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उज्जैन में 35 लाख दीपों से जगमगाएंगे शिप्रा घाट, सुरक्षा में तैनात होंगे 3 हजार पुलिसकर्मी

उज्जैन  महाकाल की नगरी एक बार फिर दीपों की रोशनी में इतिहास रचने की तैयारी कर रही है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और जन सेवा के 25 साल पूरे होने पर 17 सितंबर की शाम 7 बजे उज्जैन में सेवा संकल्प अभियान के दिन भव्य दीपोत्सव होगा. क्षिप्रा नदी के घाटों और महाकाल…

उज्जैन में 35 लाख दीपों से जगमगाएंगे शिप्रा घाट, सुरक्षा में तैनात होंगे 3 हजार पुलिसकर्मी

उज्जैन
 महाकाल की नगरी एक बार फिर दीपों की रोशनी में इतिहास रचने की तैयारी कर रही है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और जन सेवा के 25 साल पूरे होने पर 17 सितंबर की शाम 7 बजे उज्जैन में सेवा संकल्प अभियान के दिन भव्य दीपोत्सव होगा. क्षिप्रा नदी के घाटों और महाकाल लोक क्षेत्र में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित करने की तैयारी की गई है। 

इस आयोजन को जन भागीदारी से जोड़ते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को 7 सेक्टर और 250 सब सेक्टर में बांटा है. यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि उज्जैन पहले ही दीप प्रज्वलन का विश्व रिकॉर्ड बना चुका है. अब 3 साल बाद 18.82 लाख के पुराने आंकड़े से काफी आगे निकलने की तैयारी है. हालांकि मौजूदा गिनीज रिकॉर्ड अयोध्या के नाम है, जहां साल 2025 में 26,17,215 दीप प्रज्वलित किए गए थे। 

'उज्जैन का रिकॉर्ड 18.82 लाख, अब 25 लाख का लक्ष्य'
कलेक्टर रोशन कुमार सिंहने बताया, "साल 2023 में महाशिवरात्रि के अवसर पर उज्जैन के क्षिप्रा तट पर 18,82,229 दीप एक साथ जलाए गए थे, जिसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया गया था. अब साल 2026 में सेवा संकल्प के तहत लक्ष्य है कि 25 लाख से अधिक दीपों को प्रज्वलित कर नया रिकॉर्ड कायम किया जाए. जिसकी तैयारियां उज्जैन नगर निगम और स्मार्ट सिटी की ओर से पूरी कर ली गई है। 

इसी तरह इंदौर में 2.51 लाख, मैहर में 4.86 लाख, खजुराहो में तीन लाख, अमरकंटक में 21 हजार, जबलपुर में नर्मदा घाटों समेत प्रदेशभर में दीपक प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। एमपी में दीपोत्सव पर लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट की। उन्होंने लिखा- 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही। मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए। छात्र, बच्चे, गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े या महिलाएं – हर वर्ग प्रताड़ित है, कोई खुश नहीं।

उज्जैन में देशभर के 500 कलाकार प्रस्तुतियां देंगे
शिप्रा के रामघाट पर शाम 7 बजे ‘आशीर्वाद का दीप’ प्रज्ज्वलित कर दीपोत्सव की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद आरती होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां रहेंगे।

दीपोत्सव में देशभर से 500 से अधिक कलाकार शामिल होंगे। कार्यक्रम में बाबा महाकाल पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, गायन, वादन, नृत्य और युवाओं के लिए भजन जैमिंग होगा।

कवि शैलेश लोढ़ा प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर आधारित नरेशन प्रस्तुत करेंगे। कार्यक्रम का समापन आतिशबाजी के साथ होगा। कार्तिक मेला ग्राउंड में पीएम मोदी का पोर्ट्रेट भी बनाया गया है, जिस पर जनभागीदारी से दीप रखे जाएंगे।

26 हजार वॉलंटियर्स संभालेंगे दीप जलाने की जिम्मेदारी
दीपोत्सव के लिए करीब 26 हजार वॉलंटियर्स को जिम्मेदारियां दी गई हैं। इन्हें पहले से ब्लॉक और दीपों की संख्या के हिसाब से तैनात किया गया है। केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट, दत्त अखाड़ा, भूखी माता, महाकाल लोक और रामघाट के दो सेक्टर सहित शिप्रा तट के विभिन्न हिस्सों में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।

'11 हजार ब्लॉक, हर ब्लॉक में 225 दीप'
स्मार्ट सिटी सीईओ नेहा जैन ने बताया, "पूरे आयोजन क्षेत्र को 7 सेक्टर और 250 सब सेक्टर में बांटा गया है. करीब 11000 ब्लॉक तैयार किए गए हैं और प्रत्येक ब्लॉक में 225 दीप लगाए जाएंगे. सभी ब्लॉक के लिए 30 हजार वॉलेंटियर्स, जिसमें शासकीय अधिकारी, कर्मचारी, शहर के सामाजिक संगठन और अन्य को आवश्यक दीप, तेल, मोमबत्ती, माचिस, कपूर और दूसरी जरुरी सामग्रियां पहले से उपलब्ध करवाई जाएंगी। 

'30 लाख दीप, 45000 लीटर तेल की व्यवस्था'
नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्राके अनुसार, "शहर के कार्तिक मेला प्रांगण में दीपों की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है. दीपों की धुलाई, छंटाई, पैकिंग और ब्लॉक वार सामग्री तैयार की जा रही है. आयोजन के लिए 45000 लीटर तेल, 10000 माचिस, 700 किलो कपूर, 30 लाख दीए, 53000 से अधिक मोमबत्ती मंगवाई गई हैं। 

'रामघाट से महाकाल लोक तक बनेगा रोशनी का कॉरिडोर'
नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया, "दीपोत्सव सिर्फ रामघाट तक सीमित नहीं है बल्कि यह रामघाट से महाकाल लोक तक रोशनी के लिए कॉरिडोर बनाया जाएगा. केदारेश्वर घाट, दत्त अखाड़ा घाट, सुनहरी घाट, कर्कराज मंदिर, भूखी माता घाट, लालपुल घाट सहित क्षिप्रा नदी के अलग-अलग घाटों को शामिल किया गया है. घाटों की सफाई ब्लॉक निर्माण और मार्किंग का काम लगातार चल रहा है। 

बारिश हुई तो क्या होगा, प्रशासन ने बनाया प्लान बी
स्मार्ट सिटी सीईओ नेहा जैन ने बताया, "चूंकि बारिश का भी मौसम है, उसको ध्यान में रखते हुए बैकअप तैयारी भी शुरू की गई है. दीप, तेल, बत्ती और दूसरी सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए टीन शेड और अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रहीं हैं. हर ब्लॉक के लिए 1/1 मीटर की प्लास्टिक शीट ढंकने के लिए मंगवाई है. दीप जलने से पहले बारिश आती है तो व्यवस्था चाक चौबंद है। 

'जीरो वेस्ट मॉडल पर जलेंगे 25 लाख दीप'
नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्राके अनुसार, "इस आयोजन का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा जीरो वेस्ट मॉडल है. दीपोत्सव के दौरान स्वच्छता और कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. हर क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारियों की तैनाती और आयोजन के बाद तत्काल सफाई की व्यवस्था की गई है. बची हुई सामग्री को भी रीसायकल किया जाएगा। 

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