IAEA का ईरान को सख्त संदेश, परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर नहीं होगा समझौता

 टोक्यो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह…

IAEA का ईरान को सख्त संदेश, परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर नहीं होगा समझौता

 टोक्यो

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह इस मामले में अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है. संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान के परमाणु भंडार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

इजरायल ने ईरान के साथ 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर फैसेलिटी पर हमले किए थे. इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को उन परमाणु सुविधाओं तक पहुंचने से रोक रखा है. इन परमाणु सुविधाओं में ईरान के पास इतना उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान है कि यदि वह चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है। 

ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी घोषित वेपन प्रोग्राम के 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इन परमाणु स्थलों का IAEA की टीम द्वारा निरीक्षण करने के मामले में अमेरिका और ईरान ने 23 जून को विरोधाभासी बयान दिए थे. अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है. वहीं, ईरान ने इस तरह की कोई अनुमति देने से इनकार किया था। 

ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा: IAEA
जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने पत्रकारों से कहा, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं. लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी. जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा. यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा। 

ये निरीक्षण इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने यानी 'डाउनब्लेंड' करने की बात कही गई है. ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा था कि पिछले साल अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के आने की कोई योजना नहीं है। 

उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी को खारिज करते हुए दिया था. पिछले साल के 12 दिन तक चले युद्ध के बाद से IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, का दौरा करने की अनुमति दी गई है. लेकिन संवर्धन स्थलों तक पहुंच न होने के कारण एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर पा रही है कि ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है और यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति कैसी है. ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. हालांकि, परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है। 

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