भोपाल
13वें भोपाल विज्ञान मेले में आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवाचारों के साथ प्रदेश की पारंपरिक कला, ग्रामीण तकनीक, हस्तशिल्प, कृषि नवाचार और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका मॉडल एक ही मंच पर प्रदर्शित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा विज्ञान भारती एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के सहयोग से 22 से 26 सितंबर तक बरकतउल्ला विश्वविद्यालय मैदान, भोपाल में आयोजित मेले में रूरल टेक्नोलॉजी पेवेलियन विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यहां कारीगरों, किसानों, महिला समूहों, नवाचारियों, शैक्षणिक संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा विकसित तकनीकों एवं उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
विद्यार्थियों को प्रेरित कर रहे नवाचार
डिंडौरी जिले के शहपुरा निवासी श्री शिवम साहू द्वारा विकसित ‘हैक दि रोबो’ ह्यूमनॉइड रोबोट विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण है। यह हिंदी, अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं में बातचीत करने में सक्षम है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित संवाद, कंप्यूटर विजन, चेहरा पहचानने, दृश्य समझने और ऑब्जेक्ट पहचानने जैसी क्षमताएं प्रदर्शित की जा रही हैं।
रायसेन की विज्ञान लोकप्रियकरण एवं सामाजिक शोध संस्था द्वारा केप्लर के गति नियमों पर आधारित मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रहों की गति और कक्षाओं से जुड़े वैज्ञानिक सिद्धांत प्रयोगात्मक तरीके से समझाए जा रहे हैं।
भिंड के युवा नवाचारी श्री दीपक वर्मा द्वारा वर्ष 2022 में विकसित ‘सेफ विजन डिस्टेंस सेंसर’ भी प्रदर्शित किया गया है। मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से आंखों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए विकसित इस नवाचार को वर्ष 2024 में दिल्ली में आयोजित 11वें नेशनल लेवल एक्जीविशन एण्ड कॉम्पिटीशन में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दीपक वर्मा को सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 की 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में भी उनके नवाचार को सराहना मिली।
कृषि और डेयरी के लिए तकनीकी समाधान
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के डॉ. राहुल एम. श्रीवास्तव एवं डॉ. मोहम्मद यासिर द्वारा विकसित ‘डेयरीशील्ड प्रो’ कम लागत वाला सैनिटाइजेशन उपकरण है। इसे डेयरी फार्मों में स्वच्छता और बेहतर वातावरण के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
हैंड्स अराउंड नेचर एण्ड सोसायटी (हैंस) द्वारा सेंसर आधारित मृदा परीक्षण किट और माइक्रो-वेदर स्टेशन के माध्यम से प्रिसिजन फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन तकनीकों से किसान मृदा, मौसम, सिंचाई, उर्वरक और फसल प्रबंधन से जुड़े निर्णय वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर ले सकते हैं। संस्था द्वारा मुरैना और सतना जिले के विभिन्न गांवों में किसानों के साथ कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
मैकेनिकल वोटिंग मशीन का प्रदर्शन
राजगढ़ जिले के पचोर निवासी 75 वर्षीय श्री रामप्रसाद विश्वकर्मा द्वारा विकसित प्योर मैकेनिकल वोटिंग मशीन (एमवीएम) का मेले में लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। आविष्कारक के अनुसार करीब 14 वर्षों के शोध, डिजाइन एवं प्रयोग के बाद इसका प्रोटोटाइप तैयार हुआ। वर्ष 2024 में भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से इसे पेटेंट प्राप्त हुआ। वर्तमान में यह प्रोटोटाइप एवं प्रदर्शन स्तर पर है।
