,

72825 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, याचिका खारिज

 प्रयागराज  उत्तर प्रदेश की परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में चले आ रहे विवाद को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हमेशा के लिए बंद कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ ने उन सैकड़ों अवमानना याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जो वर्ष 2014-15 के अंतरिम आदेशों के…

72825 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, याचिका खारिज

 प्रयागराज
 उत्तर प्रदेश की परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में चले आ रहे विवाद को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हमेशा के लिए बंद कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की खंडपीठ ने उन सैकड़ों अवमानना याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जो वर्ष 2014-15 के अंतरिम आदेशों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए वर्ष 2024 से 2026 के बीच दायर की गई थीं। इसी के साथ इस भर्ती में रिक्त 6170 पदों पर नियुक्ति की लड़ाई लड़ रहे 32 हजार से अधिक बेरोजगारों की उम्मीदें भी समाप्त हो गई हैं।

शीर्ष कोर्ट में सिविल अपील संख्या 4347 से 4375 तक साल 2014 में दायर हुई थीं। तब अंतरिम आदेशों के जरिए राज्य सरकार को प्रशिक्षु शिक्षकों के पद भरने के निर्देश दिए गए थे। बाद में इनमें संशोधन भी हुआ। जिन अभ्यर्थियों के नाम टीईटी में गड़बड़ी से जुड़े नहीं थे और जिन्होंने तय प्रतिशत अंक हासिल किए थे, उन्हें नियुक्ति दी गई। जुलाई 2017 में जब अंतिम फैसला आया तो अदालत ने साफ कर दिया कि अंतरिम आदेशों के तहत हुई 66,655 नियुक्तियों में कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अंतिम आदेश के बाद अंतरिम आदेशों की अवमानना का सवाल ही नहीं उठता। ये याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं, इसलिए इन्हें खारिज किया जाता है। साथ ही सभी लंबित अंतरिम अर्जियां भी निपटा दी गईं। वर्षों से चले आ रहे इस विवाद में एक बार फिर अदालत ने रेखा खींच दी। जो आदेश पूरे हो चुके थे, उनके नाम पर नई लड़ाई की कोशिश अब रुक गई है।

ओएमआर शीट गलत भरने वालों को राहत नहीं
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ओएमआर शीट भरने में परीक्षा निर्देशों का पालन नहीं करने वाली अभ्यर्थी को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ओएमआर शीट भरने के संबंध में जारी निर्देश अनिवार्य और बाध्यकारी हैं। निर्धारित तरीके से जानकारी नहीं भरने पर बाद में हाथ से ओएमआर शीट का मूल्यांकन कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने कहा कि अभ्यर्थियों से अपेक्षा की जाती है कि वे परीक्षा के निर्देशों को ध्यान से पढ़ें।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports