दीवारों पर लिखे नारों पर ममता सरकार का एक्शन? Jadavpur University में पेंट से मिटाए गए स्लोगन

नई दिल्ली  बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे कथित देश विरोधी नारों को मिटवा दिया गया है। जादवपुर यूनिवर्सिटी में हुई नारेबाजी और दीवारों पर लिखे गए श्लोगन को लेकर अधिकारी ने कहा, इन नारों के साथ बहुत कुछ मिटा दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन…

दीवारों पर लिखे नारों पर ममता सरकार का एक्शन? Jadavpur University में पेंट से मिटाए गए स्लोगन

नई दिल्ली 
बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निर्देश पर जादवपुर यूनिवर्सिटी की दीवारों पर लिखे कथित देश विरोधी नारों को मिटवा दिया गया है। जादवपुर यूनिवर्सिटी में हुई नारेबाजी और दीवारों पर लिखे गए श्लोगन को लेकर अधिकारी ने कहा, इन नारों के साथ बहुत कुछ मिटा दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक विश्वविद्यालय प्रशासन ने विवादित भित्तिचित्रों को पेंट से मिटाना शुरू कर दिया।

शनिवार को सफाई और पुताई का काम शुरू हुआ, जिससे इस बात पर राजनीतिक बहस छिड़ गई कि क्या मुख्यमंत्री की आलोचना के बाद विश्वविद्याय ने यह कदम उठाया। अधिकारियों का हालांकि, कहना है कि यह काम नियमित सफाई और सौंदर्यीकरण का हिस्सा था और इसे किसी दबाव में नहीं किया गया।

विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "परिसर की दीवारों पर लिखी बहुत सी चीजें भद्दी लगती हैं। हमने सफाई बनाए रखने और सुंदरता बढ़ाने के लिए ऐसा किया है; ऐसा पहले भी किया जा चुका है।" उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी मांगों और शिकायतों को परिसर की दीवारों पर लिखने के बजाय, इसके लिए तय किए गए प्रदर्शन बोर्ड का इस्तेमाल करें।

विरोध की परंपरा खत्म करना चाहती है सरकार- छात्र संगठन
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के छात्र संगठन, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने इस कदम का विरोध किया और विश्वविद्यालय प्रशासन पर परिसर में विरोध-प्रदर्शन की परंपरा को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

एसएफआई ने दावा किया कि यादवपुर विवि (जेयू) हमेशा से साम्राज्यवाद और फासीवाद के खिलाफ रहा है और दीवारों पर लिखे कई नारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और फासीवाद के विरोध में थे। छात्र संगठन ने कहा कि विवि में असहमति जताने की जो परंपरा आज़ादी की लड़ाई के समय से चली आ रही है, उसे दीवारों पर रंग-रोगन करके मिटाया नहीं जा सकता। जेयू की वेबसाइट के अनुसार, राष्ट्रवादी आंदोलन के दौरान 1906 में 'नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन, बंगाल' की स्थापना हुई थी। इसने 'बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट' शुरू किया, जो बाद में 1955 में 'यादवपुर विश्वविद्यालय' बन गया।

एसएफआई ने परिसर की दीवारों पर फिर से साम्राज्यवाद-विरोधी और फासीवाद-विरोधी नारे लिखने की धमकी भी दी। यह विवाद विवि में एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच हाल ही में हुई झड़प के बाद सामने आया है।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed