पिठोरी अमावस्या की अनोखी कथा: सात बेटों की मौत के बाद ऐसे मिला मां को संतान सुख

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए खास माना जाता है. लेकिन, भाद्रपद महीने की अमावस्या का महत्व इससे भी अलग है. इसे पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. कई जगह इसे पिठौरा, पोला या पोलाला अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन खासतौर पर…

पिठोरी अमावस्या की अनोखी कथा: सात बेटों की मौत के बाद ऐसे मिला मां को संतान सुख

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए खास माना जाता है. लेकिन, भाद्रपद महीने की अमावस्या का महत्व इससे भी अलग है. इसे पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. कई जगह इसे पिठौरा, पोला या पोलाला अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन खासतौर पर महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति की कामना से व्रत रखती हैं.

पिठोरी अमावस्या से जुड़ी एक ऐसी कथा भी प्रचलित है, जिसमें एक मां को बार-बार अपनी संतान को खोने का दुख झेलना पड़ा. एक के बाद एक उसके सातों पुत्रों की मृत्यु हो गई. जब मां ने देवी की शरण ली तो उसकी पूरी जिंदगी ही बदल गई. आखिर क्या हुआ था उस मां के साथ और कैसे उसके मृत पुत्रों को जीवन मिला, आइए जानते हैं पिठोरी अमावस्या की पूरी व्रत कथा.

पिठोरी अमावस्या की प्रचलित कथा
बहुत समय पहले एक गांव में सात भाई रहते थे. सभी भाइयों का विवाह हो चुका था और उनके घर में बच्चे भी थे. परिवार की महिलाएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना से पिठोरी अमावस्या का व्रत करती थीं. कथा के अनुसार, बड़े भाई की पत्नी ने जब पहली बार यह व्रत रखा तो उसके पुत्र की मृत्यु हो गई. मां के लिए यह किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं था. लेकिन अगले वर्ष भी परिवार पर ऐसा ही दुख आया और उसकी एक और संतान की मृत्यु हो गई.

समय बीतता गया, लेकिन हर साल अमावस्या के आसपास उस मां के घर मातम छा जाता. सातवें साल तक उसके सातों पुत्रों की मृत्यु हो चुकी थी. वह अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन उसने उम्मीद नहीं छोड़ी. कहा जाता है कि एक दिन गांव की कुलदेवी ने उस दुखी महिला को देखा. देवी ने उससे उसके दुख का कारण पूछा. महिला ने रोते हुए अपनी पूरी कहानी देवी को बता दी. उसने बताया कि कैसे उसकी संतानें एक-एक करके उससे दूर होती चली गईं और अब उसके पास कुछ भी नहीं बचा है.

मां की पीड़ा सुनकर देवी का हृदय द्रवित हो गया. उन्होंने उसे एक उपाय बताया और उन स्थानों पर हल्दी छिड़कने के लिए कहा, जहां उसके मृत पुत्रों का अंतिम संस्कार किया गया था. महिला ने देवी के बताए अनुसार वही किया. उसने उन सभी स्थानों पर हल्दी छिड़की और देवी का स्मरण किया. इसके बाद जब वह अपने घर लौटी तो वहां का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए.

कथा के अनुसार, उसके सातों पुत्र जीवित अवस्था में उसके सामने खड़े थे. अपने बच्चों को दोबारा जीवित देखकर मां की आंखों से आंसू निकल पड़े. उसके लिए इससे बड़ा चमत्कार और कोई नहीं हो सकता था. कहा जाता है कि इसी घटना के बाद महिलाओं के बीच पिठोरी अमावस्या का व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से करने की परंपरा मजबूत हुई.

पिठोरी अमावस्या पर 64 योगिनियों की पूजा
पिठोरी अमावस्या की पूजा में 64 योगिनियों का विशेष महत्व बताया जाता है. पारंपरिक विधि में आटे या गोबर से देवी-देवताओं और योगिनियों के प्रतीक बनाए जाते हैं. इसके साथ सप्त मातृकाओं का भी पूजन किया जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराओं में अंतर देखने को मिलता है.

पूजा के दौरान हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं. देवी को पकवानों का भोग लगाने के बाद आरती की जाती है. इसके बाद पिठोरी अमावस्या की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है.

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports