असम
असम में बीजेपी ने जीत की हैट्रिक लगाई है। बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए ने 102 सीटों पर जीत हासिल की। जबकि कांग्रेस सिर्फ 19 सीट पर सिमट गई है। असम में ऐसा देश में पहली बार हुआ कि भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। असम में लगातार तीसरी बार सत्ता से महरूम रहने वाली कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। असम के तीन पूर्व सीएम के बोटों को भी करारी हार का सामना करना पड़ा। इनमें से एक तो वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद भी हैं। असम के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों की हार के साथ ही कांग्रेस ने नया रिकॉर्ड भी बना डाला है।
असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने 15 साल तक कांग्रेस की सरकार चलाई। पूर्व सीएम तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को असम चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। गौरव असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और जोरहाट से तीन बार के सांसद हैं। असम विधानसभा चुनाव में गौरव गोगोई जोरहाट सीट से लड़े। हालांकि उन्हें बीजेपी के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। भाजपा कैंडिडेट हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने गौरव गोगोई को 23,182 वोटों से मात दी।
वहीं पूर्व सीएम हितेश्वर सैकिया दो बार असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हितेश्वर सैकिया के बेटे देबब्रत सैकिया को भी असम विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। अपने पिता के परंपरागत सीट नजीरा विधानसभा सीट से खड़े देबब्रत सैकिया को बीजेपी प्रत्याशी मयूर बोरगोहाईं ने 46,000 से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त दी। देबब्रत खुद 2011 से लगातार इसी सीट से जीतते आ रहे थे। 2016 से विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं।
असम के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके दिवंगत भूमिधर बर्मन के बेटे दिगंता बर्मन (Diganta Barman) को भी असम चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है। हितेश्वर सैकिया पद पर रहते हुए गुजर गए थे। तब भूमिधर बर्मन ने थोड़े समय के लिए मुख्यमंत्री का काम संभाला था। दिगंता बारखेत्री सीट से लड़े लेकिन BJP के नारायण डेका से 84,000 से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त देकर कांग्रेस के गहरी चोट दी।
CM हिमंता बिस्वा सरमा बोले- जनता ने वंशवादी राजनीति को नकारा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इन तीनों की हार पर कहा कि किसी की हार में खुश होना ठीक नहीं, खासकर जब वो हितेश्वर सैकिया के बेटे हों। उन्होंने साफ कहा कि जनता ने ‘खानदानी राजनीति’ यानी सिर्फ बाप-दादा के नाम पर चुनाव लड़ने की सोच को नकार दिया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने तीन-चार बार चुनाव जीते, उनके पास अपनी अलग पहचान बनाने का पूरा मौका था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए। यहां एक दिलचस्प बात यह है कि हिमंत सरमा खुद लगभग 20 साल तक कांग्रेस में रहे और उन्हें पार्टी में लाने वाले हितेश्वर सैकिया ही थे. 2014 में वो BJP में आ गए।
असम में वंशवाद को झटका: तीन पूर्व CM के बेटों की करारी हार, कांग्रेस पर बड़ा सवाल
असम असम में बीजेपी ने जीत की हैट्रिक लगाई है। बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए ने 102 सीटों पर जीत हासिल की। जबकि कांग्रेस सिर्फ 19 सीट पर सिमट गई है। असम में ऐसा देश में पहली बार हुआ कि भाजपा सरकार का कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। असम में लगातार तीसरी बार सत्ता से…

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