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बिजली चोरी पर CM योगी सख्त, डूब क्षेत्र के अवैध कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू

 लखनऊ यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र(फ्लड प्लेन जोन) में बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगाने संबंधी 16 वर्ष पुराने तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता के एक शासनादेश से पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लग रहा है। डूब क्षेत्र के 20 हजार से अधिक घरों में 13 हजार…

बिजली चोरी पर CM योगी सख्त, डूब क्षेत्र के अवैध कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू

 लखनऊ
यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र(फ्लड प्लेन जोन) में बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगाने संबंधी 16 वर्ष पुराने तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता के एक शासनादेश से पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लग रहा है। डूब क्षेत्र के 20 हजार से अधिक घरों में 13 हजार से अधिक अवैध कनेक्शन के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी की जा रही है।

चोरी पर अंकुश लगाने के लिए अवैध कनेक्शन को सशर्त वैध करने के संबंध में पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने पिछले वर्ष शासन को प्रस्ताव भेजा था। अब प्रस्ताव को उच्च स्तर से हरी झंडी मिलते ही अवैध कनेक्शन पर कड़ाई से अंकुश लगाने के साथ ही भवन स्वामियों को प्रीपेड मीटर के जरिए अस्थायी कनेक्शन दिया जाएगा।

गौतमबुद्धनगर के नोएडा और गाजियाबाद के छिजारसी, चोटपुर, शिव विहार, कनावटी आदि यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र हैं। वैसे तो इस क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण ही नहीं हो सकता है लेकिन विकास प्राधिकरणों के जिम्मेदारों की हीला-हवाली से 20 हजार से ज्यादा घर अवैध तरीके से बन चुके हैं। नदियों के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर एनजीटी-हाईकोर्ट आदि के कड़े रुख पर 16 मार्च 2010 को तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता ने अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के साथ ही बिजली कनेक्शन देने पर भी रोक लगा थी।

नोएडा के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजीव सरन व रमा रमण ने भी संबंधित क्षेत्र में बिजली कनेक्शन न देने की वकालत की। प्रतिबंध के चलते पश्चिमांचल डिस्काम व नोएडा पावर कंपनी तो अब तक कनेक्शन देने से मना करता रहा लेकिन स्थानीय बिजली अभियंताओं व ठेकेदारों की मिलीभगत से धड़ल्ले से अवैध तरीके से बिजली कनेक्शन दिए जाते रहे।

ऐसे में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी के मद्देनजर हाल ही में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष गोयल के निर्देश पर कराई गई जांच में पाया गया कि डूब क्षेत्र 18,650 बिजली कनेक्शन हैं। इनमें से 5500 ही वैध मिले जबकि 13,150 कनेक्शन अवैध पाए गए। इनके जरिए बिजली की चोरी होने से कारपोरेशन प्रबंधन का अनुमान से उसे प्रति वर्ष 16 हजार करोड़ रुपये के विद्युत राजस्व का नुकसान हो रहा है।

इतने बड़े पैमाने पर बिजली चोरी का मामला स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन की पिछले दिनों हुई बैठक में सीईओ मनोज कुमार सिंह द्वारा उठाए जाने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताते हुए बिजली चोरी पर कड़ाई से अंकुश लगाने की हिदायत पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष व अपर मुख्य सचिव ऊर्जा डॉ. गोयल को दी। मुख्यमंत्री के कड़े रुख पर अध्यक्ष ने बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए सभी अवैध कनेक्शन को तत्काल काटने के साथ ही विधिक कार्यवाही करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों-अभियंताओं को दिए हैं।

डॉ. गोयल ने बताया कि अवैध कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। चूंकि बिजली मूलभूत आवश्यकता है इसलिए डूब क्षेत्र में अवैध तरीके से बने भवनों के स्वामियों को बिजली कनेक्शन देने पर पिछले वर्षों में बैठकें तो हुईं लेकिन निर्णय अब तक कोई नहीं हो सका। अब मुख्यमंत्री के रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि कारपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक पंकज कुमार द्वारा पिछले वर्ष आठ नवंबर को अपर मुख्य सचिव ऊर्जा को भेजे गए प्रस्ताव को जल्द ही हरी झंडी मिल सकती है।

प्रस्ताव के मुताबिक अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण तक संपत्ति के स्वामियों को अंतरिम रूप से अस्थायी कनेक्शन प्रीपेड मीटर व आरमर्ड केबल के जरिए दिए जाएंगे। बिजली नेटवर्क व कनेक्शन का खर्च भवन स्वामियों से वसूला जाएगा। कनेक्शन देने से किसी तरह की पर्यावरणीय क्षति मुआवजे का भुगतान भी उपभोक्ता को करना होगा। प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण पर उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही कनेक्शन को काट दिया जाएगा। किसी भी दशा में कोई मुआवजे की मांग नहीं कर सकेगा।

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