,

1857 की क्रांति में अंबाला की ऐतिहासिक भूमिका, अंग्रेजों के खिलाफ ऐसे भड़के थे सैनिक

 अंबाला  आजादी की पहली लड़ाई का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, अंबाला की छावनी का जिक्र सिर्फ बगावत की एक घटना के रूप में नहीं होगा। यह वह धरती थी, जहां अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी शोला बन रही थी। भारतीय सैनिकों ने अंग्रेज अफसरों के आदेश मानने से इन्कार कर दिया था,…

1857 की क्रांति में अंबाला की ऐतिहासिक भूमिका, अंग्रेजों के खिलाफ ऐसे भड़के थे सैनिक

 अंबाला
 आजादी की पहली लड़ाई का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, अंबाला की छावनी का जिक्र सिर्फ बगावत की एक घटना के रूप में नहीं होगा। यह वह धरती थी, जहां अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की चिंगारी शोला बन रही थी।

भारतीय सैनिकों ने अंग्रेज अफसरों के आदेश मानने से इन्कार कर दिया था, बैरकों में बंदूकें संभाल ली थीं और विद्रोह का बिगुल फूंक दिया था। मगर इतिहास का एक दूसरा पहलू भी है। जिस अंबाला की मिट्टी में आजादी की पहली लड़ाई के स्वर बुलंद हो रहे थे।

उसी अंबाला से अंग्रेजी हुकूमत ने क्रांति को कुचलने के लिए 500 ऊंट और 500 बैलगाड़ियों का इंतजाम किया था। एक ओर छावनी में बगावत की आहट थी तो दूसरी ओर अंग्रेजी सेना विद्रोह को दबाने के लिए रसद, परिवहन और जनशक्ति जुटाने में लगी थी।

जला दी गई थी बैंक मास्टर का घर और रेजिमेंट की संपत्ति
'द रिवोल्ट ऑफ 1857 इन हरियाणा' पुस्तक और पंजाब गजेटियर में दर्ज विवरण बताते हैं कि अंबाला में विद्रोह की जमीन पहले से तैयार हो रही थी। 22 अप्रैल को 5वीं रेजिमेंट नेटिव इन्फैंट्री के मेस परिसर स्थित शिप हाउस में आग लगा दी गई।

इसी दिन यूरोपीय इन्फैंट्री लाइंस में मेजर लाउटन के अस्तबल को आग लगाने का प्रयास हुआ। अगले दिन 23 अप्रैल को 9वीं लांसर्स लाइंस में कैप्टन साउंडर्स के घर को निशाना बनाने की कोशिश की गई। 25 अप्रैल को बैंक मास्टर का घर और रेजिमेंट की संपत्ति जला दी गई।

26 अप्रैल को लेफ्टिनेंट एवं राइडिंग मास्टर शा के घर में दिनदहाड़े आग लगाने का प्रयास हुआ। इसके बाद एक मई को 5वीं रेजिमेंट नेटिव इन्फैंट्री लाइंस में बैजनाथ नाम के सिपाही की झोपड़ी भी जला दी गई। एक के बाद एक हुई इन घटनाओं ने अंग्रेज अधिकारियों की नींद उड़ा दी थी।

अमित शाह करेंगे लोकार्पण
इसी ऐतिहासिक विरासत को स्थायी पहचान देने के लिए अंबाला-दिल्ली हाईवे पर 22 एकड़ में करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला 1857 शहीदी स्मारक बनाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पांच नवंबर को इसका लोकार्पण करेंगे।

प्रदेश के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने 1857 के संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि अंबाला की भूमिका के प्रमाण सरकारी रिकार्ड में दर्ज हैं। यह स्मारक उन वीरों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

चर्बी वाले कारतूसों ने गहरी कर दी अविश्वास की खाई
सैनिकों के आक्रोश की एक बड़ी वजह चर्बी लगे कारतूसों की आशंका थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 5वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही शाम सिंह ने अप्रैल 1857 के अंतिम दिनों में फोरसिथ को बताया था कि सैनिकों में भारी आक्रोश और उत्तेजना है।

उन्हें आशंका थी कि अंग्रेज अधिकारी उन्हें चर्बी लगे कारतूस इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करेंगे। धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी इस आशंका ने सैनिकों के मन में अंग्रेजी शासन के प्रति पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा कर दिया था।

10 मई को बैरकों में गूंजने लगी थी बगावत
पंजाब गजेटियर के अनुसार, सात और आठ मई को तत्कालीन अधिकारी फोरसिथ को सैनिकों के बीच विद्रोह की योजना बनने की सूचनाएं मिली थीं। 10 मई को 5वीं और 60वीं भारतीय पैदल सेना रेजिमेंट के सैनिक अपनी बैरकों में पहुंचे।

उन्होंने बंदूकें निकालीं और उनमें गोलियां भरनी शुरू कर दीं। खजाने की सुरक्षा में तैनात 60वीं रेजिमेंट के जवानों ने भी पूरे दिन हथियारों के साथ मोर्चा संभाले रखा। उन्होंने अंग्रेज अधिकारियों के आदेश मानने से साफ इन्कार कर दिया था।

सैनिकों की खुली अवज्ञा के बावजूद अंग्रेज सैन्य अधिकारियों ने खजाने की सुरक्षा में तैनात जवानों को बिना शर्त माफ कर दिया था। एक अन्य हिस्से को एक सितंबर को जेल भेजने का आदेश दिया गया तो सैनिकों ने भागने का प्रयास किया। इसके बाद यूरोपीय सैनिकों ने कुछ जवानों को मार गिराया, जबकि अन्य को पकड़कर उन पर मुकदमा चलाया गया।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About the Author

GoodDoo News

Your trusted source for unbiased, timely news. We cover national and global updates, politics, business, social issues, and inspiring stories. Stay informed with accurate reporting and impactful stories that matter.

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports