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कूनो में चीता परिवार बढ़ा, KJP21 ने जन्मे 5 नन्हे शावक; भारत में चीतों की संख्या पहुंची 60

श्योपुर कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। यहां मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है। खास बात यह है कि…

कूनो में चीता परिवार बढ़ा, KJP21 ने जन्मे 5 नन्हे शावक; भारत में चीतों की संख्या पहुंची 60

श्योपुर

कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। यहां मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है। इनमें 41 चीते ऐसे हैं, जिनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है। खास बात यह है कि KJP21 भारतीय धरती पर जन्म लेने के बाद शावकों को जन्म देने वाली तीसरी मादा चीता बन गई है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी भारत में शावकों को जन्म दे चुकी हैं।  
  श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से प्रोजेक्ट चीता को लेकर एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। सोमवार को यहां मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ ही देश में अब चीतों की कुल संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 चीते भारत की धरती पर जन्मे हैं।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इंटरनेट मीडिया 'एक्स' पर नवजात शावकों की तस्वीरें और वीडियो साझा कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और ऐतिहासिक और खुशी का पल बताया।

Kuno National Park में तीसरी भारतीय जन्मी मादा चीता बनी मां
KJP21 भारत में जन्मी उन मादा चीतों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्होंने भारतीय धरती पर शावकों को जन्म दिया है। वह मुखी और KGP12 के बाद तीसरी ऐसी मादा चीता है। इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारत में चीता पुनर्स्थापना का लक्ष्य केवल दूसरे देशों से चीतों को लाकर उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है। असली सफलता तब मानी जाएगी, जब यहां पैदा हुई नई पीढ़ी आगे प्रजनन करे और एक स्थिर चीता आबादी विकसित हो। KJP21 का पांच शावकों को जन्म देना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Botswana से आए नर चीते से पैदा हुए पांच शावक
इन पांच शावकों का जन्म अपने साथ एक और बड़ी उपलब्धि लेकर आया है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाया गया नर चीता है। यानी इन शावकों के जन्म के साथ भारत में Botswanan lineage यानी बोत्सवाना वंशावली की शुरुआत हुई है। यह प्रोजेक्ट चीता के लिए आनुवंशिक विविधता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

भारत में जन्मी तीसरी मादा चीता ने बढ़ाया कुनबा
केंद्रीय मंत्री यादव ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा- प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और ऐतिहासिक व आल्हादित कर देने वाला पल! भारत में जन्मी 32 माह की चीता KJP21 ने आज (सोमवार) को कूनो नेशनल पार्क में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। वह भारत में जन्म लेने वाली तीसरी ऐसी मादा चीता है, जिसने यहां शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले मुखी और KGP12 भी भारत में शावकों को जन्म दे चुकी हैं।

वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए अहम पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे देश में चीतों की अगली पीढ़ी तैयार होने की प्रक्रिया और मजबूत हो रही है।

बोत्सवाना की नई जेनेटिक लाइन की शुरुआत
इन पांच शावकों के जन्म की एक और खासियत है। इनके पिता बोत्सवाना से भारत लाए गए नर चीता हैं। ऐसे में इन शावकों के साथ भारत में बोत्सवाना की जेनेटिक लाइन की भी शुरुआत हुई है। इससे देश में विकसित हो रहे चीता कुनबे में नई आनुवंशिक विविधता जुड़ने की उम्मीद है।

भारत में जन्मे चीतों का आंकड़ा 40 के पार
पांच नए शावकों के जन्म के बाद अब भारत में चीतों की कुल संख्या अब 60 हो गई है। खास बात यह है कि इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में लगातार हो रहे प्रजनन को प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ, प्रबंधन टीम और अन्य कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की धरती पर जन्मी चीतों की यह नई पीढ़ी देश में चीता पुनर्स्थापना की कहानी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ रही है।

चीता पुनर्स्थापना अभियान में एक और गौरवपूर्ण अध्याय
भारतीय धरती पर चीतों की एक और पीढ़ी का जन्म प्रोजेक्ट चीता की उल्लेखनीय यात्रा में एक और गौरवपूर्ण अध्याय है। यह उपलब्धि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता संरक्षण के लिए निरंतर किए जा रहे वैज्ञानिक प्रबंधन, निगरानी और संरक्षण प्रयासों को भी रेखांकित करती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, मैदानी अमले, प्रबंधन टीम तथा सभी सहयोगियों को बधाई दी गई है। उनके समर्पण, प्रतिबद्धता और अथक प्रयासों से भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है। नन्हे मेहमानों के आगमन से कूनो की धरती पर एक बार फिर प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण की नई उम्मीद ने जन्म लिया है।

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