जयपुर
राजस्थान में प्रशासनिक तंत्र को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लगाने के मकसद से राज्य सरकार ने एक सख्त और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर अमल करते हुए राज्य के विभिन्न विभागों में पदस्थापित और तत्कालीन 27 अधिकारियों के खिलाफ कुल 21 अलग-अलग भ्रष्टाचार के प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री के इस कड़े फैसले के बाद अब इन आरोपी अधिकारियों के खिलाफ अदालत में मुकदमे चलाने और कानूनी शिकंजा कसने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
प्रशासनिक महकमे में लंबे समय से लंबित पड़े इन घोटालों और रिश्वतखोरी के मामलों में मुख्यमंत्री स्तर से मिली इस हरी झंडी के बाद हड़कंप मच गया है। सरकार की इस बड़ी कार्रवाई के दायरे में प्रशासनिक सेवा के 2 उपखंड अधिकारी (SDM), 1 पुलिस उपअधीक्षक (DSP), राजस्थान लेखा सेवा (ALS) के 1 अधिकारी, 1 विकास अधिकारी (BDO) और 8 अलग-अलग प्रमुख राज्य विभागों में तैनात 15 अन्य अधिकारी शामिल हैं।
कृषि भूमि रूपांतरण और अवैध खातेदारी में फँसे 2 SDM
राज्य सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार, भू-राजस्व मामलों और जमीनों के फर्जीवाड़े में शामिल रहे 2 वरिष्ठ उपखंड अधिकारियों (SDM) के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी गई है। पहला मामला कृषि भूमि का अकृषि प्रयोजन के लिए नियम विरुद्ध नियमन और भू-उपयोग परिवर्तन करने से जुड़ा है। इसमें अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी स्वार्थ के लिए भूमि का रूपांतरण कर दिया, जिससे राज्य सरकार के राजस्व को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा था।
वहीं दूसरा मामला अपने पद का गलत इस्तेमाल कर नियम विरुद्ध तरीके से खातेदारी भूमि का दावा डिक्री करवाने और इसके बदले में अवैध परितोषण (रिश्वत) प्राप्त करने से संबंधित है। इस मामले में भी संबंधित तत्कालीन उपखंड अधिकारी के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई है।
डीएसपी, लेखा सेवा अधिकारी और विकास अधिकारी भी दायरे में
ख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सिर्फ राजस्व ही नहीं बल्कि पुलिस और विकास प्रशासन से जुड़े गंभीर मामलों में भी कोई ढील नहीं दी है। भ्रष्टाचार की गतिविधियों में लिप्त रहने, पद के प्रभाव से अवैध राशि वसूलने और ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्तियां अर्जित करने के मामले में तत्कालीन पुलिस उपअधीक्षक (DSP) के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का अनुमोदन किया गया है।
इसके साथ ही सरकारी धन के वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में राजस्थान लेखा सेवा के 1 वरिष्ठ अधिकारी तथा ग्रामीण विकास से जुड़े 1 विकास अधिकारी (BDO) के खिलाफ भी अभियोजन स्वीकृति का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
इन 8 प्रमुख विभागों के 15 अन्य मामलों में भी सख्त निर्णय
विभिन्न जनहित विभागों में जनता को परेशान करने और वित्तीय अनियमितता बरतने वाले अधिकारियों पर भी मुख्यमंत्री का हंटर चला है। मुख्यमंत्री ने कुल 8 अलग-अलग विभागों के 15 प्रकरणों में अभियोजन स्वीकृति जारी की है-
कृषि एवं उद्यानिकी विभाग: 5 प्रकरण
सार्वजनिक निर्माण विभाग: 3 प्रकरण
वाणिज्यिक कर विभाग: 2 प्रकरण
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग: 1 प्रकरण
पशु चिकित्सा विभाग: 1 प्रकरण
इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP): 1 प्रकरण
'जीरो टॉलरेंस' नीति – प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से 23 अक्टूबर 2026 की देर रात जारी इस आदेश के बाद राजस्थान के प्रशासनिक और पुलिस हलके में खलबली मची हुई है। सरकार के अधिकारियों का कहना है कि आम जनता की सुनवाई सुनिश्चित करने और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए यह आवश्यक था कि भ्रष्टाचार में लिप्त बड़े से बड़े अधिकारी पर भी बिना किसी दबाव के सीधी कार्रवाई की जाए।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा जांच पूरी किए जाने के बाद काफी समय से फाइलें अभियोजन स्वीकृति का इंतजार कर रही थीं। अब मंजूरी मिलने के बाद संबंधित अदालतों में जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी और आगे की अदालती कार्यवाही शुरू होगी।
















