,

एक RTI, बार-बार शिकायत पर हरियाणा सूचना आयोग सख्त, अब देना होगा शपथपत्र

 चंडीगढ सूचना का अधिकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन एक ही आरटीआइ आवेदन और विषय को लेकर बार-बार शिकायत या अपील दायर करने को वैधानिक अधिकार की आड़ में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की। आयोग ने…

एक RTI, बार-बार शिकायत पर हरियाणा सूचना आयोग सख्त, अब देना होगा शपथपत्र

 चंडीगढ
सूचना का अधिकार पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन एक ही आरटीआइ आवेदन और विषय को लेकर बार-बार शिकायत या अपील दायर करने को वैधानिक अधिकार की आड़ में स्वीकार नहीं किया जा सकता। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की।

आयोग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि सूचना मांगने का अधिकार किसी व्यक्ति को एक ही कारण और विषय पर बार-बार कार्यवाही शुरू करने का असीमित अधिकार नहीं देता।

आयोग ने कहा कि आरटीआइ कानून को इस तरह लागू किया जाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े तथा सरकारी विभागों और आयोग के सीमित संसाधनों का अनावश्यक दोहन न हो।

मामला पलवल निवासी श्रवण कुमार की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी एवं राज्य लोक सूचना अधिकारी पलवल के खिलाफ दायर शिकायत से जुड़ा है। संबंधित आरटीआइ आवेदन 24 अगस्त 2025 को दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से आयोग को बताया गया कि इसी आरटीआइ आवेदन के आधार पर पहले भी दो अलग मामलों में शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।

इतना ही नहीं, वर्तमान शिकायत में शामिल आरटीआइ आवेदन पहले दाखिल किए गए आवेदन के बिल्कुल समान था। आयोग को यह भी बताया गया कि श्रवण कुमार से संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ करीब 36 मामले आयोग के समक्ष लंबित हैं।

इसके अलावा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक के कार्यालयों में करीब 130 से 150 आरटीआइ आवेदन भी दाखिल किए गए हैं।

राज्य सूचना आयुक्त डा. अजय सूरा ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि आयोग के समक्ष पहले से दाखिल प्रत्येक आरटीआइ मामले तथा भविष्य में दायर की जाने वाली शिकायत या अपील के साथ श्रवण कुमार को शपथपत्र देना होगा।

इसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि संबंधित आरटीआइ आवेदन और विषय को लेकर उन्होंने पहले कोई अन्य शिकायत या अपील दाखिल नहीं की है।

आयोग ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक के समक्ष लंबित आरटीआई आवेदनों के लिए भी इसी तरह का शपथपत्र देने का निर्देश दिया है। भविष्य में इन अधिकारियों के समक्ष दाखिल होने वाले प्रत्येक आरटीआइ आवेदन के साथ भी ऐसा शपथपत्र लगाना अनिवार्य होगा।

संसाधनों के दोहराव पर आयोग की चिंता
आयोग ने कहा कि एक ही आरटीआइ आवेदन से बार-बार शिकायतें दायर होने पर कार्यवाही दोहराई जाती है। इससे आयोग और संबंधित लोक प्राधिकरण के समय और संसाधनों की अनावश्यक खपत होती है।

सुनवाई के दौरान जब शिकायतकर्ता से बार-बार शिकायत दाखिल करने का कारण पूछा गया तो उन्होंने संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि यदि एक शिकायत का फैसला हो चुका है तो अन्य शिकायतों का भी उसी आधार पर निपटारा किया जा सकता है।

आयोग ने पूर्व न्यायिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आरटीआइ के कानूनी अधिकार का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। लोक प्राधिकरणों पर इतनी अधिक शिकायतों और आवेदनों का बोझ भी नहीं डाला जा सकता कि सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में उनका अधिकांश समय और संसाधन ही खर्च होने लगे।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports