रायपुर
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले कई दशकों से चला आ रहा महानदी जल विवाद अब बहुत जल्द सुलझ जाएगा। उनके अनुसार, इस दिशा में केंद्र सरकार सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है और दोनों ही पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ केंद्र में भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार होने के कारण इस संवेदनशील मामले का आपसी सहमति से समाधान निकलना अब आसान हो गया है।
अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों राज्यों के बीच आपसी सहयोग, क्षेत्रीय विकास और जन कल्याण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सांस्कृतिक संबंध गहरे
मुख्यमंत्री साय ने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के बीच आपसी पारिवारिक और सांस्कृतिक गहरे संबंध हैं। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि दोनों सरकारों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय से आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा और पूरे क्षेत्र की प्रगति को एक नई गति प्राप्त होगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री साय ने भुवनेश्वर स्थित प्रसिद्ध भगवान लिंगराज मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किए और राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।
ट्रिब्यूनल के निर्देश और केंद्र की सकारात्मक पहल
गौरतलब है कि महानदी जल बंटवारे को लेकर यह विवाद वर्ष 1983 से चला आ रहा है, जो लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच चर्चा का विषय रहा है। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित विशेष ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को आगामी 28 सितंबर 2026 तक अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।
तय समय से पहले सहमति से समाधान
जानकारों का मानना है कि इस तय समय सीमा से पहले दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति से कोई ठोस समझौता सामने आ सकता है।
कई राज्यों के मुद्दे सुलझे
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार की मध्यस्थता और पहल से देश के अन्य राज्यों के बीच कई पुराने जल विवाद सफलतापूर्वक सुलझाए गए हैं, जैसे कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना, ताजेवाला हेडवर्क्स समझौता, सोन नदी जल बंटवारा और केन-बेतवा लिंक परियोजना। इन सफल समझौतों की तर्ज पर अब महानदी विवाद के भी जल्द ही शांतिपूर्ण हल निकलने की संभावना जताई जा रही है।
















