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RIMS में 75 से अधिक कर्मियों की भर्ती पर उठे सवाल, एसीबी जांच की मांग से मचा हड़कंप

 रांची  राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत समानता एजेंसी द्वारा बहाल किए गए करीब 75 से अधिक कर्मियों से कथित अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में रिम्स निदेशक को एक लिखित शिकायत सौंपकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की…

RIMS में 75 से अधिक कर्मियों की भर्ती पर उठे सवाल, एसीबी जांच की मांग से मचा हड़कंप

 रांची

 राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत समानता एजेंसी द्वारा बहाल किए गए करीब 75 से अधिक कर्मियों से कथित अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है।

इस संबंध में रिम्स निदेशक को एक लिखित शिकायत सौंपकर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से विभिन्न पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली गई है और यह प्रक्रिया अब भी जारी है।

यह शिकायत शासी परिषद के सदस्य संजय सेठ के प्रतिनिधि ने शिकायत कर खुलासा किया है। मालूम हो कि इससे पहले भी बुंडू ट्रामा सेंटर में आउटसोर्स के माध्यम से बहाली में पैसे लेने का मामला आया था जिस पर कानूनी कार्रवाई चल रही है और और एक कर्मचारी अजय सेठ को भी हटाया गया है शिकायत क बाद निदेशक डा. राजकुमार ने जांच कमेटी गठित किया है।

उधर समानता एजेंसी की और से इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। प्राप्त शिकायत के अनुसार रिम्स में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत मानव बल उपलब्ध कराने के लिए एम-एस समंता सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी दी गई है।

कंपनी को नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर आपरेटर, लिफ्ट अपरेटर, मल्टी टास्किंग स्टाफ (वार्ड बाय), लैब टेक्नीशियन, पैरामेडिकल स्टाफ समेत अन्य पदों पर मानव बल उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया है। एजेंसी को करीब 1000 मानव बल नियुक्त करना है, लेकिन अभी भी कई पद खाली रखे गए हैं।

नियुक्ति के बदले लाखों रुपये लेने का आरोप
शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि चयनित अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की राशि ली गई। आरोप है कि यह रकम संबंधित रिक्त पदों पर नियुक्ति सुनिश्चित कराने के एवज में वसूली गई। शिकायतकर्ता ने कहा है कि कई युवाओं ने रोजगार पाने की उम्मीद में जमीन, गहने तक बेच दिए या कर्ज लेकर राशि का भुगतान किया।

पत्र में कहा गया है कि बेरोजगारी और सीमित रोजगार अवसरों का लाभ उठाकर युवाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। आरोप है कि आउटसोर्स व्यवस्था में मानव बल रखने के नाम पर एक संगठित रैकेट काम कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की जा रही है।

अधिकारियों को जानकारी होने का भी आरोप
इस कथित वसूली की जानकारी आउटसोर्स व्यवस्था से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को है। दावा किया गया है कि इस विषय की जानकारी मौखिक रूप से संस्थान स्तर पर पहले भी दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मामले की सूचना रिम्स के तत्कालीन और वर्तमान प्रशासनिक पदाधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। इसके बावजूद कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो नियुक्तियों की पारदर्शिता और संस्थान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।

बताया जा रहा है कि अगर प्रबंधन सही से जांच करती है और सभी कर्मियों के रोजगार की सुरक्षा का वादा करती है तो सभी ऐसे पीड़ितों का नाम सामने लाया जाएगा।

किन-किन पदों का किया गया उल्लेख
शिकायत में जिन पदों पर कथित रूप से आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से मानव बल रखने और अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से :
    नर्सिंग स्टाफ
    कंप्यूटर अपरेटर
    वार्ड बाय
    मल्टी टास्किंग स्टाफ
    लिफ्ट आपरेटर
    लैब टेक्नीशियन
    पैरामेडिकल स्टाफ
    अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इन पदों के अलावा भी अन्य श्रेणियों में आउटसोर्स कर्मियों की तैनाती की गई है, जिसकी जांच आवश्यक है।

एसीबी जांच की मांग
शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), झारखंड से कराई जाए। नियुक्ति प्रक्रिया, चयन सूची, भुगतान विवरण, एजेंसी और अभ्यर्थियों के बीच हुए लेन-देन की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।

यह भी मांग की है कि जिन अभ्यर्थियों से कथित रूप से राशि ली गई है, उन्हें राहत प्रदान की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध वसूली रोकने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।

स्वास्थ्य संस्थानों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि नियुक्ति के बदले पैसे लेने जैसे आरोप सही साबित होते हैं तो इसका सीधा असर सेवा की गुणवत्ता पर पड़ता है।

योग्यता के बजाय पैसे के आधार पर चयन होने की स्थिति में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आउटसोर्स एजेंसियों के चयन, नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की मेरिट सूची और कार्य आवंटन की नियमित आडिट व्यवस्था होनी चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

अब निगाहें रिम्स प्रशासन पर
शिकायत पत्र की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा शासी परिषद से जुड़े पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। ऐसे में अब सबकी निगाहें रिम्स प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है।
यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं रहेगा, बल्कि

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