रांची
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर रांची में विवाद खड़ा हो गया है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र के मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश के तहत फार्म-7 के माध्यम से आवेदन दिया गया है।
शिकायत के अनुसार, रांची विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 226 में रहने वाले 34 मतदाताओं को फार्म-7 में अनुपस्थित या अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है, जबकि संबंधित मतदाताओं का दावा है कि वे पिछले कई वर्षों से अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं।
मामले को लेकर मतदाताओं की ओर से रांची के एसडीएम को लिखित शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्हें जांच का आश्वासन दिया गया है।
स्थायी पते पर रह रहे, फिर कैसे बताया अनुपस्थित
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फार्म-7 का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बीएलए-2 मो. यासीन अली के माध्यम से 34 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया।
फॉर्म-7 में इन मतदाताओं को अनुपस्थित अथवा अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। मतदाताओं का कहना है कि संबंधित सभी लोग हिंदपीढ़ी में अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं।
ऐसे में उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यदि वे उसी पते पर रह रहे हैं और नियमित रूप से क्षेत्र में मौजूद हैं, तो उनके नाम हटाने के लिए इस तरह का आवेदन किस आधार पर दिया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।
नियम के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायत में फार्म-7 से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए नियम 13(2) और 26 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटाना गंभीर मामला है। यदि गलत सूचना देकर या किसी साजिश के तहत नाम हटाने का प्रयास किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
हम यहीं रह रहे हैं, फिर नाम क्यों हटाया…
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया से लोगों में चिंता है। उनका सवाल है कि जब वे जिंदा हैं और वर्षों से इसी पते पर रह रहे हैं, तो हमें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर मतदाता सूची से नाम हटाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है।
प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फार्म-7 में दी गई जानकारी किस आधार पर दर्ज की गई और इसके पीछे कोई गलती है या जानबूझकर नाम हटाने का प्रयास।
















