,

अंग्रेजी के अंकों पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल, 10वीं की छात्रा को बाकी विषयों में 75 से ज्यादा अंक

जबलपुर एमपी बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा में सभी विषयों में डिस्टिंक्शन (75% से अधिक अंक) हासिल करने वाली छात्रा को अंग्रेजी में केवल 39 अंक देने के मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं), भोपाल को संबंधित मूल्यांकनकर्ता से स्पष्टीकरण…

अंग्रेजी के अंकों पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल, 10वीं की छात्रा को बाकी विषयों में 75 से ज्यादा अंक

जबलपुर

एमपी बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा में सभी विषयों में डिस्टिंक्शन (75% से अधिक अंक) हासिल करने वाली छात्रा को अंग्रेजी में केवल 39 अंक देने के मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं), भोपाल को संबंधित मूल्यांकनकर्ता से स्पष्टीकरण लेकर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी।
छात्रा ने उत्तरपुस्तिका प्राप्त कर हाई कोर्ट में चुनौती दी

जबलपुर के सिहोरा निवासी गौरवी गर्ग ने वर्ष 2023 में दसवीं की परीक्षा दी थी। अन्य विषयों में डिस्टिंक्शन के बावजूद अंग्रेजी में उसे 39 अंक मिले। पुनर्मूल्यांकन के आवेदन पर भी अंक नहीं बदले, तो छात्रा ने उत्तरपुस्तिका प्राप्त कर हाई कोर्ट में चुनौती दी।

याचिका में कहा गया कि कई प्रश्नों के सही उत्तर लिखने के बावजूद उसे शून्य अंक दिए गए। आठ अक्टूबर 2026 को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने छात्रा की उत्तरपुस्तिका का शीर्ष छात्रों की कापियों से मिलान कराया।

कई उत्तर मिलते-जुलते या बेहतर थे, फिर भी शून्य अंक

उपलब्ध विवरण के अनुसार, कई उत्तर उनसे मिलते-जुलते या बेहतर थे, फिर भी शून्य अंक दिए गए। कोर्ट ने उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन दो स्वतंत्र परीक्षकों से कराने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में पहले परीक्षक ने 39 के बजाय 49 और दूसरे ने 69 अंक देने की सिफारिश की।

संबंधित मूल्यांकनकर्ता का स्पष्टीकरण मांगा

कोर्ट ने मूल्यांकन में गंभीर विसंगति पर सवाल उठाते हुए संबंधित मूल्यांकनकर्ता का स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही सही उत्तरों पर शून्य अंक दिए जाने को अदालत ने घोर लापरवाही या बाहरी पूर्वाग्रह की आशंका पर जवाब मांगा है।

माशिमं की ओर से इस दौरान प्रियांशु इंदुरखिया बनाम मध्य प्रदेश राज्य प्रकरण का हवाला देकर दलील दी गई कि घोर लापरवाही या दुर्भावना के आधार के बिना केवल मूल्यांकन संबंधी मतभेद पर पुनर्मूल्यांकन का आदेश नहीं दिया जा सकता।

 

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports