,

मध्यप्रदेश में आसान होंगे भवन निर्माण के नियम, लोग खुद बना सकेंगे मकान का नक्शा; FAR में भी मिलेगी बड़ी राहत

भोपाल  मध्यप्रदेश के जिन शहरों में अब तक मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया है, वहां भी अब भवन निर्माण की राह आसान होने जा रही है। सरकार भूमि विकास नियमों में बड़े बदलाव कर रही है। नए नियम इतने सरल बनाए जा रहे हैं कि आम नागरिक को अपना मकान बनाने के लिए आर्किटेक्ट…

मध्यप्रदेश में आसान होंगे भवन निर्माण के नियम, लोग खुद बना सकेंगे मकान का नक्शा; FAR में भी मिलेगी बड़ी राहत

भोपाल 

मध्यप्रदेश के जिन शहरों में अब तक मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया है, वहां भी अब भवन निर्माण की राह आसान होने जा रही है। सरकार भूमि विकास नियमों में बड़े बदलाव कर रही है। नए नियम इतने सरल बनाए जा रहे हैं कि आम नागरिक को अपना मकान बनाने के लिए आर्किटेक्ट या कंसल्टेंट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वह खुद नियमों को समझकर भवन का नक्शा और निर्माण की योजना तैयार कर सकेगा। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में अनलिमिटेड एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) देने का प्रावधान भी किया जा रहा है। इससे छोटे शहरों में भी बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का रास्ता खुलेगा।

सरकार वर्ष 2012 में बने भूमि विकास नियमों में व्यापक संशोधन कर रही है। संशोधित नियमों का ड्राफ्ट गुरुवार को इंदौर में आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जारी कर सकते हैं। इसके बाद आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से एक महीने तक सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। सुनवाई के बाद नियमों को अंतिम रूप देकर लागू करेंगे।

50 से अधिक संशोधनों को एक जगह समेटेंगे
भूमि विकास नियम उन शहरों में भवन निर्माण के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं, जहां मास्टर प्लान लागू नहीं है। ऐसे शहरों में भवन की ऊंचाई, निर्माण क्षेत्र, खुली जगह, हरियाली और जमीन के उपयोग से जुड़े प्रावधान इन्हीं नियमों से तय होते हैं। अभी इन नियमों में 50 से अधिक बार संशोधन हो चुके हैं। इसके कारण आम नागरिकों के लिए इन्हें समझना मुश्किल हो गया है। नए नियमों में सभी संशोधनों को एक जगह समाहित कर सरल भाषा में समझाया जाएगा। अभी भवन निर्माण में पांच प्रमुख मानक फ्रंट, साइड व रियर मार्जिनल ओपन स्पेस, ग्राउंड कवरेज, भवन की ऊंचाई और एफएआर शामिल हैं। नए नियमों में इनकी गणना और उपयोग की प्रक्रिया आसान होगी।

ऊंची बिल्डिंग पर रहेगा जोर
शहरों में आबादी बढ़ने के साथ जमीन की उपलब्धता सीमित होती जा रही है। अभी हॉरिजॉन्टल डेवलपमेंट वन क्षेत्रों तक हो रहा है। के कारण शहरों का विस्तार आसपास की कृषि भूमि और सरकार अब वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि कम जमीन में अधिक आवास और व्यावसायिक सुविधाएं विकसित हो सकें।

अब 60 मीटर तक विशेष अनुमति की सीमा
नए नियमों में विशेष अनुमति की सीमा 30 मीटर से बढ़ाकर 45 से 60 मीटर तक करने का प्रस्ताव है। इससे चौड़ी सड़कों के आसपास निर्माण के लिए बार-बार विशेष अनुमति लेने की जरूरत कम होगी। वहीं एफएआर की अधिकतम सीमा तीन से बढ़ाकर चार करने की तैयारी है। इसके लिए कुछ शर्तें निर्धारित की जाएंगी। इसके अलावा शहरों के चुनिंदा क्षेत्रों में अनलिमिटेड एफएआर का प्रावधान भी प्रस्तावित है। इससे उपलब्ध जमीन पर अधिक निर्माण संभव होगा और छोटे शहरों में भी हाईराइज इमारतें बनाने का रास्ता खुलेगा।

इन वजहों से बदल रहे नियम

-नागरिकों के लिए भवन निर्माण के नियमों को सरल और समझने योग्य बनाना।
-मास्टर प्लान लागू नहीं होने वाले शहरों में अनियोजित निर्माण पर नियंत्रण।
-हॉरिजॉन्टल विस्तार के बजाय वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा।
-भवनों में अग्निसुरक्षा और अन्य आधुनिक सुरक्षा संबंधी प्रावधान शामिल करना।
-नई निर्माण तकनीकों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को नियमों में जगह देना।
-ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत निवेश की प्रक्रिया आसान करना।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed