बाल विवाह के खिलाफ गुजरात में जागरूकता अभियान शुरू, गांव-गांव जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक

गांधीनगर  गुजरात के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा और महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील ने गांधीनगर में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यूएन ने 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय ‘बाल विवाह उन्मूलन दिवस घोषित किया। यह रथ पूरे…

बाल विवाह के खिलाफ गुजरात में जागरूकता अभियान शुरू, गांव-गांव जाकर लोगों को किया जाएगा जागरूक

गांधीनगर

 गुजरात के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा और महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील ने गांधीनगर में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यूएन ने 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय ‘बाल विवाह उन्मूलन दिवस घोषित किया।

यह रथ पूरे राज्य में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देगा। उपस्थित लोगों ने शपथ लेकर 2030 तक गुजरात को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया। रथ की शुरुआत केंद्र सरकार के बाल विवाह के खिलाफ 100 दिवसीय जागरूकता अभियान को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठाबेन वी गज्जर भी मौजूद थीं। उनके साथ जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत और राष्ट्रीय सचिव मनीष शर्मा भी उपस्थित थे। जेआरसी बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने वाला नागरिक समाज संगठनों का भारत का सबसे बड़ा नेटवर्क है। जेआरसी देशभर के 782 जिलों में 300 से अधिक सहयोगी संगठनों के साथ काम कर रहा है। गुजरात में संगठन छह सहयोगियों के साथ राज्य के सभी 34 जिलों में सक्रिय है।

गांधीनगर के टाउनहॉल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दोनों मंत्रियों डॉ. प्रद्युम्न वाजा और डॉ. मनीषा वकील ने हरी झंडी दिखाकर बाल विवाह मुक्ति रथ को रवाना किया। गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने यहां ‘बाल सुरक्षा सेवा संकल्प’ कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें सरकारी अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और अन्य संबंधित पक्षों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में बाल अधिकारों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई।

‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ जागरूकता फैलाने के लिए एक पहल है, जो राज्य के कोने-कोने तक पहुंचकर लोगों को बाल विवाह जैसे अपराध के खिलाफ बने कानूनों की जानकारी देगा। रथ पर बाल विवाह के विरोध में प्रभावशाली संदेशों वाले पोस्टर लगाए गए हैं। साथ ही लाउडस्पीकर के जरिए भी लोगों तक जागरूकता संदेश पहुंचाए जाएंगे। ताकि बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसे रोकने के कानूनी प्रावधानों के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जानकारी मिल सके।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठा बेन ने कार्यक्रम में मौजूद 1,500 लोगों को शपथ दिलाई कि वे चाइल्ड ट्रैफिकिंग, बाल विवाह, बच्चों के शोषण और बाल मजदूरी के खिलाफ काम करेंगे। सभी ने संकल्प लिया कि हर बच्चे को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के साथ उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि बच्चों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत ने इस अवसर पर कहा, “गुजरात की इस पावन धरती से, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि है, हम आज एक ऐतिहासिक संकल्प लेने के लिए एकत्र हुए हैं। हमारा संकल्प बाल विवाह को समाप्त करना है, ताकि हर बच्चे को अपना बचपन जीने, शिक्षा हासिल करने और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार मिल सके। गुजरात ने देश के सामने कई मिसालें पेश की हैं।

अब समय आ गया है कि बाल विवाह के खिलाफ देश की लड़ाई में भी गुजरात नेतृत्व करे। हमारा संकल्प है कि इस दिशा में पहला बड़ा पड़ाव बाल विवाह मुक्त गुजरात का निर्माण हो। गुजरात भारत का पहला ऐसा राज्य बने जो बाल विवाह से पूरी तरह मुक्त हो और एक बार फिर पूरे देश और दुनिया के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करे।”

रविकांत ने कहा कि गुजरात का इतिहास इस बात का साक्षी है कि इस धरती पर लिया गया संकल्प महज शब्दों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह कार्रवाई और उपलब्धि में बदलता है। यह महात्मा गांधी जैसे महान विभूतियों की धरती है, जिन्होंने अपने अटूट संकल्प से यह साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने कुछ भी असंभव नहीं है।

भारत सरकार ने 27 नवंबर 2024 को ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की शुरुआत की थी। इसी वर्ष सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया।

भारत के प्रयासों के परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस उपलब्धि को जन आंदोलन का रूप देने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में 100 दिवसीय अभियान शुरू किया है। इसके तहत आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता, शैक्षणिक संस्थान, ग्राम पंचायतें, पुलिस और अन्य संबंधित पक्ष मिलकर बाल विवाह के खिलाफ लोगों को जागरूक करेंगे।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed