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इंदौर में सेमी कंडक्टर, फोटोनिक्स, क्वांटम तकनीक और एमएसएमई सशक्तिकरण पर राउंड टेबल बैठकों का हुआ आयोजन

भोपाल  मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स, क्वांटम तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 के द्वितीय दिवस 2 राउंडटेबल बैठकों का आयोजन किया गया। इन राउंडटेबल बैठकों में प्रमुख उद्योगपतियों और विशेषज्ञों ने प्रदेश में इन…

इंदौर में सेमी कंडक्टर, फोटोनिक्स, क्वांटम तकनीक और एमएसएमई सशक्तिकरण पर राउंड टेबल बैठकों का हुआ आयोजन

भोपाल 

मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर, फोटोनिक्स, क्वांटम तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 के द्वितीय दिवस 2 राउंडटेबल बैठकों का आयोजन किया गया। इन राउंडटेबल बैठकों में प्रमुख उद्योगपतियों और विशेषज्ञों ने प्रदेश में इन तकनीकों के लिए बेहतर इकोसिस्टम विकसित करने तथा स्वदेशी तकनीक एवं उत्पादों के विकास पर अपने विचार रखे।

प्रथम राउंडटेबल बैठक : अनुसंधान, नवाचार और युवाओं के कौशल विकास पर जोर

एमपीएसईडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर अंशुमन राज ने राउंडटेबल की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चर्चा का उद्देश्य उद्योगों की जरूरतों को समझना तथा शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के माध्यम से आवश्यक सहयोग, सुविधाएँ एवं संसाधन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार करना है।

आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर शीलेन्द्र कुमार ने मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति के संदर्भ में इन क्षेत्रों के विकास की संभावनाएँ बताईं। उन्होंने उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों एवं सरकार के बीच समन्वय, स्वदेशी तकनीकों के विकास, अनुसंधान को व्यावहारिक उत्पादों में बदलने तथा प्रशिक्षण के संबंध में विचार रखे।

आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर मुकेश कुमार ने ओपन सेशन में प्रतिभागियों से स्थानीय तकनीकी क्षमताओं के विकास, प्रशिक्षण, समन्वय एवं सहयोग पर सुझाव आमंत्रित किए।

स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और प्रशिक्षण को मिले प्राथमिकता

चर्चा में आईटीआई, पॉलिटेक्निक एवं विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को सेमीकंडक्टर उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर विचार किया गया। इंजीनियरिंग शिक्षा के साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग, सिग्नल मापन, परीक्षण और पैकेजिंग जैसे व्यावहारिक कौशल विकसित करने के संबंध में भी सुझाव रखे गए।

 मध्यप्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप बने रणनीति

राउंडटेबल में प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकताएँ निर्धारित करने, विशेषज्ञ कार्यबल विकसित करने तथा स्टार्टअप्स को कुशल मानव संसाधन, तकनीकी सुविधाएँ एवं अनुसंधान सहयोग उपलब्ध कराने पर विचार किया गया। रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान परियोजनाएँ विकसित करने और संस्थानों को आवश्यक उपकरण एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।

द्वितीय राउंडटेबल सम्मेलन : मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और लघु एवं मध्यम उद्योगों के सशक्तिकरण पर मंथन

मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को सशक्त करने तथा राज्य को सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग का एक प्रमुख केंद्र बनाने के उद्देश्य से द्वितीय राउंडटेबल चर्चा सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के सचिव जॉन किंग्सले ने की। चर्चा में प्रमुख उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की।

चर्चा के दौरान राज्य में एक सशक्त सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें चिप पैकेजिंग, टेस्टिंग, स्पेशलिटी केमिकल्स, औद्योगिक गैसों और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का स्थानीय स्तर पर विनिर्माण शामिल है। प्रतिभागियों ने एमएसएमई की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उन्नत तकनीकों, वित्तीय सहायता और बाजार के नए अवसरों तक सुलभ पहुंच की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, एमएसएमई के परिचालन खर्च को घटाने और गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए साझा परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाओं की स्थापना को प्राथमिक कदम माना गया।

उद्योगों के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने के उद्देश्य से आईआईटी इंदौर और अन्य प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों के सहयोग से विशेष कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति बनी। इसके तहत मल्टीलेयर पीसीबी विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। मध्यप्रदेश में एक टिकाऊ सेमि-कंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए सरकार, उद्योग, एमएसएमई और शैक्षणिक संस्थानों का एक साथ आना अत्यंत आवश्यक है। तकनीकी दक्षताओं, औद्योगिक अधोसंरचना, वित्तीय सुलभता और बाजार तंत्र को सुदृढ़ करके न केवल एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और युवाओं के लिए नए व कुशल रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

 

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