FPI Selloff: दो महीने की खरीदारी के बाद विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ₹7,443 करोड़ निकाले

मुंबई  मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बनी हुई है. इसका सीधा असर विदेशी निवेशकों के इन्वेस्टमेंट पर भी लगातार देखने को मिला है, जिससे बाजारों का सेंटीमेंट खराब हुआ है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब दो महीने तक लगातार निवेश…

FPI Selloff: दो महीने की खरीदारी के बाद विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ₹7,443 करोड़ निकाले

मुंबई 

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बनी हुई है. इसका सीधा असर विदेशी निवेशकों के इन्वेस्टमेंट पर भी लगातार देखने को मिला है, जिससे बाजारों का सेंटीमेंट खराब हुआ है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब दो महीने तक लगातार निवेश करने के बाद एक बार फिर FPI का मूड खराब हो गया है और उन्होंने सितंबर के पहले हफ्ते में ही ताबड़तोड़ 7,443 करोड़ रुपये भारतीय बाजार से निकाले हैं। 

US-Iran Tension के चलते कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती समेत तमाम कारणों ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली को सपोर्ट किया है। 

दो महीने दनादन निवेश, अब भागे
अमेरिका-ईरान में युद्ध कुछ समय के लिए थमने के दौरान इसका असर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs पर भी देखने को मिला था और चार महीने की तगड़ी बिकवाली के बाद आखिरकार भारतीय शेयर बाजार में उनकी वापसी हुई है. लेकिन, दो महीने तक दनादन निवेश करने के बाद अब एफपीआई का मूड फिर से बिगड़ा नजर आया और उनकी बिकवाली तेज हो गई है। 

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार से सितंबर महीने में पहले सप्ताह में ही इन विदेशी निवेशकों ने 7,443 करोड़ रुपये की मोटी रकम निकाली है. इससे पहले दो महीनों के निवेश पर नजर डालें, तो डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार FPI ने जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये, जबकि बीते अगस्त महीने में 30,919 करोड़ रुपये लगाए थे। 

इस साल अब तक 2.32 लाख करोड निकाले
दो महीने के तगड़े निवेश के बावजूद विदेशी निवेशकों द्वारा सितंबर के शुरुआती हफ्ते में की गई इस बिकवाली के बाद अब साल 2026 में इनके भारतीय बाजार से भागते हुए पैसे निकालने का आंकड़ा और भी बढ़ गया है. आंकड़े देखें, तो 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की कुल निकासी 2.32 लाख करोड़ रुपये के आस-पहुंच गई है, जो बीते वित्त वर्ष के मुकाबले काफी ज्यादा है. बता दें कि 2025 में एफपीआई ने सालभर में 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे। 

ये बनीं बिकलावी की बड़ी वजह 
भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों के फिर से भागने के पीछे के कारणों को देखें, तो इसके पीछे एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरों से जुड़ा हुआ है। 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि Crude Oil Price Hike ने एफपीआई की चिंता एक बार फिर से बढ़ाने का काम किया है, क्योंकि इससे देश में महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है. रिपोर्ट में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि एफपीआई का आने वाले दिनों में रुख बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव पर केंद्रित रह सकता है।  

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