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स्वास्थ्य समस्याओं एवं बीमारियों की प्रारंभिक पहचान कर समय पर उपचार करें सुनिश्चित

भोपाल   उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निवास कार्यालय भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), एनीमिया मुक्त भारत अभियान एवं आशा कार्यक्रम की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तथा आमजन तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक…

स्वास्थ्य समस्याओं एवं बीमारियों की प्रारंभिक पहचान कर समय पर उपचार करें सुनिश्चित

भोपाल  
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने निवास कार्यालय भोपाल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके), एनीमिया मुक्त भारत अभियान एवं आशा कार्यक्रम की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तथा आमजन तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान जिला चिकित्सालयों में संचालित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्रों (डीईआईसी) में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने आरबीएसके 2.0 पोर्टल पर 4डी के अंतर्गत चिन्हित बच्चों की स्क्रीनिंग से लेकर उपचार पूर्ण होने तक की जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज करने को कहा। उन्होंने बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं एवं बीमारियों की प्रारंभिक पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

एनीमिया की पहचान और उपचार का नियमित फॉलोअप करें
एनीमिया मुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एएनएम एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के माध्यम से एनीमिया की आशंका वाले सभी पात्र हितग्राहियों की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनीमिया की पुष्टि होने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार उपलब्ध कराने तथा उपचार के बाद नियमित फॉलोअप करने को कहा। साथ ही, हितग्राहियों की उपचार संबंधी प्रगति का समुचित अभिलेखीकरण और अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने आशा कार्यक्रम की समीक्षा की। बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 63,371 ग्रामीण आशा कार्यकर्ता, 5,051 आशा पर्यवेक्षक तथा 4,125 शहरी आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं की आवश्यकता का आकलन कर आवश्यकतानुसार नवीन नियुक्तियों की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की प्रभावी उपलब्धता से समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य गतिविधियों को सुदृढ़ करने तथा आमजन तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सहायता मिलेगी। बैठक में वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ प्रभाकर तिवारी, डॉ निधि शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

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