स्कूलों के आसपास नहीं बिकेंगे चिप्स और सॉफ्ट ड्रिंक? नए नियम की तैयारी

नई दिल्ली देश भर में बच्चों के भीतर तेजी से बढ़ रहे मोटापे और अनहेल्दी खाने-पीने की आदतों पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार एक बड़ा और कड़ा कदम उठाने जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) देश के 15 लाख से ज्यादा स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में फैट,…

स्कूलों के आसपास नहीं बिकेंगे चिप्स और सॉफ्ट ड्रिंक? नए नियम की तैयारी

नई दिल्ली

देश भर में बच्चों के भीतर तेजी से बढ़ रहे मोटापे और अनहेल्दी खाने-पीने की आदतों पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार एक बड़ा और कड़ा कदम उठाने जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) देश के 15 लाख से ज्यादा स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में फैट, नमक और चीनी की ज्यादा मात्रा वाले खाने के आइटम की बिक्री और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। इससे जुड़े नियम और कानूनों को अंतिम रूप दिया जाने वाला है।

इस नए नियम का सीधा असर स्कूलों के आसपास चलने वाली छोटी किराना दुकानों, रेस्टोरेंट, ठेले-खोमचे वालों से लेकर पेप्सिको, कोका-कोला, नेस्ले और मोंडेलेज जैसी दिग्गज मल्टी नेशनल कंपनियों के कारोबार पर पड़ेगा।

क्या-क्या नहीं बिकेगा स्कूलों के पास?
प्रस्तावित नियमों के तहत, जिस भी फूड आइटम में तय सीमा से ज्यादा फैट, नमक या शुगर पाई जाएगी, उसकी बिक्री 50 मीटर के दायरे में बैन रहेगी।

इसमें फास्ट फूड और जंक फूड जैसे- पिज्जा, बर्गर, नूडल्स और समोसे-कचौड़ी। पैक्ड स्नैक्स जैसे- नमकीन, पोटैटो चिप्स (जैसे अंकल चिप्स, लेज)। और सॉफ्ट ड्रिंक्स और कैंडीज जैसे- कोला, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चॉकलेट और ज्यादा चीनी वाली मिठाइयों को शामिल किया जाएगा।

FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रजित पुन्हानी ने इस पहल के बारे में कहा, "हमारा मकसद बच्चों को छोटी उम्र से ही खराब खाने की आदतों से दूर करना है। हमें उनमें सही खान-पान की आदतें विकसित करनी होंगी। इससे दुकानदारों का कारोबार बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि वे बिना HFSS वाले सेहतमंद खाद्य पदार्थ बेच सकते हैं।"

FSSAI ने हाल ही में फैट, साल्ट और शुगर की सीमाओं के लिए एक ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर 6 अक्टूबर 2026 तक जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं।

भारत में बच्चों में मोटापे का खौफनाक आंकड़ा
'वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन' के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में भारत में 5 से 19 साल की उम्र के करीब 2.8 करोड़ बच्चे ओवरवेट या मोटापे के शिकार थे। फिर 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग 50% बढ़कर 4.1 करोड़ के पार पहुंच गया।

आने वाले सालों में अगर यही रफ्तार रही, तो 2040 तक देश में मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 5.6 करोड़ हो जाएगी।

टिफिन में घर का दाल-चावल ले जाने के बजाय रास्ते में मिलने वाले 10 रुपए के चिप्स या 49 रुपए वाले सस्ते पिज्जा की तरफ बच्चों का बढ़ता रुझान इस स्वास्थ्य संकट की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।

महाराष्ट्र में शुरू हुई सख्त कार्रवाई
जहां केंद्र सरकार पूरे देश के लिए नियम तय कर रही है, वहीं महाराष्ट्र सरकार ने पहले से ही सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है।

महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि राज्य में किसी भी दुकान को स्कूल के 50 मीटर के दायरे में ऐसे उत्पाद रखने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। राज्य के आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य निरीक्षकों ने अब तक 133 दुकानों में उल्लंघन पाया है और 51 दुकानों को अपना कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया है।

दुकानदारों और कंपनियों में हड़कंप
FSSAI के इस कदम से किराना दुकानदारों और खाद्य उद्योग से जुड़े संगठनों में चिंता की लहर है:

ओडिशा के भुवनेश्वर समेत कई शहरों के दुकानदारों का कहना है कि स्कूलों के आसपास बिक्री बंद होने से उनकी रोजाना की कमाई में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।

'कॉन्फेडेरेशन ऑफ इंडियन फूड ट्रेड एंड इंडस्ट्री' का तर्क है कि भारत में कई स्कूल बेहद व्यस्त बाजारों के बीच स्थित हैं। ऐसे में 50 मीटर के दायरे को पूरी तरह लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा और इससे लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि चिली और मेक्सिको जैसे देशों की तर्ज पर भारत का यह कानून बड़ी एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों को मजबूर करेगा कि वे अपने स्नैक्स और ड्रिंक्स में नमक, फैट और चीनी की मात्रा कम करें।

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