जयपुर
पशुपालन, गोपालन एवं मत्स्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने मंगलवार को राजस्थान संपर्क 181 हेल्पलाइन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने हेल्पलाइन पर प्राप्त परिवादों, उनके निस्तारण की प्रगति तथा विभागीय कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को लंबित परिवादों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण करने तथा परिवादियों को अधिकतम राहत उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।
भाले ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद में परिवाद दर्ज करवाता है। कई बार परिवाद दर्ज करवाना उसके लिए अंतिम विकल्प होता है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रत्येक परिवाद को गंभीरता से लेते हुए उसका समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य विभागों अथवा अधिकारियों के स्तर पर कार्रवाई अपेक्षित होने पर संबंधित परिवादों को बिना विलंब उचित स्तर पर प्रेषित किया जाए, ताकि उनके निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो।
निरीक्षण के दौरान भाले ने चूरू जिले के भूराराम के दुग्ध वाहन के लंबित भुगतान तथा पाली जिले के गुलाबचंद की अनुदान राशि के लंबित भुगतान की समस्या को सुना एवं संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही करते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में उन्होंने डीग जिले के आबिद से मत्स्य पालन प्रशिक्षण की समस्या की जानकारी ली तथा उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध करवाने के लिए आश्वस्त किया। वहीं, बाड़मेर जिले के महिपाल एवं मोतीलाल से गोवंश के लिए चारा-पानी की व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेते हुए इनके समाधान के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान भाले ने राजस्थान संपर्क एआई की कार्यप्रणाली एवं उसके उपयोग की विस्तृत जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि संपर्क एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि परिवादों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक सुगम एवं तेज बनाया जा सके।
1962 हेल्पलाइन से घर पर उपलब्ध हो रही पशु चिकित्सा सेवा
इस अवसर पर उन्होंने परिवादियों को 1962 हेल्पलाइन के विषय में जागरूक करते हुए कहा कि बीमार एवं जरूरतमंद पशुओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाना विभाग की प्राथमिकता है। पशुपालक हेल्पलाइन नंबर 1962 पर कॉल करके मोबाइल वेटरनरी वैन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इस सेवा के माध्यम से पशुपालकों के घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाकर बीमार पशुओं को समय पर उपचार एवं राहत प्रदान की जा रही है।
