भोपाल की रेवा एसोसिएट्स द्वारा विकसित स्वयं-सफाई वाली पानी की टंकी भी प्रदर्शित की गई है। इसके ढलानदार निचले हिस्से और ड्रेन वाल्व के माध्यम से पानी के साथ तलछट को बाहर निकालने की व्यवस्था की गई है। बालाघाट में लाख प्रसंस्करण से निकलने वाले अपशिष्ट से ‘भूमिप्लस टी-4’ जैविक मृदा सुधारक विकसित किया गया है। परियोजना को मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है।
कबाड़ से जुगाड़ और प्रयोग आधारित शिक्षा
सेवानिवृत्त श्री देवेन्द्र प्रकाश तिवारी कबाड़, धातु, प्लास्टिक और ई-वेस्ट से तकनीकी उपकरणों, वाहनों, वाद्य यंत्रों और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े मिनिएचर मॉडल तैयार करते हैं। वर्ष 2024 में ‘कबाड़ से जुगाड़ प्रतियोगिता’ में उन्हें प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
एसटीईएम लर्निंग सोसायटी द्वारा स्थानीय सामग्री से कम लागत वाली हैंड्स-ऑन लर्निंग आधारित एसटीईएम एवं गणितीय शिक्षण सामग्री प्रदर्शित की गई है। गतिविधि आधारित मॉडल और एसटीईएम/टीएलएम किट्स के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोग के जरिए सीखने का अवसर दिया जा रहा है। पहल का मूल विचार है—‘प्रयोगशाला बच्चे तक नहीं, प्रयोग बच्चे के हाथ तक पहुंचे।’
पारंपरिक शिल्प और स्थानीय संसाधनों को मंच
आशा–एड एंड सर्वाइवल ऑफ हैंडीक्राफ्ट आर्टिसंस द्वारा सतपुड़ा अंचल की छीपा हाथ ठप्पा छपाई कला के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। शिवपुरी के बदरवास की महिलाओं द्वारा खादी, ऊनी एवं सूती कपड़ों से पारंपरिक परिधान और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
भोपाल के शिल्पकार श्री लखन कुमार प्रजापति द्वारा मिट्टी से 150 से अधिक प्रकार की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं। बुधनी के कारीगर श्री करन शर्मा द्वारा लकड़ी के पारंपरिक खिलौने और श्योपुर के वरिष्ठ खराद शिल्पी श्री निसार अहमद द्वारा पारंपरिक खराद कला का प्रदर्शन किया गया है।
बुरहानपुर में महिलाओं द्वारा केले के तने से रेशा निकालकर उपयोगी एवं हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। भोपाल की कॉमन विकास जन सेवा समिति द्वारा सिसल फाइबर निकालने की मशीन प्रदर्शित की गई है। इन पहलों में स्थानीय संसाधनों के उपयोग के साथ रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक खेती की पहल
नर्मदा समग्र न्यास द्वारा आईआईटी जोधपुर के सहयोग से अलीराजपुर के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के लिए जी-फिल्टर तकनीक प्रदर्शित की गई है। यह कम लागत वाला गुरुत्वाकर्षण आधारित सिरेमिक जल फिल्टर है, जिसके लिए बिजली या बाहरी दबाव की आवश्यकता नहीं होती। स्वानंद गोविज्ञान, सौसर द्वारा गोबर से निर्मित उपयोगी एवं सजावटी उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र, नकतरा, रायसेन द्वारा ऑन-फार्म परीक्षण, किसान प्रशिक्षण, फ्रंटलाइन प्रदर्शन, महिला स्व-सहायता समूहों का मार्गदर्शन और कृषि प्रदर्शनियों सहित विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया है। इनके माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी पहुंचाई जा रही है।
विज्ञान के नवाचारों से रूबरू हो रहे विद्यार्थी और आमजन
विज्ञान मेले में आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ पारंपरिक कला, ग्रामीण तकनीक, हस्तशिल्प, कृषि नवाचार और स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका मॉडल प्रदर्शित किए जा रहे हैं। विभिन्न स्टॉलों पर विद्यार्थी और आमजन मॉडल, उत्पाद एवं प्रत्यक्ष प्रदर्शनों के माध्यम से नवाचारों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। मेले का उद्देश्य विज्ञान को आमजन के जीवन से जोड़ने के साथ प्रदेश की स्थानीय प्रतिभाओं, नवाचारों और पारंपरिक ज्ञान को मंच प्रदान करना है।।
















