थिति का डिजिटल रिकार्ड तैयार होने से यह पता लगाना आसान होगा कि कौन चिकित्सक कितने समय अस्पताल में रहा और किसने ड्यूटी पूरी की।

ड्रेस कोड की भी होगी सख्ती
डाॅ. भट्टाचार्य ने बताया कि चिकित्सकों के लिए ड्रेस कोड पहले से निर्धारित है, लेकिन कई स्थानों पर इसका पालन नहीं हो रहा है। अब इसे कड़ाई से लागू कराया जाएगा। चिकित्सकों को एप्रन और पहचान पत्र के साथ ड्यूटी पर रहना अनिवार्य होगा।

सीनियर और जूनियर चिकित्सकों को अस्पताल परिसर में अनुशासन का पालन करना होगा। इसके साथ ही मरीजों और उनके स्वजनों के साथ चिकित्सकों के व्यवहार को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा। चिकित्सकों को मरीजों एवं उनके स्वजनों से शालीन और संवेदनशील व्यवहार करने का निर्देश दिया जाएगा।

उपस्थिति से जुड़ेगा वेतन
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू एसआर की साप्ताहिक उपस्थिति का परीक्षण है। फेस बायोमेट्रिक से दर्ज उपस्थिति का विभाग स्तर पर प्रत्येक सप्ताह अवलोकन किया जाएगा। उपस्थिति और ड्यूटी से संबंधित रिकार्ड के आधार पर ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

इससे अस्पताल में केवल कागज पर उपस्थिति दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। मालूम हो कि रिम्स में भी सीनियर रेजिडेंटों की नियुक्ति के लिए लगातार प्रक्रिया चल रही है और विभिन्न विभागों में एसआर की नियुक्तियां की जा रही हैं। जिससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में एसआर ही मेडिकल कालेजों का बैकबाेन है।

मरीजों को क्या मिलेगा लाभ
– चिकित्सकों की ड्यूटी के दौरान उपलब्धता सुनिश्चित होगी
– ओपीडी और वार्ड में मरीजों को समय पर चिकित्सकीय परामर्श मिलने की संभावना बढ़ेगी
– गंभीर मरीजों की निगरानी में सुधार होगा।
– एसआर के ड्यूटी से समय से पहले चले जाने की शिकायतों पर नियंत्रण होगा
– डिजिटल उपस्थिति से जवाबदेही तय करना आसान होगा
– ड्रेस कोड और पहचान पत्र से मरीजों को चिकित्सक की पहचान करने में सुविधा होगी
– मरीजों और स्वजनों के साथ व्यवहार में सुधार लाने पर जोर होगा

विभाग की असली चुनौती इलाज की उपलब्धता
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का सीधा संबंध केवल उपस्थिति से नहीं, बल्कि अस्पताल में डाक्टरों की उपलब्धता और मरीज के इलाज से है। मेडिकल कालेज अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। ऐसे में यदि डाक्टर निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं होते हैं तो इसका सीधा असर ओपीडी, वार्ड, आपातकालीन सेवा और गंभीर मरीजों की निगरानी पर पड़ता है।

नई व्यवस्था में फेस बायोमेट्रिक और साप्ताहिक समीक्षा से उपस्थिति का डिजिटल प्रमाण उपलब्ध रहेगा। इससे विभाग के पास कार्रवाई या सुधार के लिए ठोस आंकड़े भी होंगे। डा. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार, प्रस्तावित गाइडलाइन जल्द जारी की जाएगी।

इसके बाद मेडिकल कालेजों में चिकित्सकों की उपस्थिति, ड्रेस कोड, अनुशासन और मरीजों के साथ व्यवहार को लेकर व्यवस्था को और कड़ाई से लागू किया जाएगा।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports