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लालू यादव की बढ़ी मुश्किलें! IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने 8 अन्य आरोपियों के साथ तय किए आरोप

नई दिल्ली/पटना  IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के ताजा आदेश के बाद लालू परिवार के लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं. कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है. जबकि 7 आरोपियों को आरोपों से…

लालू यादव की बढ़ी मुश्किलें! IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने 8 अन्य आरोपियों के साथ तय किए आरोप

नई दिल्ली/पटना

 IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के ताजा आदेश के बाद लालू परिवार के लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं. कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है. जबकि 7 आरोपियों को आरोपों से बरी किया गया है. मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर 2026 को होगी. लेकिन आखिर यह मामला है क्या? इसकी शुरुआत कब हुई? रेलवे के होटलों से लेकर पटना की जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग तक पूरा मामला कैसे पहुंचा? और अब लालू परिवार के सामने आगे क्या कानूनी चुनौती है? आइए हर सवाल का जवाब समझते हैं। 

क्या है IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग घटना, कैसे बढ़ेगी लालू परिवार की मुश्किलें जानें

क्या है IRCTC होटल मामला?
यह मामला लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान रांची और पुरी के BNR होटलों के संचालन के ठेके से जुड़ा है. CBI का आरोप है कि इन दोनों होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका निजी कंपनी सुजाता होटल्स को देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं की गईं. एजेंसी के अनुसार, इस कथित लाभ के बदले पटना में जमीन का लेन-देन हुआ। 

जमीन का क्या कनेक्शन है?
जांच एजेंसियों के मुताबिक होटल टेंडर और पटना की जमीन के बीच कथित लेन-देन इस केस का सबसे अहम हिस्सा है. CBI ने आरोप लगाया कि पटना की बेशकीमती जमीन पहले एक कंपनी के जरिए खरीदी गई. बाद में उसका प्रभावी नियंत्रण लालू परिवार से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा. एजेंसी ने जमीन की कीमत और जिस कीमत पर सौदा हुआ. उसमें बड़े अंतर का भी आरोप लगाया है. यही कथित लेन-देन बाद में ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार बना। 

मामला कब शुरू हुआ?
इस मामले की जड़ें 2004-05 के दौर में हैं. उस समय लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। मार्च 2004 में रेलवे के दो होटलों के प्रबंधन से संबंधित प्रक्रिया IRCTC को सौंपी गई थी. मई 2004 में लालू रेल मंत्री बने। इसके बाद होटल संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी. CBI के मुताबिक 2005-06 में टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कर सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया गया। 

CBI ने केस कब दर्ज किया?
कई वर्षों बाद यह मामला 2017 में फिर सामने आया. जुलाई 2017 में CBI ने FIR दर्ज की. एजेंसी ने लालू यादव और अन्य पर पद के कथित दुरुपयोग, आपराधिक साजिश और होटल टेंडर में अनियमितता के आरोप लगाए. इसके बाद CBI ने जांच आगे बढ़ाई और अप्रैल 2018 में चार्जशीट दाखिल की. इसमें लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया। 

ED की एंट्री कब हुई?
CBI की FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की. अगस्त 2018 में ED ने PMLA के तहत लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. यहीं से यह मामला सिर्फ कथित भ्रष्टाचार या टेंडर विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग केस के रूप में भी अदालत पहुंच गया। 

आज कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
10 सितंबर 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया. वहीं 7 आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया गया. कोर्ट ने प्रथमदृष्टया लालू यादव द्वारा रेल मंत्री के पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों को मुकदमा आगे बढ़ाने लायक माना. आरोप तय किए गए आरोपियों में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता, पीसी गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स, सुजाता होटल्स, विजय कोचर और विनय कोचर शामिल हैं। 

क्या लालू यादव और तेजस्वी दोषी साबित हो गए?
नहीं…यह सबसे जरूरी कानूनी बात है. कोर्ट द्वारा आरोप तय करना दोषी करार देना नहीं होता. इसका मतलब है कि अदालत ने प्रथमदृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार माना है. अब ट्रायल में अभियोजन पक्ष को अपने आरोप सबूतों के जरिए साबित करने होंगे. बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार होगा. इसलिए फिलहाल लालू यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी या अन्य आरोपियों को दोषी कहना सही नहीं होगा। 

अब लालू परिवार की मुश्किलें कैसे बढ़ सकती हैं?
आरोप तय होने के बाद मामला ट्रायल की ओर बढ़ेगा. अभियोजन पक्ष सबूत और गवाह पेश करेगा.इसके बाद बचाव पक्ष उन सबूतों को चुनौती देगा. लालू परिवार के लिए चुनौती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले में कथित होटल टेंडर, जमीन के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की कड़ियों को अदालत में साबित करने की कोशिश होगी. हालांकि इसका अंतिम परिणाम ट्रायल के बाद ही सामने आएगा। 

क्या यह Land-for-Jobs केस ही है?
नहीं…दोनों मामले अलग हैं. IRCTC मामला रांची और पुरी के रेलवे होटलों के कथित टेंडर में अनियमितता और उससे जुड़े जमीन के लेन-देन पर केंद्रित है. वहीं Land-for-Jobs केस में रेलवे में नौकरी देने के बदले कथित तौर पर जमीन लेने के आरोप हैं. दोनों मामलों में लालू परिवार के सदस्यों के नाम सामने आने के कारण अक्सर इन्हें एक साथ देखा जाता है, लेकिन कानूनी तौर पर दोनों अलग मामले हैं। 

अब अगली सुनवाई कब होगी?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2026 को अगली सुनवाई की तारीख तय की है. अब अदालत में मामले की ट्रायल प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 

 

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