महंगाई का डबल झटका! रोजमर्रा का सामान महंगा होने की आशंका, मोबाइल रिचार्ज में 15% तक बढ़ोतरी का अनुमान

FMCG Price Hike: आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है। घर-परिवार में रोज इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे साबुन, टूथपेस्ट, बिस्किट, चॉकलेट, खाने का तेल और चाय आने वाले दिनों में और महंगी हो सकती हैं। बाजार के जानकारों और रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार रोजमर्रा का सामान बनाने…

महंगाई का डबल झटका! रोजमर्रा का सामान महंगा होने की आशंका, मोबाइल रिचार्ज में 15% तक बढ़ोतरी का अनुमान

FMCG Price Hike: आम आदमी की जेब पर एक बार फिर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है। घर-परिवार में रोज इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे साबुन, टूथपेस्ट, बिस्किट, चॉकलेट, खाने का तेल और चाय आने वाले दिनों में और महंगी हो सकती हैं। बाजार के जानकारों और रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार रोजमर्रा का सामान बनाने वाली कंपनियों के लिए कच्चा माल खरीदना काफी महंगा हो गया है। लागत में हुए इस भारी इजाफे के बाद कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का मन बना रही हैं, जिसका सीधा असर ग्राहकों के महीने के बजट पर पड़ सकता है।

कच्चा माल इतना महंगा क्यों हुआ
इस पूरी बढ़ोतरी (FMCG Price Hike) की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव का करीब 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाना और माल की आवाजाही में आ रही रुकावटें हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो कच्चे तेल से तैयार होने वाला माल पिछले साल के मुकाबले 74 फीसदी तक महंगा हो चुका है। पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक रेजिन 60 फीसदी चढ़ गया है, जबकि चॉकलेट बनाने में काम आने वाला कोको 46 फीसदी महंगा हो गया है। इसके अलावा सामान ढोने वाले ट्रकों का भाड़ा 13 फीसदी, थोक चीनी करीब 13 फीसदी, पाम तेल 10 फीसदी और आम खाद्य तेल 9 फीसदी से ज्यादा महंगे हो चुके हैं। चाय, दूध और मक्के के भाव में भी बढ़त दर्ज की गई है

कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा क्या विकल्प ?

  • कंपनियां अब तक अपने पुराने बचे हुए स्टॉक की मदद से काम चला रही थीं, जिससे बाजार में कीमतें थमी हुई थीं। अब जैसे-जैसे पुराना माल खत्म हो रहा है, कंपनियों को नई और महंगी दरों पर कच्चा माल लेना पड़ रहा है।
  • त्योहारों के दौरान मांग बनाए रखना भी उनके लिए जरूरी है। ऐसे में कुछ कंपनियां उत्पादन और पैकेजिंग की लागत कम करने की कोशिश कर रही हैं।
  • छोटे पैकेट में सामान की मात्रा कम करना भी इसी रणनीति का हिस्सा है। इससे कंपनियां पैकेट पर लिखी कीमत को पहले जैसा रख सकती हैं, लेकिन ग्राहकों को उसी कीमत में पहले से कम सामान मिल सकता है।
  • इसके साथ ही कमजोर मॉनसून के चलते ग्रामीण इलाकों में खरीदारी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है, जिससे कंपनियों की कमाई और मुनाफे पर एक से डेढ़ फीसदी तक का दबाव आ सकता है।
  • हालांकि शहरों में त्योहारों के कारण मांग अभी बनी हुई है, लेकिन बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।

मोबाइल रिचार्ज भी हो सकता है महंगा?
सिर्फ खाने-पीने और नहाने-धोने का सामान ही नहीं, बल्कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी आने वाले दिनों में जेब पर भारी पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक टेलीकॉम कंपनियां इस साल के अंत तक अपने रिचार्ज प्लान में 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इतना ही नहीं, आने वाले वर्षों में भी हर दो साल के अंतराल पर मोबाइल सेवाओं के दाम करीब 12 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान जताया गया है।

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