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भ्रष्टाचार मामलों में बढ़ी कार्रवाई, लोकायुक्त ने 272 फाइलों का निपटारा किया

 रांची  पांच साल तक बेपटरी रहा लोकायुक्त झारखंड का कार्यालय अब धीरे-धीरे रेस पकड़ने लगा है। इसी वर्ष 21 अप्रैल 2026 को झारखंड के नव नियुक्त लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता के पदभार ग्रहण के साथ ही इस कार्यालय में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायतें आनी शुरू हो चुकी हैं। गत वर्ष जहां 12 महीने में…

भ्रष्टाचार मामलों में बढ़ी कार्रवाई, लोकायुक्त ने 272 फाइलों का निपटारा किया

 रांची
 पांच साल तक बेपटरी रहा लोकायुक्त झारखंड का कार्यालय अब धीरे-धीरे रेस पकड़ने लगा है। इसी वर्ष 21 अप्रैल 2026 को झारखंड के नव नियुक्त लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता के पदभार ग्रहण के साथ ही इस कार्यालय में भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायतें आनी शुरू हो चुकी हैं।

गत वर्ष जहां 12 महीने में केवल 157 शिकायतें आईं थीं, इस वर्ष अब तक 161 शिकायतें आईं हैं। लोकायुक्त के पदभार ग्रहण के बाद से अब तक यानी महज डेढ़ महीने में 100 शिकायतें आ चुकी हैं, जिसपर काम भी शुरू हो चुका है।

लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने इस डेढ़ महीने के भीतर करीब 1400 लंबित फाइलें देख ली हैं। इनमें से 272 फाइलों को निष्पादित कर दिया, जबकि 250 मामलों में लोकायुक्त ने सुनवाई के लिए आदेश जारी किया है।

शिकायतकर्ता को नोटिस गया है और उनकी शिकायतें सुनी जा रही हैं और उसपर आगे की कार्रवाई चल रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकायुक्त कार्यालय में जो शिकायतें आ रही हैं, उनमें सर्वाधिक शिकायतें अंचलों में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध हैं।

कई शिकायतों में लोकायुक्त ने एसीबी दिया है जांच का आदेश
लोकायुक्त ने कई शिकायतों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जांच का आदेश दिया है। ये शिकायतें लोकसेवकों के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित हैं। लोकायुक्त के यहां जो शिकायतें आईं हैं, उनमें भूमि विवाद, टेंडर आवंटन, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने व सेवांत लाभ नहीं मिलने से संबंधित शिकायतें सर्वाधिक हैं।

अंचलों में भ्रष्टाचार पर भी लगातार आ रहीं शिकायतें
लोकायुक्त झारखंड के कार्यालय में अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इनमें रसीद निर्गत करने से रोकना, बिना पक्ष जाने दाखिल खारिज रद करने की अनुशंसा करना, दाखिल खारिज के एवज में रिश्वत की मांग करना और नहीं देने पर आवेदन अस्वीकृत करना, बिना किसी ठोस वजह बताए, बिना पक्ष सुने दाखिल खारिज के आवेदन को अस्वीकृत करना आदि शामिल हैं।

लोग अपनी-अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में लोकायुक्त कार्यालय से संबंधित अंचलाधिकारियों को उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी होगा।

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