होर्मुज में बड़ा समुद्री हादसा, तेल-LPG और खाद से भरे दो जहाजों में ब्लास्ट से मचा हड़कंप

तेहरान  ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि दक्षिणी होर्मुज स्ट्रैट में दो तेल टैंकरों में धमाका हुआ है, जिसके बाद दोनों जहाज बेकार हो गए। IRGC ने एक बयान में कहा कि दोनों टैंकरों ने होर्मुज स्ट्रैट से होकर गुजरने वाले एक असुरक्षित दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल करने…

होर्मुज में बड़ा समुद्री हादसा, तेल-LPG और खाद से भरे दो जहाजों में ब्लास्ट से मचा हड़कंप

तेहरान
 ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि दक्षिणी होर्मुज स्ट्रैट में दो तेल टैंकरों में धमाका हुआ है, जिसके बाद दोनों जहाज बेकार हो गए। IRGC ने एक बयान में कहा कि दोनों टैंकरों ने होर्मुज स्ट्रैट से होकर गुजरने वाले एक असुरक्षित दक्षिणी रास्ते का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी।

IRGC का आरोप है कि उन्हें अमेरिकी सेना ने इस रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया था।
IRGC ने कहा, जब तक इस इलाके में अमेरिका की आक्रामकता जारी रहेगी, तब तक यह जलमार्ग असुरक्षित रहेगा। IRGC ने चेतावनी देते हुए कहा, यह रास्ता पेट्रोकेमिकल उत्पादों, या तेल और गैस की एक बूंद के भी आने-जाने के लिए सुरक्षित नहीं होगा।

साथ ही अमेरिकी सेना से सजा देने वाले ऑपरेशन के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
हालांकि अभी इस घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। IRGC के बयान में जहाजों के नाम, वे किस देश के झंडे के नीचे चल रहे थे, क्रू में कितने लोग थे या किसी जान-माल के नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

ईरानी हमलों से दहल गया अमेरिका, 50000 सैनिक अलर्ट पर

एक तरफ अमेरिका और ईरान की जंग तेज होने लगी है, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान के पास से अपने विमानों को हटाना शुरू कर दिया है. देखने में तो यह लगता है कि जैसे अमेरिका अपने कदम पीछे ले रहा है. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. सीधे तौर पर यह एक युद्ध स्ट्रैटेजी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने साल में दूसरी बार कतर स्थित अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे अल उदेद एयर बेस से अहम सैन्य विमानों को हटाना शुरू कर दिया है. इस बार अमेरिका अपने सबसे कीमती KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमानों को कतर से निकालकर दक्षिणी इजरायल के ओवडा एयर बेस भेज रहा है। 

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यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. सैन्य विशेषज्ञ इसे केवल सुरक्षा उपाय नहीं, बल्कि अमेरिका की नई सैन्य रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं. इससे पहले खबर आई थी कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि पश्चिम एशिया में तैनात 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक पूरी तरह सतर्क हैं. अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमलों का एक और दौर पूरा कर लिया है। 

साल में दूसरी बार एयरबेस से हटाने पड़े विमान
फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, जुलाई के मध्य से अल उदेद एयर बेस से दर्जनों KC-135 विमान उड़ान भर चुके हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अब तक 60 से ज्यादा अमेरिकी एरियल रिफ्यूलिंग विमान इजरायल पहुंच चुके हैं, जबकि इनमें से कम से कम 33 विमान बेन गुरियन एयरपोर्ट पर देखे गए हैं. 18 और 19 जुलाई के बीच भी कई और विमानों के पहुंचने की उम्मीद जताई गई. यह इस साल दूसरी बार है, जब अमेरिका को अल उदेद एयर बेस से अपने विमान हटाने पड़े हैं. इससे संकेत मिल रहे हैं कि वॉशिंगटन अब अपने सबसे बड़े सैन्य अड्डे की सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गया है। 

क्यों अहम हैं KC-135 टैंकर विमान?
KC-135 स्ट्रैटोटैंकर अमेरिकी वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट विमानों में गिने जाते हैं. इनका काम हवा में ही लड़ाकू विमानों और बॉम्बर्स को ईंधन उपलब्ध कराना है. इससे फाइटर जेट लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं और कई घंटों तक मिशन पर बने रह सकते हैं. अगर ये विमान उपलब्ध न हों तो किसी भी बड़े हवाई अभियान की क्षमता काफी सीमित हो जाती है। 

सिर्फ बचाव नहीं, हमले की तैयारी भी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन विमानों को इजरायल भेजने के पीछे दो बड़े मकसद हैं. पहला, इन्हें संभावित ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखना. दूसरा, अगर क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो इन्हें मोर्चे के करीब रखकर तुरंत सैन्य अभियान में इस्तेमाल किया जा सके। 

अल उदेद एयर बेस क्यों है इतना अहम?
कतर का अल उदेद एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के सैन्य अभियानों का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. यहीं से अमेरिका पूरे पश्चिम एशिया में अपने हवाई अभियानों का संचालन करता है. ऐसे में इस बेस से विमानों का हटाया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका अब ईरानी खतरे को पहले से कहीं ज्यादा गंभीरता से ले रहा है। 

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड पहले भी अल उदेद एयर बेस को निशाना बनाने का दावा कर चुकी है. इसके अलावा 2025 में भी इस बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल हमले की आशंकाएं जताई गई थीं. ऐसे में अमेरिका का ताजा कदम बढ़ते तनाव के बीच एक बड़े रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। 

दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता बना होर्मुज
ईरान-अमेरिका जंग की शुरुआत के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट इस समय दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में गिना जा रहा है. खाड़ी से निकलने वाले बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस के टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं. लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यहां से गुजरने वाले जहाजों के सामने हर पल मिसाइल, ड्रोन या समुद्री माइन का खतरा बना हुआ है. यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने होर्मुज में टैंकरों के धमाके का दावा किया हो. पिछले सप्ताह भी IRGC ने कहा था कि दो ऑयल टैंकर माइन से टकराकर फट गए थे. हालांकि उस समय अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि ‘ज्यादातर IRGC के दावों की तरह यह दावा भी गलत है.’ उस दौरान ईरान ने यह भी दावा किया था कि उसने मिसाइल और ड्रोन अभियान चलाकर होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों को रोक दिया था। 

ईरान में MQ-9 ड्रोन मार गिराने का भी दावा
अमेरिका ने इस बीच ईरान पर लगातार 9वीं रात हमला किया है. ईरान के बंदरगाहों पर धमाके हो रहे हैं. इसी बीच ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि पश्चिमी ईरान के केरमानशाह प्रांत में एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC एयरोस्पेस फोर्स की एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम ने इस ड्रोन को निशाना बनाया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है. वहीं, अमेरिका की ओर से भी इन ताजा घटनाओं पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 

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