भारत की बड़ी क्वांटम छलांग, 5.56 किमी दूरी तक सुरक्षित डेटा ट्रांसफर का बनाया रिकॉर्ड

 नई दिल्ली भारत ने मुक्त अंतरिक्ष में क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन यानी QKD के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है. क्यूएनयू लैब्स, बीआईएसएजी-एन और आईआईटी गांधीनगर ने गांधीनगर परिसरों के बीच फील्ड ट्रायल पूरा किया. इस परीक्षण में 5.56 किलोमीटर की दूरी पर स्थिर क्वांटम बिट एरर रेट पांच प्रतिशत से कम…

भारत की बड़ी क्वांटम छलांग, 5.56 किमी दूरी तक सुरक्षित डेटा ट्रांसफर का बनाया रिकॉर्ड

 नई दिल्ली

भारत ने मुक्त अंतरिक्ष में क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन यानी QKD के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है. क्यूएनयू लैब्स, बीआईएसएजी-एन और आईआईटी गांधीनगर ने गांधीनगर परिसरों के बीच फील्ड ट्रायल पूरा किया. इस परीक्षण में 5.56 किलोमीटर की दूरी पर स्थिर क्वांटम बिट एरर रेट पांच प्रतिशत से कम रहा। 

ये Key बीआईएसएजी-एन के पोस्ट-क्वांटम प्लेटफॉर्म पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के लिए इस्तेमाल की गईं. इसमें क्वांटम हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों शामिल थे ताकि कम्यूनिकेशन अधिक मजबूत हो. डॉ. विनय ठाकुर और सुनील गुप्ता जैसे अधिकारियों ने इसे क्वांटम-प्रतिरोधी नेटवर्क और उपग्रह लिंक की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. यह दूरी भारत के पिछले फ्री-स्पेस रिकॉर्ड से दोगुनी है। 

क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन कैसे काम करता है
क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें जानकारी को क्वांटम कणों यानी फोटॉनों के जरिए भेजा जाता है. पारंपरिक तरीकों में हैकर्स बीच में बैठकर डेटा चुरा सकते हैं लेकिन क्वांटम सिस्टम में कोई भी छेड़छाड़ तुरंत पता चल जाती है क्योंकि क्वांटम अवस्था बदल जाती है। 

इस परीक्षण में फ्री-स्पेस यानी हवा के माध्यम से सिग्नल भेजा गया जो फाइबर ऑप्टिक केबल से अलग है. कम एरर रेट से साबित हुआ कि यह तकनीक व्यावहारिक परिस्थितियों में भी काम कर सकती है. पोस्ट-क्वांटम प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने से भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के हमलों से भी बचाव संभव होगा।  

सामान्य जीवन में इसका उपयोग और फायदे
सामान्य जीवन में यह तकनीक अभी सीधे घरों में नहीं आएगी लेकिन इसके प्रभाव धीरे-धीरे रोजमर्रा की सुरक्षा को मजबूत करेंगे. सबसे पहले बैंक और वित्तीय लेनदेन में इसका उपयोग हो सकता है. जब आप ऑनलाइन भुगतान करते हैं या नेट बैंकिंग करते हैं तो क्वांटम कुंजियां डेटा को इतना सुरक्षित बना देंगी कि कोई हैकर बीच में जानकारी नहीं चुरा सकेगा। 

सरकारी सेवाओं जैसे आधार, पासपोर्ट या डिजिटल प्रमाणपत्रों के आदान-प्रदान में भी यह सुरक्षा बढ़ाएगी. स्वास्थ्य क्षेत्र में मरीजों के निजी मेडिकल रिकॉर्ड को अस्पतालों और डॉक्टरों के बीच सुरक्षित तरीके से भेजने में मदद मिलेगी. मोबाइल ऐप और क्लाउड स्टोरेज में व्यक्तिगत तस्वीरें, संदेश और दस्तावेज ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। 

भविष्य में जब उपग्रह आधारित क्वांटम नेटवर्क बनेगा तो दूरदराज के इलाकों में भी सुरक्षित इंटरनेट और संचार संभव होगा. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में ट्रैफिक सिस्टम, बिजली ग्रिड और निगरानी कैमरों का डेटा हैकिंग से बचाया जा सकेगा. कुल मिलाकर यह तकनीक आम आदमी के डिजिटल जीवन को अधिक भरोसेमंद बनाएगी भले ही वह सीधे दिखाई न दे। 

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत भारत क्वांटम कंप्यूटिंग, संचार और सेंसिंग में आगे बढ़ना चाहता है. यह परीक्षण दिखाता है कि प्रयोगशाला से बाहर मैदान में भी तकनीक सफल हो सकती है. उपग्रह लिंक की बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में देश भर में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित संचार के लिए उपग्रह जरूरी होंगे। 

कम दूरी से शुरू करके धीरे-धीरे लंबी दूरी तय करने का यह तरीका सही दिशा में है. अधिकारियों की प्रशंसा से साफ है कि सरकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है. आने वाले वर्षों में ऐसे और परीक्षण होंगे जो व्यावसायिक उपयोग की ओर ले जाएंगे। 

यह उपलब्धि सिर्फ वैज्ञानिक सफलता नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है. क्वांटम तकनीक पारंपरिक एन्क्रिप्शन की कमजोरियों को दूर कर सकती है. सामान्य जीवन में इसके फायदे धीरे-धीरे बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी सेवाओं तक पहुंचेंगे. भारत जैसे देश के लिए जहां डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं यह सुरक्षा परत बहुत जरूरी है. कुल मिलाकर 5.56 किलोमीटर का यह रिकॉर्ड भविष्य के सुरक्षित संचार नेटवर्क की नींव रखता है। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports