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855 वार्डों पर BJP की नजर, 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के लिए तैयार हुआ ‘महाराष्ट्र मॉडल’

जयपुर  राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने इस बार ऐसा चुनावी प्रयोग किया है, जिसकी झलक अब तक मुख्य रूप से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में ही देखने को मिलती रही है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों को एक साथ जीतने के लक्ष्य के साथ 'महाराष्ट्र मॉडल' की तर्ज पर…

855 वार्डों पर BJP की नजर, 60 लाख से ज्यादा मतदाताओं के लिए तैयार हुआ ‘महाराष्ट्र मॉडल’

जयपुर
 राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने इस बार ऐसा चुनावी प्रयोग किया है, जिसकी झलक अब तक मुख्य रूप से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में ही देखने को मिलती रही है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों को एक साथ जीतने के लक्ष्य के साथ 'महाराष्ट्र मॉडल' की तर्ज पर चुनावी माइक्रो मैनेजमेंट तैयार किया है। इसके तहत महाराष्ट्र के करीब 20 विधायक-विधान परिषद सदस्य और बड़े नेताओं को अलग-अलग निगमों की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि इनके साथ करीब 25-25 विशेषज्ञों की टीमें भी मैदान में उतारी गई हैं। इस पूरी रणनीति की कमान महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को दी गई है।

क्र. सं.    नगर निगम    कुल वार्ड
1            जयपुर          150
2            जोधपुर        100
3              कोटा          100
4            अजमेर         80
5           बीकानेर         80
6           उदयपुर         80
7          भीलवाड़ा        70
8          भरतपुर          65
9           अलवर            65
10          पाली               65
कुल       10 नगर निगम    855

60 लाख से ज्यादा मतदाताओं पर रहेगी नजर
भाजपा ने राजस्थान के जिन दस नगर निगमों को इस बार अपने सबसे बड़े चुनावी टारगेट में शामिल किया है, उनमें कुल 855 वार्ड आते हैं। इन दसों नगर निगम क्षेत्रों में 60 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। खास बात यह है कि इन निगमों के 855 वार्ड प्रदेश में मौजूद कुल वार्डों का करीब 9 प्रतिशत हिस्सा हैं।

यही आंकड़ा भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का आकलन है कि अगर इन दस नगर निगमों में मजबूत प्रदर्शन कर जीत हासिल की जाती है, तो इसका राजनीतिक असर और संदेश छोटे निकायों में जीत की तुलना में कई गुना बड़ा होगा। इसी वजह से भाजपा ने इन निगमों को अपने प्रमुख चुनावी लक्ष्य के तौर पर रखा है।

यह महाराष्ट्र मॉडल
इस मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मतदाता तक बार-बार पहुंच बनाना है। हर निगम के लिए अलग मिशन और अलग कमांड सिस्टम तैयार किया गया है। स्थानीय संगठन की रिपोर्ट के साथ बाहर से आई टीम का स्वतंत्र जमीनी फीडबैक सिस्टम तैयार किया गया। सभाओं से ज्यादा घर-घर पहुंच का टारगेट, मतदाताओं का फीडबैक और मौके की स्थिति के आधार पर तत्काल रणनीति बदलने की प्लानिंग।

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