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विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

भोपाल भारत के सार्वजनिक जीवन में कुछ यात्राएँ केवल राजनीतिक यात्रा नहीं होतीं, वे राष्ट्र-निर्माण की यात्रा बन जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष ऐसी ही एक प्रेरणादायी यात्रा का प्रतीक हैं। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी ने जिस जिम्मेदारी को स्वीकार…

विकसित भारत के संकल्प की अविराम यात्रा कृष्णा गौर

भोपाल

भारत के सार्वजनिक जीवन में कुछ यात्राएँ केवल राजनीतिक यात्रा नहीं होतीं, वे राष्ट्र-निर्माण की यात्रा बन जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष ऐसी ही एक प्रेरणादायी यात्रा का प्रतीक हैं।

7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी जी ने जिस जिम्मेदारी को स्वीकार किया था, वह आज 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की एक ऐतिहासिक यात्रा बन चुकी है। गुजरात से शुरू हुई यह यात्रा आज भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व में अग्रणी राष्ट्र बनाने के संकल्प तक पहुँच चुकी है।

इन 25 वर्षों को केवल सत्ता में निरंतरता के रूप में देखना इस यात्रा को सीमित कर देना होगा। वास्तव में यह नीति से नीयत, नीयत से परिणाम और परिणाम से जनविश्वास तक की यात्रा है।

गरीब के सम्मान से राष्ट्र के उत्थान तक

प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही है कि विकास को उन्होंने केवल बड़े शहरों और बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रखा। गरीब, किसान, महिला, युवा, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजातीय समाज और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना उनकी नीतियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

जनधन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन, उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओ के जीवन में सुविधा, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता को जन आंदोलन बनाना, प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को पक्का घर, आयुष्मान भारत के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा और पीएम-किसान के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष सहायता—इन पहलों ने शासन और सामान्य नागरिक के बीच संबंध को नए रूप में स्थापित किया है। यह परिवर्तन केवल योजनाओ की सूची नहीं है। यह उस सोच का परिणाम है जिसमें सरकार का अर्थ केवल प्रशासन नहीं, बल्कि जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन है।

महिला शक्ति को नेतृत्व की शक्ति बनाना

प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने नारी शक्ति को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों, उज्ज्वला, मुद्रा, जनधन और अन्य योजनाओ तक महिलाओ को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त करने का प्रयास हुआ है। आज देश की महिलाएँ राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, सेना, खेल, उद्यमिता और शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में भी एक नई दिशा का संकेत देते हैं।

एक महिला जनप्रतिनिधि के रूप में मैं मानती हूँ कि जब देश की आधी आबादी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है, तब पूरा देश आगे बढ़ता है।

पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण की दिशा में

मेरे लिए प्रधानमंत्री मोदी जी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक न्याय और अवसरों के विस्तार सेभी जुड़ा है। पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ना के वल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है; यह शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, कौशल, वित्तीय अवसर और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा व्यापक प्रश्न है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने वंचित वर्गों के लिए योजनाओ की पहुँच बढ़ाने, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को मजबूत करने और अवसरों को अधिक व्यापक बनाने पर जोर दिया है। यही सोच ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के भाव को मजबूत करती है। मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण के दायित्व से जुड़े होने के कारण मैं विशेष रूप से महसूस करती हूँ कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओ का लाभ पहुँचाना ही सुशासन की वास्तविक कसौटी है।

डिजिटल भारत और बदलता हुआ शासन

पिछले 25 वर्षों की एक बड़ी उपलब्धि भारत के शासन तंत्र में तकनीक का व्यापक समावेश भी है। आज डिजिटल भुगतान, आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और ऑनलाइन सेवाओ ने नागरिक और सरकार के बीच की दूरी को कम किया है। भारत ने यह दिखाया है कि तकनीक के वल आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि पारदर्शिता, गति और समावेशन का माध्यम भी बन सकती है। भारत की डिजिटल क्षमता ने विश्व के सामने एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है और अनेक क्षेत्रों में भारत आज समाधान देनेवालेदेशों मेंशामिल हो रहा है।

आत्मनिर्भर भारत सेविकसित भारत तक

प्रधानमंत्री मोदी जी की सोच में भारत के वल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एक मजबूत उत्पादन, नवाचार और आत्मनिर्भरता वाला राष्ट्र है।

‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक क्षमता को नई गति देने का प्रयास किया है।

आज भारत की आकांक्षा के वल वर्तमान को बेहतर बनाने की नहीं, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की है। यह लक्ष्य के वल सरकार का लक्ष्य नहीं हो सकता; यह 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक भागीदारी सेही पूरा होगा।

विश्व पटल पर नए आत्मविश्वास का भारत

प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति में भी आत्मविश्वास और सक्रियता दिखाई देती है। भारत ने वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से रखने का प्रयास किया है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक दक्षिण की चिंताओ को सामने रखना, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, आपदा के समय सहायता और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका इस परिवर्तन को दर्शाती है। भारत आज विश्व व्यवस्था में केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्णऔर प्रभावशाली भागीदार के रूप मेंअपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है।

25 वर्ष हमें क्या सिखाते हैं?

श्री नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की यात्रा हमें यह सिखाती है कि नेतृत्व केवल पद प्राप्त करने का नाम नहीं है। नेतृत्व का वास्तविक अर्थ है—दृष्टि रखना, कठिन निर्णय लेने का साहस रखना और उन निर्णयों को परिणाम में बदलने के लिए निरंतर परिश्रम करना। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक की यह यात्रा निरंतर जनसेवा की यात्रा रही है। आज जब हम इन 25 वर्षों को देखते हैं, तो यह केवल अतीत का मूल्यांकन करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाले भारत की दिशा तय करने का अवसर भी है।

विकसित भारत के संकल्प के साथ

आज इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं प्रधानमंत्री मोदी जी को 25 वर्षों की निरंतर जनसेवा के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देती हूँ। एक जनप्रतिनिधि और मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में मेरा विश्वास है कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि नए भारत की कार्य संस्कृति है।

हमारा संकल्प है कि समाज के प्रत्येक वर्ग—विशेषकर गरीब, पिछड़े, वंचित, महिलाएँ, युवा और अल्पसंख्यक को विकास की मुख्य धारा से जोड़ते हुए एक ऐसा भारत बनाया जाए जहाँ अवसर सबके लिए हों और सम्मान प्रत्येक नागरिक का अधिकार हो। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में पिछले 25 वर्षों ने भारत को नई आकांक्षा, नया आत्मविश्वास और नई दिशा दी है। अब अगला लक्ष्य और भी बड़ा है—

2047 का विकसित भारत।

आइए, इस अमृत संकल्प की यात्रा में हम सभी अपनी भूमिका निभाएँ और एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें जो समृद्ध भी हो, सशक्त भी हो, आत्म निर्भर भी हो और अपनी महान सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने वाला विश्वगुरु भारत भी हो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जनसेवा के 25 गौरवपूर्ण वर्षों की हार्दिक बधाई।

 

 

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