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बोक चॉय की खेती ने बदली किसान की किस्मत, गोण्डा के प्रवीण बने किसानों के लिए मिसाल

 गोंडा  एक वक्त था जब खेती को केवल पेट भरने का जरिया समझा जाता था। लेकिन आज वही खेती लाखों रुपये की कमाई देने वाला व्यवसाय बन चुकी है। देश के किसान अब परंपरा की जंजीरें तोड़ रहे हैं। वे आधुनिक सोच के साथ खेतों में उतर रहे हैं। उन्नत बीज, नई तकनीक और बाजार…

बोक चॉय की खेती ने बदली किसान की किस्मत, गोण्डा के प्रवीण बने किसानों के लिए मिसाल

 गोंडा
 एक वक्त था जब खेती को केवल पेट भरने का जरिया समझा जाता था। लेकिन आज वही खेती लाखों रुपये की कमाई देने वाला व्यवसाय बन चुकी है। देश के किसान अब परंपरा की जंजीरें तोड़ रहे हैं। वे आधुनिक सोच के साथ खेतों में उतर रहे हैं। उन्नत बीज, नई तकनीक और बाजार की सटीक समझ ने खेती का पूरा नजरिया बदल दिया है। जो जमीन कभी बस गुजारे लायक फसल देती थी, आज वही जमीन समृद्धि की नई इबारत लिख रही है। सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में यह बदलाव और भी तेज है। यहाँ किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।

वे न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि अपने गाँव और समाज को भी नई दिशा दे रहे हैं।

एक किसान, एक मिसाल
उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के मनकापुर ब्लॉक में बेनीपुर गाँव है। यहाँ के किसान प्रवीण कुमार सिंह इस बदलाव के जीते-जागते प्रमाण हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती की सीमाओं को पार किया। आधुनिक कृषि पद्धतियाँ अपनाईं। आज वे सालाना 25 से 30 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं है। उनके खेतों पर एक दर्जन से अधिक लोग नियमित रोजगार पा रहे हैं। इससे आसपास के ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सुदृढ़ हो रही है।

देशी और विदेशी सब्जियों का संतुलित संगम
प्रवीण पारंपरिक सब्जियों के साथ-साथ विदेशी किस्मों की भी खेती कर रहे हैं। इनमें बोक चॉय यानी चाइनीज पत्ता गोभी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह सब्जी तेजी से तैयार होती है। बाजार में इसके अच्छे दाम मिलते हैं। शहरी उपभोक्ताओं में इसकी माँग लगातार बढ़ रही है। सलाद, सूप और स्टर-फ्राई जैसे व्यंजनों में इसका खूब उपयोग होता है। इसी कारण यह एक नकदी फसल के रूप में स्थापित हो चुकी है।

पोषण से भरपूर, स्वाद से भरपूर
बोक चॉय स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। इसमें विटामिन ए, सी और के पाए जाते हैं। साथ ही कैल्शियम और फोलेट भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसमें कैलोरी कम होती है। पोषण मूल्य उच्च होता है। इसीलिए यह स्वास्थ्य के प्रति सजग उपभोक्ताओं की पसंदीदा सब्जी बनती जा रही है। प्रवीण कुमार की यह उपज लखनऊ और बाराबंकी पहुँच रही है। आसपास के प्रमुख बाजारों में भी इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

ज्ञान बाँटते किसान, जागती उम्मीदें
प्रवीण सिंह की दृष्टि केवल अपने खेत तक सीमित नहीं है। उनके फार्म पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहाँ क्षेत्र के अन्य किसान आते हैं। वे आधुनिक खेती की तकनीकें सीखते हैं। अपनी आमदनी बढ़ाने की राह पकड़ते हैं। यह सामूहिक प्रयास ग्रामीण कृषि में सकारात्मक बदलाव की नींव रख रहा है।

सरकारी सहयोग- नई फसलों को मिल रही नई उड़ान
जिला उद्यान विभाग भी इस बदलाव में सक्रिय भागीदार है। ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और चाइनीज सब्जियों के बीज व पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कम लागत में नर्सरी तैयार करने की सुविधा भी दी जा रही है। इससे छोटे और मझोले किसान भी नई फसलें आसानी से अपना सकते हैं। वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रवीण कुमार सिंह की कहानी यह साबित करती है कि सही सोच,आधुनिक तकनीक और मेहनत के दम पर भारतीय किसान न सिर्फ अपनी किस्मत बदल सकता है, बल्कि अपने समाज के लिए भी बदलाव की मशाल थाम सकता है।

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