ICC का ऐतिहासिक फैसला, अफगानिस्तान की शरणार्थी महिला क्रिकेटरों के सपनों को मिला नया जीवन

 नई दिल्ली ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) ने अफगानिस्तान की र‍िफ्यूजी महिला क्रिकेटरों के लिए बड़ा कदम उठाया है. ICC ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2030 तक इन खिलाड़ियों को आधिकारिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट खेलने का अवसर मिले।  2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद कई महिला क्रिकेटरों को देश छोड़ना पड़ा था और…

ICC का ऐतिहासिक फैसला, अफगानिस्तान की शरणार्थी महिला क्रिकेटरों के सपनों को मिला नया जीवन

 नई दिल्ली

ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) ने अफगानिस्तान की र‍िफ्यूजी महिला क्रिकेटरों के लिए बड़ा कदम उठाया है. ICC ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2030 तक इन खिलाड़ियों को आधिकारिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट खेलने का अवसर मिले। 

2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद कई महिला क्रिकेटरों को देश छोड़ना पड़ा था और वे ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों में शरण लेने को मजबूर हुई थीं। 

ICC के अनुसार इन खिलाड़ियों के लिए एक डेवलपमेंट रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें नियमित कोचिंग, हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग, अंतरराष्ट्रीय मैचों और टूर का अनुभव शामिल होगा। 

उद्देश्य यह है कि 2030 तक वे ICC के क्वालिफिकेशन इवेंट्स में प्रतिस्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार हों. अफगानिस्तान की र‍िफ्यूयी महिला टीम की खिलाड़ी फिरोजा अमीरी ने ICC के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार उन्हें अपने भविष्य के लिए एक ठोस लक्ष्य मिला है. उनका मानना है कि यह पहल केवल क्रिकेट नहीं, बल्कि उन महिलाओं के अधिकारों और सपनों के लिए भी बड़ी उम्मीद लेकर आई है। 

ऑस्ट्रेलिया ने अफगानिस्तान की रेफ्युजी महिला क्रिकेट टीम को बचाए रखने में अहम भूमिका निभाई है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कई खिलाड़ियों और उनके परिवारों के लिए मानवीय वीजा (Humanitarian Visa) दिलाने में मदद की. इसके साथ ही खिलाड़ियों को क्रिकेट क्लबों और ट्रेनिंग प्रोग्राम से भी जोड़ा गया है। 

जनवरी 2025 में इस टीम ने निर्वासन (Exile) के बाद मेलबर्न में 'अफगान विमेंस XI' के नाम से अपना पहला मुकाबला खेला, जो उनके लिए नई शुरुआत का प्रतीक बना। 

इसके बाद ICC ने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया , ECB (इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड)  और BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के साथ मिलकर एक विशेष सहायता कार्यक्रम शुरू किया। 

इस पहल के तहत खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता, विश्वस्तरीय कोचिंग, फिटनेस सपोर्ट और जिन देशों में वे रह रही हैं, वहां नियमित ट्रेनिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 

ICC का यह फैसला महिला क्रिकेट के भविष्य को मजबूत करने के साथ-साथ विस्थापित खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। 

हाल के वर्षों में अफगान महिला खिलाड़ियों के समर्थन की मांग लगातार उठती रही है और अब 2030 का लक्ष्य उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की उम्मीद को नई मजबूती देता है। 

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