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BMC के 62 हजार से ज्यादा आवासीय-व्यावसायिक उपयोग दावों पर उठे सवाल, केवल 7,951 मामलों में नोटिस

 भोपाल  आवासीय क्षेत्रों में कारोबार के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बीच अब उसके ही आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में पांच अगस्त को हुई सुनवाई के बाद निगम के अधिकारियों ने दावा किया था कि शहर में 62 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां चिह्नित की गई हैं, जहां आवासीय उपयोग…

BMC के 62 हजार से ज्यादा आवासीय-व्यावसायिक उपयोग दावों पर उठे सवाल, केवल 7,951 मामलों में नोटिस

 भोपाल 
आवासीय क्षेत्रों में कारोबार के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई के बीच अब उसके ही आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में पांच अगस्त को हुई सुनवाई के बाद निगम के अधिकारियों ने दावा किया था कि शहर में 62 हजार से अधिक ऐसी संपत्तियां चिह्नित की गई हैं, जहां आवासीय उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं।

यह आंकड़ा लगातार निगम की कार्रवाई के दायरे के रूप में बताया गया, जिससे शहर के व्यापारी में इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई को लेकर डर का माहौल बन गया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई से पहले तैयार किए गए शपथपत्र में निगम ने 7,951 मामलों की पहचान कर नियम-11 के नोटिस जारी करने की जानकारी दी है।

यानी जिस सर्वे को निगम ने शहर में 62 हजार से अधिक संपत्तियों तक पहुंचने वाला बताया था, अदालत के सामने पेश रिकार्ड में उसका एक बड़ा हिस्सा दिखाई ही नहीं देता।

नोटिस के बाद कार्रवाई का हिसाब भी अलग
शपथपत्र में निगम ने 190 परिसरों को अनधिकृत उपयोग के कारण बंद और सील करने की जानकारी दी है। जबकि हकीकत यह है कि निगम ने शहर में सिर्फ सात प्रतिष्ठान सील किए थे और 183 प्रतिष्ठनों को स्वेच्छा से बंद करने के पंचनामे बनाए थे। शपथपत्र के एक हिस्से में 170 परिसरों के बंद किए जाने तथा उनमें से 165 को स्वीकृत अधिभोग के अनुरूप पाए जाने पर बहाल करने और पांच को सील रखने की जानकारी दी गई है।

296 अवैध निर्माण भी रडार पर
निगम ने आवासीय उपयोग के उल्लंघन के अलावा बिना भवन अनुमति या स्वीकृत अनुमति के विपरीत निर्माण के 296 मामले भी चिह्नित किए हैं। इनमें 302(1) के तहत 160 और 307(2) के तहत 163 नोटिस जारी किए गए। 124 मामलों में सुनवाई के बाद आदेश हुए और 75 मामलों में अवैध निर्माण या अतिक्रमण हटाया गया।

लोटस पर तीन साल बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अरेरा कालोनी स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठान लोटस इलेक्ट्रानिक्स को नगर निगम ने 2019 में नोटिस जारी किया था। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट ने कार्रवाई से पहले 15 दिन का समय दिया था। खास बात यह है कि यह 15 दिन की अवधि करीब तीन साल पहले ही पूरी हो चुकी है, फिर भी इस मामले में नगर निगम ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

जोनवार नोटिस का आंकड़ा

    एक – 280
    दो – 197
    तीन – 242
    चार – 234
    पांच – 620
    छह – 184
    सात – 348
    आठ – 603
    नौ – 264
    10 – 456
    11 – 336
    12 – 520
    13 – 619
    14 – 209
    15 – 569
    16 – 415
    17 – 440
    18 – 464
    19 – 362
    20 – 377
    21 – 212
    जोड़ 7617

    शपथपत्र में कुल 7951

दिल्ली हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जर्जर मकानों पर कार्रवाई की जानकारी

    इधर, दिल्ली के सत्य निकेतन में भवन गिरने से सात लोगों की मौत और 12 के घायल होने की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भवनों की सुरक्षा और पूर्व में दिए निर्देशों के पालन को लेकर सख्ती दिखाई है।

    न्यायालय ने संबंधित सभी पक्षों से पूर्व के आदेशों के पालन पर शपथपत्र और रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में अब नगर निगम को जर्जर मकानों की स्थिति और कार्रवाई को लेकर जानकारी देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर दो बजे होगी।

 

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