महिला वकीलों को मिलेगी बड़ी सुविधा, देशभर की अदालतों में अलग टॉयलेट और बार रूम बनाने की तैयारी

 नई दिल्ली न्याय की चौखट पर जाकर दूसरों को हक दिलाने वाली महिला वकीलों के लिए खुद अदालतों के भीतर बुनियादी सुविधाएं न होना एक गंभीर और कड़वी हकीकत है. इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों…

महिला वकीलों को मिलेगी बड़ी सुविधा, देशभर की अदालतों में अलग टॉयलेट और बार रूम बनाने की तैयारी

 नई दिल्ली

न्याय की चौखट पर जाकर दूसरों को हक दिलाने वाली महिला वकीलों के लिए खुद अदालतों के भीतर बुनियादी सुविधाएं न होना एक गंभीर और कड़वी हकीकत है. इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हाई कोर्ट्स को सख्त आदेश दिया है कि देश की हर एक अदालत में महिलाओं के लिए अलग और सुरक्षित बार रूम और टॉयलेट बनाए जाएं।  

CJI ने साफ शब्दों में कहा, 'महिलाओं के लिए बुनियादी ढांचा और सुविधाएं न होने का कोई भी बहाना या औचित्य स्वीकार नहीं किया जा सकता. बार के सभी सदस्यों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्यों और हाई कोर्ट्स की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। 

सुप्रीम कोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

सुनवाई के दौरान एमिकस ने कोर्ट को बताया कि राज्यों द्वारा दाखिल किए गए 16-17 हलफनामों में यह बात सामने आई है कि महिला वकीलों के लिए अदालतों में टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नाममात्र की हैं या हैं ही नहीं:   

हरियाणा: राज्य ने अभी तक इस संबंध में कोई निरीक्षण तक नहीं किया है.   

पंजाब: राज्य के 67 जिला अदालत परिसरों में से केवल 9 अदालतों में महिला वकीलों के लिए वॉशरूम उपलब्ध हैं। 

कोलकाता: काउंसलिंग के दौरान एडवोकेट मनिका ने ध्यान दिलाया कि कोलकाता जैसी जगह की अदालतों में भी महिला वकीलों के लिए टॉयलेट उपलब्ध नहीं हैं। 

सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े और सख्त निर्देश
1. अलग और एक्सक्लूसिव सुविधाएं: जिला अदालतों, सब-डिविजनल और तालुका कोर्ट में जहां भी महिला वकील प्रैक्टिस करती हैं, वहां उनके लिए अलग और एक्सक्लूसिव 'वीमेन बार रूम' और वॉशरूम का निर्माण किया जाए। 

2. फंड और जमीन का आवंटन: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे इसके लिए तुरंत आवश्यक फंड और जरूरत पड़ने पर जमीन आवंटित करें। 

3. हाई कोर्ट की बिल्डिंग कमेटी को प्राथमिकता: सभी हाई कोर्ट्स की बिल्डिंग कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस काम को पहली प्राथमिकता पर लें और अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय को नियमित प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपें। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में एक जैसा पैटर्न हो, महिलाओं के लिए बनने वाले टॉयलेट्स और सुविधाओं का डिजाइन व पैटर्न सभी राज्यों और जिलों में एक समान होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर तय की है, जहां सभी राज्यों को अपनी कम्प्लायंस (अनुपालन) रिपोर्ट पेश करनी होगी. यह आदेश देश की न्याय प्रणाली में काम कर रही हजारों महिला वकीलों के लिए एक बड़ी राहत और उनके सम्मान की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed