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MP में CSR का नया रोडमैप तैयार, 61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों पर फोकस

मध्यप्रदेश में सीएसआर का नया रोडमैप, जरूरत के मुताबिक होगा निवेश, परिणाम पर रहेगी नजर : मंत्री सुश्री भूरिया 61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी भोपाल मध्यप्रदेश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को सरकारी विकास प्राथमिकताओं से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के…

MP में CSR का नया रोडमैप तैयार, 61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों पर फोकस

मध्यप्रदेश में सीएसआर का नया रोडमैप, जरूरत के मुताबिक होगा निवेश, परिणाम पर रहेगी नजर : मंत्री सुश्री भूरिया

61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी

भोपाल

मध्यप्रदेश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को सरकारी विकास प्राथमिकताओं से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में अधिक प्रभावी परिणाम हासिल करने की दिशा में सरकार ने कॉरपोरेट जगत के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। सीएसआर कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने कहा कि सीएसआर केवल गतिविधियां पूरी करने या निर्धारित लक्ष्य हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समुदायों को मजबूत करना और लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना होना चाहिए।

मंत्री श्रीमती भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश जैसे विविधताओं वाले राज्य में सीएसआर निवेश के लिए एक जैसी कार्ययोजना के बजाय स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं और कॉरपोरेट संस्थानों की विशेषज्ञता एवं संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल से ऐसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, जिन्हें लंबे समय तक कायम रखा जा सके। उन्होंने सीएसआर साझेदारियों में स्पष्ट प्राथमिकताओं, जरूरतों की पहचान, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामों के मापन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सीएसआर पोर्टल के साथ मध्यप्रदेश का पंखुड़ी पोर्टल भी सरकार की विकास आवश्यकताओं और संभावित सीएसआर साझेदारों के बीच सेतु का काम कर सकता है। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी साझा कर सरकार, कॉरपोरेट, विकास एजेंसियों और अन्य संस्थाओं के बीच अधिक व्यवस्थित साझेदारी विकसित की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि मजबूत सरकारी-सीएसआर सहयोग से विकास के प्रयासों को अतिरिक्त गति देने के साथ उनकी पहुंच और प्रभाव को भी बढ़ाया जा सकता है।

मध्यप्रदेश में 1195 करोड़ से अधिक का सीएसआर निवेश, प्राथमिकताओं से जोड़ने पर जोर

मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला ने सीएसआर के कानूनी और संस्थागत ढांचे की जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के बाद पात्र कंपनियों के लिए सीएसआर एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में सामने आया है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाली कंपनियों को पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर व्यय करना होता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 1,195.34 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च किए गए। हालांकि, इस निवेश में जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब दो प्रतिशत ही है। उन्होंने इसे भविष्य में अधिक सक्रिय सीएसआर भागीदारी की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया।

श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सीएसआर को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर जरूरतों की बेहतर मैपिंग, सरकार की प्राथमिकताओं के साथ सीएसआर कंपनियों की रुचि का मिलान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा। उन्होंने सीएसआर पोर्टल को और सुदृढ़ करने, सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों और अन्य साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई, जिनके परिणाम स्पष्ट रूप से मापे जा सकें और जिन्हें लंबे समय तक संचालित किया जा सके।

उन्होंने मध्यप्रदेश सीएसआर फैसिलिटेशन गाइडलाइनस 2017 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सरकार की भूमिका सुविधा प्रदाता और समन्वयक की है। सीएसआर के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र, कंपनियों, विकास संस्थाओं, सिविल सोसायटी और अन्य हितधारकों के बीच साझेदारी को अधिक संरचित स्वरूप देना समय की आवश्यकता है।

61 लाख से अधिक बच्चों के पोषण में सीएसआर की भागीदारी का बड़ा अवसर

महिला एवं बाल विकास आयुक्त श्री संदीप जी. आर. ने सीएसआर को बाल पोषण और शुरुआती बाल विकास से जोड़ते हुए कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके संपूर्ण विकास की बुनियाद तय करते हैं। विशेष रूप से जीवन के पहले छह वर्ष और शुरुआती 1000 दिन पोषण, वृद्धि और विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में समय पर किए गए हस्तक्षेपों का प्रभाव आगे के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने बाल विकास के लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए सरकार के साथ समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

आयुक्त ने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 61 लाख से अधिक संवेदनशील एवं जरूरतमंद बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को बेहतर बनाने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नवाचारों को बढ़ावा देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।

श्री संदीप ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण समाधानों का उदाहरण देते हुए ‘रंगीन रोटी’ जैसी पहल का उल्लेख किया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक सामग्री, जैसे सहजन की पत्तियों या मिलेट्स को रोजमर्रा के भोजन में शामिल कर ऐसे पोषण मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जो स्थानीय खान-पान की आदतों के अनुरूप होने के साथ व्यवहारिक भी हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्थानीय और नवाचारी समाधान समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के साथ पोषण परिणामों को भी बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने सीएसआर की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश देश की आबादी में लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सीएसआर व्यय में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1.44 प्रतिशत है। ऐसे में राज्य में सीएसआर निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने श्योपुर में ब्रिटानिया फाउंडेशन और विदिशा में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी साझेदारियां सरकारी प्रयासों को पूरक समर्थन प्रदान कर सकती हैं।

जरूरत और निवेश के बीच बनेगा सीधा संबंध

कॉन्क्लेव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सीएसआर को केवल गतिविधि आधारित व्यय के बजाय स्पष्ट और मापनीय परिणामों से जोड़ा जाए। राज्य और जिलों की वास्तविक जरूरतों की पहचान कर उन्हें सीएसआर संस्थाओं की रुचि, क्षमता और विशेषज्ञता से जोड़ने, परियोजनाओं की निगरानी करने तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी।

सत्र में सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों, विकास एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वित साझेदारी को आवश्यक बताया गया। साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि सीएसआर परियोजनाएं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हों, उनके परिणाम मापे जा सकें और सफल पहल को मौजूदा सरकारी व्यवस्थाओं के साथ जोड़कर दीर्घकालिक रूप से विस्तार दिया जा सके।

 

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