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कार्यवाहियों के डर से निशाना बनाने की जुगत में लगे कई कर्मचारी और चिकित्सक

कार्यवाहियों के डर से निशाना बनाने की जुगत में लगे कई कर्मचारी और चिकित्सक -मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सगर की तल्ख तेवर के चलते कार्यालय में मुख्यमंत्री छवि बिगाड़ने वाले कई कर्मचारी पर्दे के पीछे खेल रहे खेल ग्वालियर  जिला मुख्यालय पर पदस्थ रहे कई कर्मचारियों को अपनी मर्जी से काम न होने…

कार्यवाहियों के डर से निशाना बनाने की जुगत में लगे कई कर्मचारी और चिकित्सक

कार्यवाहियों के डर से निशाना बनाने की जुगत में लगे कई कर्मचारी और चिकित्सक
-मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सगर की तल्ख तेवर के चलते कार्यालय में मुख्यमंत्री छवि बिगाड़ने वाले कई कर्मचारी पर्दे के पीछे खेल रहे खेल

ग्वालियर
 जिला मुख्यालय पर पदस्थ रहे कई कर्मचारियों को अपनी मर्जी से काम न होने की स्थिति के चलते अपने ही विभाग प्रमुख को हटाने या दबाने का कुचक्र चलाया जा रहा है। जिससे वह अपने खिलाफ आने वाली किसी भी कार्रवाई को दबाव बनाकर रोक सके और अपने विभाग प्रमुख को पिछले कुछ वर्षों की तरह अपनी जेब में रखकर अपना मंसूबों को आसानी से अंजाम दे सके। जिसके चलते मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में लगातार धरना-प्रदर्शन का दौर चल रहा है। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस सगर की तैनाती के बाद से ही कार्यालय में उनके द्वारा लगातार कार्रवाईयों का दौर जारी है और शासन सहित जिला प्रशासन के नियम-निर्देंशों को लेकर लगातार कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाईयों का दौर शुरु हो गया है। इसके चलते कई कर्मचारियों को मुख्यमंत्री की मंशानुरुप काम न करने के चलते हटाया गया है और उनके खिलाफ सबूत मिलने पर विभागीय कार्रवाईयां शुरु की गई हैं। इन बातों के चलते मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में कई बाबुओं को खुद के निशाने पर आने का डर बना हुआ है और उनकी मलाईदार कुर्सी के जाने का भय भी सता रहा है। जिसके चलते अब वह राजनीतिक सिपहसलारों के बीच अपना दुखड़ा रोकर बदलाव की बात कह रहे हैं। 
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31 अक्टूबर तक का समय 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएस सगर को लेकर कार्यालय सहित पूरे विभाग में इस बात की चर्चा है कि कुछ धनकुबेर बाबुओं ने उनका समय 31 अक्टूबर तक तय कर दिया है और उसके बाद उनका हटाया जाना बताया जा रहा है। 
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15 हजार का वेतन और ठाठ रईसों जैसे

मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में तैनात कई बाबुओं का वेतन 15 हजार से अधिक नहीं है और वह संविदा सेवा में तैनात होने के बावजूद उनके ठाठ रईसों से कम नहीं बताए गए हैं। वहीं कई नियमित कर्मचारियों की जानकारी सामने लाई जाए तो उनके धन कुबेर होने की स्थिति सामने आ जाएगी। 
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विभागीय जांचों से घबड़ाए
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में कई बाबुओं के खिलाफ विभागीय जांच लंबित होने की स्थिति थी लेकिन डॉ. सगर ने उन जांचों को तेज कर दिया है और वहीं कई जांचों को दबाने की स्थिति को फिर से निकालकर शुरु करने का काम किया जा रहा है। इस स्थिति से बचने के लिए दबाब की रणनीति अपनाई जा रही है। 
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कलेक्टर कार्यालय में दबी कई जांचे

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में कई जांचे कलेक्टर कार्यालय की शिकायत शाखा में दब चुकी है। जिनको सालों बाद भी आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। वहीं सूत्रों की मानें तो कई फाइलें वहां से गायब कर दी गई है। 
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डॉ. सचिन श्रीवास्तव के समय भारी गड़बड़ी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में तेनात बाबुओं द्वारा भारी गड़बड़ी पूर्व विभाग प्रमुख डॉ. सचिन श्रीवास्तव के समय की गई है। जिनमें नियम विरुद्ध तरीके से कई कार्यों को अंजाम दिया गया है और उसके चलते गंभीर अनियमितता उनमें सामने आ रही है। जिसको लेकर एक बड़ा गुट वर्तमान विभाग प्रमुख को हटाकर दूसरे अपनी पसंद के विभाग प्रमुख को लाने की तैयारी कर रहा है।
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50 लाख तक का दावा

इस मामले में विभागीय सूत्रों की मानें मो स्वास्थ्य मंत्री के पास 50 लाख रुपए दिए जाने का प्रस्ताव तक भेजे जाने की बातें कहीं जा रही है। हालांकि इस दावे में कितनी हकीकत है यह बात सामने नहीं आ रही है। हालांकि विभाग में ग्वालियर जिले के स्वास्थ्य विभाग मुखिया बनने के लिए पूर्व में भी बड़ा धन देने की बातें कहीं गई थी।

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