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इंदौर DAVV में गर्भ संस्कार की ट्रेनिंग, योग से लेकर भ्रूण विकास तक की मिलेगी शिक्षा

इंदौर  गर्भावस्था के दौरान मां का स्वास्थ्य अच्छा रहे और बच्चे का जन्म सुरक्षित तरीके से हो, इसके लिए सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, तनाव प्रबंधन और सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों की अहम भूमिका होती है। इन्हीं पहलुओं को अब विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाने की तैयारी। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन के स्कूल…

इंदौर DAVV में गर्भ संस्कार की ट्रेनिंग, योग से लेकर भ्रूण विकास तक की मिलेगी शिक्षा

इंदौर 

गर्भावस्था के दौरान मां का स्वास्थ्य अच्छा रहे और बच्चे का जन्म सुरक्षित तरीके से हो, इसके लिए सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच, तनाव प्रबंधन और सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों की अहम भूमिका होती है। इन्हीं पहलुओं को अब विश्वविद्यालय स्तर पर पढ़ाने की तैयारी। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन के स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार पर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाएगा।

गर्भ संस्कार पर केंद्रित यह अपनी तरह का पहला कोर्स होगा। जुलाई 2026-27 सत्र से इसे शुरू करने की योजना है। पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को प्रवेश देने का प्रस्ताव है।

इस पाठ्यक्रम में भारतीय परंपरा में प्रचलित गर्भ संस्कार की अवधारणा को आधुनिक गर्भावस्था देखभाल से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

विद्यार्थियों को गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिला के शरीर में होने वाले बदलावों, भ्रूण के विकास, संतुलित पोषण, योग, प्राणायाम, ध्यान और मां तथा गर्भस्थ शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे।

इसके साथ ही गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की जानकारी भी दी जाएगी। कोर्स में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण की योजना भी है।

जुलाई से नए सत्र में शुरू करने की तैयारी
DAVV के स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार के पीजी डिप्लोमा के साथ तीन सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू करने की योजना है। इनमें योग एवं पोषण, योग एवं नेचुरोपैथी तथा योग एवं एक्यूप्रेशर शामिल हैं।

इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से योग, स्वास्थ्य, पोषण और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों से जुड़े विषयों की बुनियादी जानकारी दी जाएगी।

आयुर्वेद की अवधारणाओं के साथ आधुनिक भ्रूण विज्ञान का अध्ययन
स्कूल ऑफ योगा की एचओडी एवं प्रोफेसर सुंधीरा चंदेल ने बताया कि भारतीय परंपरा में गर्भ संस्कार को गर्भस्थ शिशु के विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करने की अवधारणा के रूप में देखा जाता है।

इसमें सकारात्मक विचारों, संगीत, संवाद, संतुलित भोजन और मां के भावनात्मक स्वास्थ्य को महत्व दिया जाता है। पाठ्यक्रम में गर्भ संस्कार के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पक्षों के साथ आधुनिक भ्रूण विकास से जुड़ी जानकारी भी शामिल होगी।

पाठ्यक्रम के तहत आयुर्वेद में वर्णित महीनेवार गर्भ विकास की अवधारणाओं और आधुनिक भ्रूण विज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन कराया जाएगा।

विद्यार्थियों को महिला और पुरुष प्रजनन तंत्र की संरचना, गर्भधारण की प्रक्रिया तथा प्रजनन से जुड़े हार्मोन की भूमिका के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा गर्भावस्था में हृदय और रक्त संचार तंत्र, श्वसन तंत्र, गुर्दों, पाचन तंत्र, मांसपेशियों, हड्डियों और मेटाबॉलिज्म में होने वाले बदलावों को भी समझाया जाएगा।

तीनों ट्राइमेस्टर के अनुसार सिखाए जाएंगे योगाभ्यास
गर्भावस्था के दौरान महिला की शारीरिक जरूरतें समय के साथ बदलती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम में पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुसार योगाभ्यास में जरूरी बदलाव करना सिखाया जाएगा।

पहले ट्राइमेस्टर में हल्के व्यायाम और जोड़ों की गतिशीलता से जुड़े अभ्यासों की जानकारी दी जाएगी। दूसरे ट्राइमेस्टर में शरीर का संतुलन बनाए रखने, कमर को सहारा देने और आरामदायक मुद्राओं पर जोर रहेगा। तीसरे ट्राइमेस्टर में तकिए, कुर्सी और अन्य सहायक साधनों की मदद से संशोधित योगाभ्यास की जानकारी दी जाएगी।

इसके साथ अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग, ध्यान और योग निद्रा जैसे विषय भी शामिल होंगे। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, श्वसन और विश्राम तकनीकों की समझ देना है। गर्भावस्था में किसी भी योग या शारीरिक गतिविधि का चयन महिला की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी होगा।

अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ मिलेगा व्यावहारिक अनुभव
प्रस्तावित पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण भी शामिल है। योजना के अनुसार, विद्यार्थियों को अस्पतालों में जाकर चिकित्सकों के साथ काम करने का अवसर दिया जाएगा।

इससे वे गर्भावस्था के दौरान होने वाले सामान्य शारीरिक बदलावों, पोषण की जरूरतों, सुरक्षित गतिविधियों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक संदर्भ में समझ सकेंगे।

डॉक्टरों के साथ संवाद के जरिए यह जानने में भी मदद मिलेगी कि किन परिस्थितियों में गर्भवती महिला को विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की जरूरत होती है।

इन पाठ्यक्रमों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को व्यवस्थित शैक्षणिक स्वरूप देने की कोशिश की जाएगी।

गर्भ संस्कार का कोर्स इसी दिशा में एक पहल है, जिसमें पारंपरिक अवधारणाओं के साथ आधुनिक भ्रूण विज्ञान, पोषण, योग और गर्भावस्था देखभाल से संबंधित विषयों को शामिल किया जाएगा।

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