PoK पर नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद के बयान से मचा बवाल, राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस

नई दिल्ली नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर दिए बयान से सियासी विवाद खड़ा हो गया है. दिल्ली में दिए बयान में रमजान ने कहा कि PoK एक अलग देश है और भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि PoK के…

PoK पर नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद के बयान से मचा बवाल, राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस

नई दिल्ली

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर दिए बयान से सियासी विवाद खड़ा हो गया है. दिल्ली में दिए बयान में रमजान ने कहा कि PoK एक अलग देश है और भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि PoK के मामलों को पाकिस्तान सरकार देखेगी और वह वहां के लोगों की परेशानियों पर बात नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें वहां के लोगों ने भारतीय संसद में नहीं भेजा है. सांसद के इस बयान के बाद PoK को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 

नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद रमजान ने कहा, "हमें PoK की परवाह नहीं है. यह एक अलग देश है, यह दूसरे देश का हिस्सा है. पाकिस्तान सरकार उसके मामलों को देखेगी." उन्होंने यह भी कहा कि वह PoK में रहने वाले लोगों के दर्द की बात नहीं करेंगे, क्योंकि उन्होंने उन्हें भारतीय संसद में नहीं भेजा है। 

आर्टिकल 370 हटे हुए बुधवार को 7 साल हो चुके हैं। इस मौके पर NC यानी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद ने विवादित बयान दे दिया है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर अलग देश है। खास बात है कि राज्य में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार है, जिसमें सबसे बड़ा दल एनसी है। इससे पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने विरोध प्रदर्शन किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सांसद मोहम्मद रमजान ने पीओके के तार पाकिस्तान से जोड़े हैं। उन्होंने कहा है कि PoJK अलग देश है। साथ ही यह हिस्सा पाकिस्तान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, 'हमें पीओके की चिंता नहीं है। वह एक अलग देश है। वह दूसरे देश का हिस्सा है। पाकिस्तान सरकार उसके मामलों को देखेगी' खास बात है कि भारत पीओके को देश का अभिन्न अंग मानता है। ऐसे में इस बयान को लेकर बड़ा राजनीतिक बवाल होने के आसार हैं। फिलहाल, इसपर एनसी की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है।
फारूक अब्दुल्ला ने भी उठाए थे सवाल

नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और उसे केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बनी रहती है तो इस तरह के कदमों को अन्य राज्यों में भी दोहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हुए घटनाक्रम का भारत के संघीय ढांचे पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर को देखिए… एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया, जो मौलिक कानूनों के पूरी तरह खिलाफ है। और अगर वे सत्ता में बने रहे तो वे ऐसा अन्य राज्यों के साथ भी करेंगे, यह तय मानिए।' जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता तभी कायम रह सकती है, जब राज्य एकजुट होकर खड़े रहें।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था ने निर्वाचित सरकार को 'लगभग सभी अधिकारों से वंचित' कर दिया है, जबकि वास्तविक अधिकार केंद्र के पास हैं।

PoK में इंटरनेट बंद, JAAC लगातार कर रही आंदोलन
एनसी सांसद का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में राजनीतिक और मानवीय संकट को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के नेतृत्व में महंगाई, प्रशासनिक नीतियों और चुनावों को लेकर प्रदर्शन हुए हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई, नागरिकों की मौत और इंटरनेट बंद किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। 

भारत ने PoK में हुए चुनाव की आलोचना की
इसी बीच PoK में हुए दूसरे चरण के चुनाव को लेकर भारत सरकार भी पाकिस्तान पर निशाना साध चुकी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वहां की चुनावी प्रक्रिया को "पूरी तरह ढकोसला" बताते हुए कहा था कि चुनावी कवायद से जमीनी हकीकत नहीं छिपाई जा सकती. भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने लोगों के असंतोष का जवाब दमन और बल प्रयोग से दिया है। 

PoK प्रोटेस्ट पर महबूबा मुफ्ती की राय
PoK के हालात को लेकर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी हाल ही में अपनी बात रखी थी. उन्होंने कहा कि एलओसी के उस पार के लोगों की भी शांति, सम्मान और अपने भविष्य को तय करने की आकांक्षा है. उन्होंने पाकिस्तान की ओर से प्रतिनिधि संस्थाओं को कमजोर किए जाने पर सवाल उठाए। 

PoK में विदेशी मीडिया पर बैन
वहीं, PoK में अशांति के बीच पाकिस्तान में डिजिटल न्यूज वेबसाइटों और अल जजीरा इंग्लिश की पहुंच सीमित किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे माहौल में NC सांसद का PoK को लेकर यह बयान राजनीतिक विवाद को और हवा दे सकता है। 

PoK में चुनाव पर भारत ने उठाए सवाल

भारत ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 'तथाकथित' स्थानीय चुनाव 'पूरी तरह से दिखावा' हैं और ऐसी 'खोखली' कवायदें उस इलाके की 'जमीनी हकीकत' को छिपा नहीं सकतीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी नियमित प्रेसवार्ता में कहा, 'पीओके में तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा हैं। असल स्थिति यह है कि वहां बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं और पाकिस्तानी बलों की ओर से अंधाधुंध हत्याएं की जा रही हैं। ऐसी खोखली कवायदें हकीकत को छिपा नहीं सकतीं।'

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